न्यूज चैनलों ने जमानत दिलाई सलमान को, जेल नहीं जाएंगे

मुंबई : वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह लिखते हैं – ‘मीडिया चैनलों ने मुम्बई हाईकोर्ट से ज़मानत दिलाई, जेल नहीं जायेंगे सलमान। मुकदमे ज़्यादा, अदालतें कम होने और चैनलों के बिजी रहने से ‘देस’ का फ़ैसला !’

उल्लेखनीय है कि हिट एंड रन मामले में सलमान खान को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। जस्टिस थिप्से ने सलमान की पांच साल की सजा पर भी रोक लगा दी गई है, जो मुंबई की सेशन्स कोर्ट ने दी थी। सेशन्स कोर्ट में सलमान पहले सरेंडर करना, फिर जमानत लेनी है। आज सलमान की अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त हो रही है, इसलिए उन्हें नया बेल बॉन्ड भी भरना होगा। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। सलमान को जमानत मिलते ही उनके घर के बाहर जश्न भी शुरू हो गया। जमानत के लिए सलमान को 30 हजार रुपये का बेल बॉन्ड भरना होगा।

वरिष्ठ पत्रकार सुमंत भट्टाचार्य लिखते हैं – विमर्श तो “क्रिमनल जस्टिस सिस्टम” पर होना चाहिए। सलमान पर बात क्या रखी..सारे दोस्तों ने दौड़ा लिया। सारे कमेंट को पढ़ने के बाद दो-तीन बातें समझ में आई हैं मेरे। भारतीय दंड विधान का एकमात्र मकसद मुजरिम का सामाजिक बहिष्कार करना है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर मुझ पर लगे सारे आरोप हवा में हैं। कोई आधार नहीं है उनका। सो सबसे पहले यह तय कर लें कि भारतीय न्याय प्रणाली का मूल उदेश्य क्या है..? शिक्षित नागरिक समाज और मीडिया मूल बिंदुओं पर चर्चा करने से कतराता है या फिर समझ नही है उसे। विमर्श के मूल में होना चाहिए मौजूदा “क्रिमलन जस्टिस सिस्टम”। जो अंग्रेजों के वक्त से चला आ रहा है और बेहद लचर है। यही वजह है कि सलमान या दूसरे ताकतवर लोग “लॉ” के साथ मनमाफिक खेलते हैं। क्या बेहतर होता कि सलमान के बहाने ही सही, विमर्श के केंद्र में “क्रिमनल जस्टिस सिस्टम” होता ..? अब आप कहेगे कि मेरी पोस्ट में “क्रिमनल जस्टिस सिस्टम” का जिक्र नहीं था तो मैं पूछूंगा विमर्श को सार्थक दिशा देने से आपको रोका किसने था..? मैंने बहका दिया और आप बहक गए..? फिर तो संभाल सके भारत को आप..? क्या मेरे वकील मित्र इस दिशा में सार्थक हस्तक्षेप करेंगे ?

टिप्पणियां एफबी वॉल से, फोटो साभार हिंदुस्तान टाइम्स से

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *