अखबार मालिक के पत्र का सम्पादक ने यूं दिया जवाब

उलटा चोर कोतवाल को डांटे…. दोस्तो smpath ने मुझे आज यानी शनिवार शाम यह सन्देश भेजा है। अपनी आईडी से नहीं भेजा। डेली प्रयुक्ति से भेजा है। इस आई डी से यह मेरे साथ पहला संवाद है। इस आई डी को मैंने लगे हाथ ब्लॉक कर दिया है।

ब्लॉक करने की वजह ये है कि यह इनसान अपनी आईडी से ही मुझसे संवाद करता रहा है। मैसेंजर में बातचीत के दौरान मैंने इसके हर गलत काम का विरोध किया तो इसने मुझे ब्लॉक कर दिया। मैंने क्रमवार अपनी समझ से जवाब दिया है। आप भी पढ़ ले।

मैं कोई वकील नहीं हूं। पर जो लिखा है सच लिखा है। और हां शाम को ही इसका मेरे मोबाइल में फोन आया। मुझसे बोला मेरे और विनय के खिलाफ सेक्टर 20 पुलिस थाने में शिकायत दी है। मुझसे बोला उसे सिद्घ करो।

मेरा जवाब

प्रिय श्री sampath

मुझे यह प्रतिवेदन आप द्वारा संचालित डेली प्रयुक्ति से मिला। इसे मैंने साधिकार ब्लॉक कर दिया है। मैंने संगठन और प्रबंधन के खिलाफ कोई भी आधारहीन आरोप नहीं लगाया है।

1. समझौते का खुलासा करना किसी किस्म का उल्लघंन नहीं है। और फेसबुक पोस्ट पर अपनी आपबीती लिखना मेरा आधिकार है।

2. हां मुझे प्रबंधन के भरोसे पर ऐतबार नहीं है। मैं भारतीय नागरिक हूं। मुझे अपने विधि विधान और संविधान पर पूरा भरोसा है। और आप यह सिद्ध करो की सोशल मीडिया पर उद्घधित सत्य अफवाह है। समाधान भारत के विधि विधान के अन्तर्गत है।

3. यह आप साबित करें कि मैंने कुछ भी झूठ लिखा है

4.वेतन सम्बन्धी मामला नियोक्ता और कर्मचारी के बीच गोपनीय नहीं है। इसलिए यह विधि विधान के अन्तर्गत है। माननीय अदालत यह कहता है कि सब संविधान का पालन करें। अदालत का सम्मान करना आप सीखे। यह जानते हुए भी चेक बाउंस होना अपराध है। आपके हस्ताक्षरित चेक लगातार बाउंस हो रहे हैं।

5. आपके इस क्रम के सवाल का जवाब क्या दूं आपने प्रसार विभाग का 8 और संपादकीय विभाग का 4 माह का वेतन हजम कर रखा है। नैतिकता और मूल्यों का पाठ मुझे न पढ़ाए।

6. महोदय आप संवाद की बात पर झूठ बोल रहे हैं। सोशल मीडिया में वो भी गैर आधिकारिक मंच जिस पर पहली बार आपने पहल की है यह सन्देश देकर मुझे हतोत्साहित करना चाहते है से में डरने वाले नहीं। आप मेरा भुगतान हजम करना चाहते है वो में आपको करने नहीं दूंगा। आप झूठ बोलकर कर देश की विधि प्रणाली को झुठला नहीं सकते।

7. आप कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार रखते है। मेरी पुरानी पोस्ट देखिए। हिम्मत है तो उत्तर दीजिए।

8. महोदय कितना शोषण करोगे। लोगों के जब बीवी बच्चे तबाह हो जाएंगे तब वेतन दोगे। आपने कभी भी कम्पनी की वित्तीय स्थिति पर चर्चा नहीं की। न ही कम्पनी के वित्तीय स्रोत की जानकारी दी। और पूछने पर आपने अमानवीय सलूक किया। हां मैं पत्रकार हूं। वरिष्ठ आपने कहा आपका शुक्रिया। वरना आप तो मेरी संज्ञा बुड्ढा और अपने डॉग से कर चुके हो। अख़बार चलाने को आपको किसी ने नहीं सलाह दी। आपने किस मकसद से चलाया। यह आपको और विनय कुमार गूली को पता होगा। आपने जो कुछ किया है उसे उजागर करना बदनाम करने जैसा कर्म कैसा हो गया।

9., माफी किस बात की। Sampath aur Vinay आप दोनों ही संगठन हो। आप ही प्रयुक्ति हो। दोषी आप दोनों हो। इसलिए अपने दोष स्वीकार कर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगो। बाकी मुझे जो चेक दिए हैं वेतन के। उसकी तारीख 30 नवम्बर है। वो उस तारीख को बैंक में दाखिल होगा। हां आप लोगो ने पी एफ काटा। खाता नहीं खोला। जमा नहीं कराया। यह राष्ट्रीय अपराध किया है।
Sampath ji इसके बाद आपने फोन किया। पक्का आवाज टेप की होगी। कर लो। उसकी परवाह नहीं। भारत का कानून सर्वोपरि है। उससे कोई बड़ा नहीं।
अगर इंसानियत जिंदा है। तो कर्मचारियों का वेतन दो। डराओ धमकाओ नहीं।

अच्छा दिन।

हार्दिक शुभकामनाओं समेत
मुकुंद
स्थानीय संपादक
प्रयुक्ति


अंग्रेजी में भेजा गया मूल पाठ पढ़ने के लिए नीचे के शीर्षक पर क्लिक करें…

प्रयुक्ति अखबार के बागी संपादक मुकुंद को मालिक संपथ ने भिजवाया लंबा-चौड़ा पत्र, पढ़ें

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