इस संजय गुप्ता को सुप्रीम कोर्ट की बात न मानने पर हुई दस दिन की जेल, एक करोड़ 32 लाख रुपये जुर्माना भी भरना होगा

ये संजय गुप्ता एक मिल मालिक हैं. इनका भी काम  कोर्ट को गुमराह करना हो गया था. सो, इस संजय गुप्ता को सुप्रीम कोर्ट ने दस दिन की जेल और एक करोड़ 32 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर दिमाग ठिकाने पर ला दिया. इस फैसले से पता चलता है कि कोई भी अगर माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करेगा और अदालत को गुमराह करते पाया गया तो उसे एक लाख रुपये प्रतिमाह का जुर्माना और दस दिन की जेल होगी. सोमवार को शीर्ष अदालत ने संजय गुप्ता नामक एक मिल मालिक को 10 दिन की कैद के साथ-साथ एक करोड़ 32 लाख रुपये का जुमार्ना सुनाया है.

पीठ का कहना है कि अदालत आदेश पर आदेश पारित करती है, लेकिन इसके पालन की किसी को चिंता ही नहीं है. ऐसे में सबक सिखाना जरूरी था। चीफ जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने संजय गुप्ता नामक फैक्टरी मालिक को सात दिनों के भीतर तिलक मार्ग थाने में समर्पण करने को कहा है. पीठ ने जुर्माने की राशि को एक अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराने का निर्देश दिया है.

पीठ ने कहा कि यह आदेश उनके लिए एक टोकन चेतावनी है, जो अदालती आदेश का पालन नहीं करते और एक के बाद एक झूठ बोल कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश करते हैं. यह सुप्रीम कोर्ट के लिए एक विपदा है. पीठ ने तल्खी दिखाते हुए कहा कि अदालत आदेश पर आदेश पारित करती हैं, लेकिन किसी को इसकी चिंता ही नहीं है. भविष्य में कोई सुप्रीम कोर्ट को हल्के में न ले, इसलिए इस तरह का आदेश जरूरी है.

पीठ ने पाया कि दिल्ली के रिहायशी इलाकों से फैक्टरी को शिफ्ट करने के अदालती आदेश के बावजूद संजय गुप्ता बापरोला में दाल की मिल चला रहा था, लेकिन वह लगातार झूठ बोलता रहा कि उसने फैक्टरी को शिफ्ट कर दिया है. बापरोला गांव के निवासी ने अवमानना याचिका दायर कर संजय गुप्ता पर आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया था. पीठ ने अदालत में मौजूद संजय गुप्ता से कहा कि आपको सजा तो जरूर मिलेगी, क्योंकि आपने अदालत को लंबे अर्से तक गुमराह किया है.

पीठ ने गुप्ता को सजा के दो विकल्प दिये. पहला या तो वह वर्ष 2004 से 2015 तक (जिस दौरान गुपचुप फैक्टरी चला रहा था) प्रति महीने एक लाख रुपये के हिसाब से 1 करोड़ 32 लाख रुपये जुमार्ना और 10 दिनों की कैद का विकल्प चुने. दूसरा वर्ष 2004 से लेकर 2015 तक 10 हजार प्रति महीने के हिसाब से जुमार्ना और तीन महीने कैद की सजा भुगते. गुप्ता ने पहला विकल्प चुना, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. माना जा रहा है कि यह नियम अब उन अखबार मालिकों पर भी लागू होगा जिन्होंने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश अपने यहां नहीं लागू किया.

पत्रकार शशिकांत सिंह की रिपोर्ट.

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