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शाबास टीवी चैनलों! पूरी बहस ‘आप’ बनाम पुलिस पर फोकस रखा, वसुंधरा और मोदीजी का नाम तक न आने दिया

Sandhya Navodita : मौत के मुक़दमे की घंटों लम्बी बहस में महारानी वसुंधरा, मोदीजी और कांग्रेस का नाम तक नहीं आ पाया. यह बड़ी उपलब्धि है. साँच को आँच नहीं आई. यह साबित हुआ कि केजरीवाल और उनकी पार्टी ही मौत के लिए ज़िम्मेदार है. थोड़ी देर में यह भी साबित किया जा सकता है कि देश में अब तक जो तीन लाख किसानों ने आत्महत्या की है उसके ज़िम्मेदार भी केजरीवाल हैं. यह बड़ी बात है टीवी चैनलों ने किसान की बदहाली के मुद्दे पर एक शब्द भी चर्चा न होने देने में सफलता हासिल की, और पूरी बहस में आप पार्टी और पुलिस के बीच ही मामला बनाये रखा. जिसे बाद में रेफरी भाजपा ने आकर हल किया. आप के मुजरिमों के बहुत रोने गाने के बाद भाजपा का दिल पसीजा. उन्होंने कहा कि वैसे तो ज़िम्मेदार केजरीवाल एंड पार्टी ही हैं पर अगर कोई पुलिस वाला भी दोषी पाया गया, जिसकी कोई संभावना नहीं है, तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा.

Sandhya Navodita : मौत के मुक़दमे की घंटों लम्बी बहस में महारानी वसुंधरा, मोदीजी और कांग्रेस का नाम तक नहीं आ पाया. यह बड़ी उपलब्धि है. साँच को आँच नहीं आई. यह साबित हुआ कि केजरीवाल और उनकी पार्टी ही मौत के लिए ज़िम्मेदार है. थोड़ी देर में यह भी साबित किया जा सकता है कि देश में अब तक जो तीन लाख किसानों ने आत्महत्या की है उसके ज़िम्मेदार भी केजरीवाल हैं. यह बड़ी बात है टीवी चैनलों ने किसान की बदहाली के मुद्दे पर एक शब्द भी चर्चा न होने देने में सफलता हासिल की, और पूरी बहस में आप पार्टी और पुलिस के बीच ही मामला बनाये रखा. जिसे बाद में रेफरी भाजपा ने आकर हल किया. आप के मुजरिमों के बहुत रोने गाने के बाद भाजपा का दिल पसीजा. उन्होंने कहा कि वैसे तो ज़िम्मेदार केजरीवाल एंड पार्टी ही हैं पर अगर कोई पुलिस वाला भी दोषी पाया गया, जिसकी कोई संभावना नहीं है, तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा.

पुलिस जी, आप महान साबित हुए. क्योंकि यह मौत ऎसी रही जो आपके हाथ हिलाए बिना हो गयी. न आपने लाठी चलाई, न गोली चलाई. काश ऐसे ही लोग मारें तो आप की खाकी दागदार न हो. इतने बड़े मुद्दे का हल मीडिया और भाजपा ने संसद के बाहर ही निकाल लिया. अब बस केजरीवाल का इस्तीफ़ा हो जाए तो कम से कम आगे से किसान आत्महत्या नहीं करेंगे. मीडिया जी आप संत हैं जिसके सामने एक आदमी जान देता रहा और कैमरा पकडे हुए आपका हाथ ज़रा भी काँपा. आपकी पत्रकारिता की पढ़ाई कामयाब हुई. आपको तो नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए. और गजेन्द्र जी बैठे ठाले आपको छप्पर फाड़ टी आर पी दे गए.

और, हम सब भी महान साबित हुए. हमने भी गला फाड़ा कि वहाँ खड़े लोगों ने कुछ क्यों नहीं किया! जैसे हम और आप ही बस अलग मिटटी के हैं. हम तो वैसे तमाश बीन हैं ही नहीं जो एक्सीडेंट होते देख दो मिनट नज़ारा देख निकल लेते हैं. हम मौत का वो खेल न देखते , हम तालियाँ और सीटियाँ न बजाते. हम तो सीधे पेड़ पर चढ़ते और उसे उतार लाते. साबित यह भी हुआ कि किसान आत्महत्या में तभी दम है जब वो लाइव हुई हो, उसमे सत्ता और विपक्ष को भरपूर मसाला मिले. और हाँ, मीडिया को भी. जिसमे हमें और आपको भी लाइव एहसास हो.

हम सब तो वैसे भी मौत के वीडियो को बहुत पसंद करते हैं, वह शेर ने चिड़ियाघर में जब आदमी को मारा था, जब एक आदमी ने ट्रेन पर चढ़ कर बिजली का तार पकड़ लिया और भभक के जल गया, वह जो ट्रेन से कटा और धड़ अलग हो गया, वह सब तो हम फेसबुक पर भी खूब शेयर करते हैं. साबित यह भी हुआ कि बस अब और कोई आत्महत्या नहीं होगी, गो कि इसी के साथ आज एक और गजेन्द्र जाटव ने ट्रेन से कट कर आत्महत्या कर ली. पर वह लाइव नहीं थी, दूसरी बात उससे किसी सरकार को गिराया नहीं जा सकता , अरे भाई समझा कीजिये वह अपनी ही सरकार है.

संध्या नवोदिता के फेसबुक वॉल से.

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