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मध्य प्रदेश

खुलेआम पत्रकारों को धमकी, चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

सुना है सिवनी में अब ब्लेकमेलर पत्रकार भी पैदा हो गये हैं जो पहले यदा-कदा ही देखने को मिलते थे। नगर का एक मिड डे अखबार (राष्ट्रचंडिका नही) जो लोगों की वाणी कहलाता था जिस पर अब ब्लेकमेलिंग का धब्बा लग गया है। यूं तो सिवनी में ऐसे भी पत्रकार है जिनके पास अखबार न होते हुए भी वह डंके की चोट में वसूली अभियान चलाते हैं। राष्ट्रचंडिका ने पहले भी कई ऐसे पत्रकारों के काले कारनामें सामने लायें हैं जिनका कोई वजूद (अखबार) ही नहीं है। ऐसे पत्रकारों को हम ‘छोटे कद के’ पत्रकार कहेंगे जिनका कद वास्तविकता में लंबा क्यों न हो लेकिन पत्रकारिता में छोटे कद के नाम से ही जाने जायेंगे।

<p>सुना है सिवनी में अब ब्लेकमेलर पत्रकार भी पैदा हो गये हैं जो पहले यदा-कदा ही देखने को मिलते थे। नगर का एक मिड डे अखबार (राष्ट्रचंडिका नही) जो लोगों की वाणी कहलाता था जिस पर अब ब्लेकमेलिंग का धब्बा लग गया है। यूं तो सिवनी में ऐसे भी पत्रकार है जिनके पास अखबार न होते हुए भी वह डंके की चोट में वसूली अभियान चलाते हैं। राष्ट्रचंडिका ने पहले भी कई ऐसे पत्रकारों के काले कारनामें सामने लायें हैं जिनका कोई वजूद (अखबार) ही नहीं है। ऐसे पत्रकारों को हम 'छोटे कद के' पत्रकार कहेंगे जिनका कद वास्तविकता में लंबा क्यों न हो लेकिन पत्रकारिता में छोटे कद के नाम से ही जाने जायेंगे।</p>

सुना है सिवनी में अब ब्लेकमेलर पत्रकार भी पैदा हो गये हैं जो पहले यदा-कदा ही देखने को मिलते थे। नगर का एक मिड डे अखबार (राष्ट्रचंडिका नही) जो लोगों की वाणी कहलाता था जिस पर अब ब्लेकमेलिंग का धब्बा लग गया है। यूं तो सिवनी में ऐसे भी पत्रकार है जिनके पास अखबार न होते हुए भी वह डंके की चोट में वसूली अभियान चलाते हैं। राष्ट्रचंडिका ने पहले भी कई ऐसे पत्रकारों के काले कारनामें सामने लायें हैं जिनका कोई वजूद (अखबार) ही नहीं है। ऐसे पत्रकारों को हम ‘छोटे कद के’ पत्रकार कहेंगे जिनका कद वास्तविकता में लंबा क्यों न हो लेकिन पत्रकारिता में छोटे कद के नाम से ही जाने जायेंगे।

अभी कुछ दिनों से एक पत्रकार की ब्लेकमेलिंग किस्से लोग ठहाके मार-मारके सुन-सुना रहे हैं। चर्चाओं के आधार पर सुनने को मिल रहा है कि बीते दिनों केवलारी/उगली के एक पत्रकार जो एक मिड डे अखबार का संवाददाता भी है, ने रेत ठेकेदार से मैनेज करने की बात कही थी जिसका आडियों वाट्सअप में वायरल हो गया। इस आडियों में यह ब्लेकमेलर पत्रकार कह रहा है कि साहब, आप तो हमें मैनेज ही नहीं कर रहे, हमारे बॉस के साथ रेस्टहाऊस में बैठकर मैनेजमेंट की बात कर लो। इस तुच्छ शब्दों से ऐसा लगता है मानों जैसे भूखे मर रहे हो, पत्रकारिता में पैसा लेना जायज है लेकिन ब्लेकमेलिंग का नहीं। इतना ही नहीं इस ब्लेकमेलर पत्रकार के बॉस (उस्ताद) तो पहले से ही चर्चाओं में रहते हैं। सिवनी छोड़ मंडला, बालाघाट जैसे दूसरे जिलों में इनके द्वारा जमकर धनउगाही की गई है, ऐसा मंडला के लोग बताते हैं। इतना ही नहीं इनका चेला तो ऑडियो में अपने अपने अखबार को भोपाल से प्रकाशित होना बताकर रेत ठेकेदार को धौंस दे रहा है। यही नहीं आडियों में तो रेत ठेकेदार ने चेले के उस्ताद को 05 हजार रूपये महीना देने की बात भी कही।

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 धीरे-धीरे अब इनके गढ़े मुर्दे उखडऩे लगे हैं जिसके बाद चर्चा यह भी चल रही है कि 01 से 10 तारीख के बीच इनके पास एक जुआं खिलाने वाले नालकट का पैसा भी पहुंचता है।

इन चंद ब्लेकमेलरों की वजह से पूरी मीडिया बदनाम हो रही है। कभी पत्रकार संगठन के नाम से तो कभी सदस्य बनाने के नाम पर ‘छोटे कद’ के पत्रकार वसूली करते फिरते हैं। बहरहाल ऐसे पत्रकारों को अच्छा खासा सबक मिल गया है जो अब अपना मुंह छिपाए लोगों को सफाई देते फिर रहे हैं। 

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सच्चाई छापने वाले पत्रकार कभी मरते और डरते नहीं लेकिन बीते दिनों उत्तरप्रदेश के एक निष्पक्ष पत्रकार शाहजहांपुर के जगेंद्र सिंह को जिंदा जला दिया गया। इस पत्रकार ने सिर्फ इतनी हिम्मत जुटाई कि उसने काला धंधा करने वालों की खाल उधेड़ दी। उसे पुलिस की घेराबंदी में जिंदा जला दिया गया। इस हादसे के बाद अब नेता, मंत्री, दबंगों व ठेकेदारों के हौसले बुलंद हो गये हैं। वे तो खुलेआम पत्रकारों को धमकी देते हैं कि तुझे और तेरे परिवार को उठवा लेंगे मगर निष्पक्ष व ईमानदार पत्रकार की इनकी धमकी कुत्ते की भौंक के समान लगती है। 

सिवनी (म.प्र.) में भी ऐसे एक पत्रकार हैं अजय मिश्रा, जो राष्ट्रचंडिका के संपादक को पहले भी जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। बावजूद इसके राष्ट्रचंडिका इनकी बखिया उधेड़ते आ रहा है और आगे भी उधड़ेगा। अजय मिश्रा (स्वयंभू) के बारे में कहा जाता है कि ये ब्राम्हण समाज में अपनी धाक जमाकर समाज के लोगों को अपने इशारे पर नचाना चाहते हैं लेकिन हम ऐसा कदापि नहीं होने देंगे। मिश्रा जी हैं तो ठेकेदार लेकिन ये अवैध कब्जा करने के मामले में भी बदनाम हो चुके हैं। 

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समाज में अपना एकछत्र राज जमाने की चाह रखने वाले अजय मिश्रा पत्रकारिता में खासी दखल रखते हैं, भले इन्हें पत्रकारिता का ‘प’ नहीं मालूम हो, लेकिन अखबार की आड़ में अपने काम निकालना इन्हें अच्छी तरह आता है। पत्रकारों को अक्सर अखबार से दूर रहने की हिदायत देने वाले अजय मिश्रा ने खुद एक दबंग अखबार लाया लेकिन वह ज्यादा दिनों तक इनके हाथ में नहीं रहा और इनके पास से अखबार छीनकर किसी और को दे दिया गया। 

राष्ट्रचंडिका अपने विगतांकों में ब्राम्हण समाज के स्वयंभू युवा अध्यक्ष की मानसिकता को प्रकाशित करते आ रहा है जिसके बाद ब्राम्हण समाज भी सतर्क होता दिख रहा है और जगह-जगह बैठकों का दौर जारी है। हमारे सूत्र बताते हैं कि कुछ बैठकों से युवा अध्यक्ष अजय मिश्रा को दूर रखा गया जिसके बाद यह अंदेशा लगाया जा सकता है कि ब्राम्हण समाज में जल्द ही कोई बदलाव आ सकता है और चुनाव हो सकते हैं। 

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उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हुए हमलों की ही तरह सिवनी में पत्रकारों पर हमले होने की बातें फिजां में तैर रही हैं। इस आशय का एक आवेदन बीते दिवस राष्ट्रचंडिका के सपांदक ने कोतवाली सिवनी में दिया है। सिवनी में भी मीडिया जगत द्वारा कुछ लोगों के अनैतिक कामों को अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक किया जा रहा है। इससे झुझलाकर कुछ लोगों के द्वारा मीडिया पर्सन्स पर हमले की तैयारियां भी की जा रही हैं। हमारे द्वारा कोतवाली में दिए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि अजय मिश्रा के खिलाफ लगातार सच्चाई छापने के बाद सूचना मिल रही है कि राष्ट्रचंडिका के संपादक या उनके परिवार पर कोई हमला कर सकता है। इसी के चलते थाना कोतवाली को इसकी इत्तला दे दी गई है। यदि संपादक या उसके परिवार को कुछ होता है तो इसके जिम्मेदार अजय मिश्रा होंगे। 

अखिलेश दुबे से संपर्क : rashtrachandika@rediffmail.com

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