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सुख-दुख

सुब्रत रॉय ने ये साम्राज्य जिस पैसे से खड़ा किया, उसकी बुनियाद कहां थी…

ख़ुशदीप सहगल-

सुब्रत रॉय ने अमर सिंह के कहने पर अमिताभ बच्चन को आर्थिक संकट से उबारने में मदद की…

कई साल क्रिकेट टीम को स्पॉन्सर किया, 2011 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के हर सदस्य को फ्लैट गिफ्ट में दिया…

नोएडा में हर साल सहारा स्थापना दिवस पर बड़े बड़े फिल्म स्टार्स को बुलाया…

शोमैनी… तड़क भड़क… ठाठ बाट…ऐशो आराम… सेलेब्रिटीज़ पर पानी की तरह पैसा …ये सब शौक़ में शुमार रहा…

ये महल जिस पैसे से खड़े किए गए उसकी बुनियाद कहां थी… ग़रीब गुरबों, आम आदमी ने खून पसीने की कमाई को लुभावनी पोंजी स्कीम्स में लगाया…फिर अपना ही पैसा वापस पाने के लिए दर दर ठोकरें खाईं…

ग़रीब की आह तो लगती है…तिहाड़ की हवा…लंबी बीमारी…अस्पताल में कोई पास नहीं फटका…वो भी जिन पर दोनों हाथ से पैसा लुटाया…

किसी ने क्या ख़ूब कहा है…

क़फ़न में जेब नहीं होती…


सुब्रत रॉय का 75 वर्ष की आयु में निधन: गोरखपुर की एक चिटफंड कंपनी से एयरलाइंस, रीयल इस्टेट और मीडिया में सहारा जितना तेजी से बढ़ा उतनी ही तेजी से गिरा भी. सुब्रत रॉय भी ऐसे जी रहे थे जैसे हमेशा ही रहेंगे. सहारा में रहते हुये इनकी आत्ममुग्धता को करीब से देखा. सुब्रत रॉय सबको खरीद लेने की चाहत के साथ जिये. – प्रशांत टंडन


सुब्रत रॉय सहारा एक करिश्माई व्यक्ति थे। वो भारत के उद्योग जगत के पहले सुपर स्टार थे। एक दौर था। उनकी शोहरत का सूरज कभी अस्त नहीं होता था। बड़े बड़े नेता लाइन लगाकर खड़े रहते थे। बॉलीवुड के सुपर स्टार उनके घर चाय वितरण करते थे। उद्योग जगत नतमस्तक था सुब्रत रॉय के सामने। पत्रकार उन्हें सहारा प्रणाम करके गौरवान्वित महसूस करते थे। रॉय ने जिस पर भी हाथ रख दिया वो दौलत, शोहरत और ताकत की बुलंदी पर होता था। चिट फंड से लेकर एयरलाइंस तक सब धंधा किया। उनके बेटों की शादी हुई थी लखनऊ से। भारत के प्रधानमंत्री, दर्जन भर से अधिक केंद्रीय मंत्री, कितने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और पूरा उद्योग जगत रॉय के बुलावे पर आया था। क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी मेहमानो को खाना परोसते थे। वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सभी सदस्यों को अम्बे वैली के घर गिफ्ट में दिए। बेहिसाब दौलत और बेशुमार ताकत। तब सिर्फ नाम ही काफी था। सुब्रत रॉय। लेकिन एक राजनीतिक भूल ने सुब्रत रॉय के एंपायर को लगभग धूल में मिला दिया। उनके आलोचक भी बहुत हैं जो आज भी इलजाम लगाते हैं। लेकिन वक्त बदला तो जो ताकतवर लोग रॉय के घर झाड़ू पोछा करके भी गौरव की अनुभूति करते थे उन्होंने भी पीठ दिखा दी। सुब्रत रॉय का साथ उन सबने छोड़ दिया जिन पर उन्हें बहुत भरोसा था। वो घिरते गए। जेल गए। साम्राज्य सिकुड़ता गया। कैसे तैसे जेल से निकले। कभी शान ओ शौकत का एंपायर उनके ही सामने खंडहर हो गया। किसी ने उनका साथ नहीं दिया। आज भी सेबी के पास सहारा का 25 हजार करोड़ है। लेकिन सहारा ग्रुप का पतन हो गया। वो जितने बड़े शो मैन थे आज उतनी ही खामोशी से चले गए। सर, इसीलिए कहता हूं समय से न लड़ो। आजतक कोई जीत नहीं पाया। जीत भी नहीं सकता। -ब्रजेश मिश्रा

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1 Comment

1 Comment

  1. Anil Sharma 13702 hamara india credit corporation socirty

    November 18, 2023 at 11:28 am

    अपने कर्मचारियों को परिवार के नाम पर भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करते हैं। उनकी ग्रेच्युटी तथा क्यू शॉप बॉन्ड का पैसा भी नहीं दिया 25 प्रतिशत ब्याज के साथ।

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