शुक्र मनाइए सुधीर चौधरी सरकार के मीडिया सलाहकार नहीं हुए अन्यथा पुरस्कार लौटाने वाले तिहाड़ जेल में होते!

Vineet Kumar :  जिस संपादक/एंकर को सलाखों के पीछे होना चाहिए उसे मालिक ने प्राइम टाइम में देश की डीएनए टेस्ट करने के लिए बिठा दिया है. ऐसे में जाहिर है कि वो पत्रकारिता नहीं, शोले के डायलॉग बोलेगा. शुक्र मनाइए कि ऐसा संपादक अभी तक मीडिया सलाहकार नहीं हुआ है..नहीं तो उलटे पुरस्कार लौटानेवाले लेखक तिहाड़ जेल में होते. उनपर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाता.

जी न्यूज के दागदार संपादक/एंकर सुधीर चौधरी हम जैसे की एफबी वॉल या अपने उपर लिखी स्टेटस पर मिली टिप्पणियों से गुजरते होंगे या कोई उन तक ये संदेश प्रेषित करता होगा तो पढ़कर भाव विह्वल( हायपर इमोशनल ) हो जाते होंगे. उनके समर्थन में जिस तरह से लोग टूट पड़ते हैं, उतना तो उऩके जेल जाने पर उनके मातहत काम करनेवाले मीडियाकर्मी तक खुलकर साथ नहीं आए थे.

किसी खास राजनीतिक दल की टीटीएम करने का क्या लाभ होता है, वो देखकर गदगद होते होंगे कि सैंकड़ों टीटीएमकर्मी बिना किसी पीआर एजेंसी की एफर्ट की फ्री ऑफ कॉस्ट मिल जाते हैं जो मातहत मीडियाकर्मी से कहीं ज्यादा बीच-बचाव कर सकते हैं. बाकी स्टेटस लिखनेवाले हम जैसे को बोनस में गालियां मिलती है, वो अकड़ने की अलग वजह बनती होंगी.

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.


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प्रो. नामवर सिंह की बाडी लैंग्वेज देखते हुए लगा कि ये आदमी अपने पारिवारिक जीवन में भी बहुत डेमोक्रेटिक नहीं है!

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