‘एनडीटीवी 24×7’ की एंकर ने लाइव डिबेट में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को शो से जाने के लिए कह दिया

Vineet Kumar : ये संबित पात्रा का अपमान नहीं, टीवी में भाषा की तमीज बचाने की कोशिश है… कल रात के शो में निधि राजदान (NDTV 24X7) ने बीजेपी प्रवक्ता और न्यूज चैनल पैनल के चर्चित चेहरे में से एक संबित पात्रा से सवाल किया. सवाल का जवाब देने के बजाय संबित ने कहा कि ये एनडीटीवी का एजेंडा है, चैनल एजेंडे पर काम करता है. निधि राजदान को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि उसके बाद आखिर-आखिर तक सिर्फ एक ही बात दोहराती रही- ”प्लीज, आप इस शो से जा सकते हैं. आप प्लीज ये शो छोड़कर चले जाएं. ये क्या बात हुई कि आपसे कोई सवाल करे तो आपको वो एजेंडा लगने लग जाए.”

मोदी जी की सरकार बनने के बाद पूरी पत्रकार बिरादरी दो फाड़ हो चुकी है

Nadim S. Akhter : एबीपी न्यूज वाले पत्रकार अभिसार शर्मा ने शानदार-जानदार लिखा है. सच सामने लाना एक खांटी पत्रकार का अंतिम ध्येय होता है और अभिसार ने वही किया है. सारी मुश्किलों और चुनौतियों के बावजूद (Read between the lines- नौकरी पे खतरे के बावजूद !!) क्या आज हमें ये कहने में कोई हिचक होनी चाहिए कि देश में अघोषित आपातकाल लगा हुआ है. जो दक्षिणपंथ और उसके सारे कुकर्मों-बचकाना हरकतों के साथ है (देश को नुकसान पहुंचाने की कीमत पर भी), वह -राष्ट्रप्रेमी- घोषित किए जा रहे हैं और जो मोदी सरकार को एक्सपोज कर रहे हैं, उनकी गलतियों और खामियों की ओर इशारा कर रहे हैं, उन्हें -राष्ट्रद्रोही- होने का तमगा दिया जा रहा है.

सत्ता के आगे लोट जाता है अमिताभ बच्चन

Vineet Kumar : जो बोरोप्लस के लिए आपकी परंपरा का रंग बदल सकता है, वो कुछ भी कर सकता है… बहुमत की सरकार के दो साल पूरे होने पर अमिताभ बच्चन ने जिस तरह के कसीदे पढ़े, सत्ता के आगे लोटते नजर आए, आप आहत हो सकते हैं क्योंकि अभी भी आप उनके लिए इस्तेमाल किए जानेवाले मेटाफर सदी का महानायक से बाहर नहीं निकल पाए हैं. लेकिन उदारवादी अर्थव्यवस्था के शुरुआती दौर से ही जो आदमी बीपीएल इलेक्ट्रॉनिक्स का विज्ञापन ये कहते हुए कर रहा है कि देश की कंपनी है, इसमे भारतीयता है और दूसरी तरफ आगे चलकर आइसीआइसीआई जैसे बैंक का तो मुझे समझने में रत्तीभर परेशानी नहीं हुई कि एलपीजी प्रोजेक्ट (लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन) के तहत आपको जितना ग्लोबल होना होता है, उतना ही नेशनल और लोकल भी.

जब ‘राष्ट्रवादी’ संपादक सुधीर चौधरी अपने प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बदज़ुबानी कर गए!

Vineet Kumar : दाग़दार संपादक सुधीर चौधरी ने प्रधानमंत्री की गरिमा को पहुँचायी चोट… जिस दाग़दार संपादक सुधीर चौधरी को प्रधानमंत्री के साथ पहली सेल्फी लेने का गौरव प्राप्त हो, वो प्रधानमंत्री किसी भारतीय मीडिया को इंटरव्यू न देकर विदेशी अख़बार को इंटरव्यू दे, ये पीड़ा आप और हम नहीं समझ सकते.

ऐसे मीडिया सलाहकारों और इनकी फर्जी बातों के बहकावे में न आएं

टीवी टुडे नेटवर्क का मीडिया स्कूल टीवीटीएमआइ आपसे दो लाख से ज्यादा रूपये लेगा. इसी तरह देश के दर्जनों अखबार और चैनल के अपने मीडिया स्कूल हैं. आप इनके विज्ञापनों से गुजरेंगे तो लगेगा कि कोर्स खत्म होने के साथ ही एंकर श्वेता सिंह, राहुल कंवर, पुण्य प्रसून वाजपेयी की छुट्टी कर दी जाएगी और प्राइम टाइम पर आप होंगे. शुरु के दो-चार दस दिन आपको ऐसा एहसास भी कराया जाएगा.

कायदे से यही होना चाहिए जो अभी एनडीटीवी इंडिया पर हो रहा है

Vineet Kumar : कायदे से यही होना चाहिए जो अभी एनडीटीवी इंडिया पर हो रहा है. एबीवीपी और आइसा के छात्र नेता के बीच आमने-सामने बातचीत. (आज साकेत बहुगुणा, एबीवीपी और सहला रशीद, आइसा) कुछ नहीं, बाकी के चैनल एक सप्ताह यही काम करें, किसी राजनीतिक दल के प्रवक्ता, बुद्धिजीवी, पत्रकार के बजाय इन छात्र नेताओं को शो में शामिल करें, काफी कुछ बदल जाएगा. हम दर्शकों को काफी कुछ नया देखने को मिलेगा वो तो है ही.

जागरण के आजादी वाले कार्यक्रम में विनीत कुमार क्या जागरणकर्मियों के शोषण की बात रख पाएंगे?

Yashwant Singh : आज मंच जागरण का, परीक्षा विनीत कुमार की… ‘मीडिया मंडी’ किताब के लेखक विनीत कुमार मीडिया विमर्श में उभरते नाम हैं। विनीत बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। मीडिया संस्थानों के दोहरे मानदंडों को बेनकाब करने में विनीत कोई उदारता नहीं बरतते। सामाजिक मुद्दों पर भी विनीत की लेखनी ईमानदार और धारदार रही है। विनीत 4 अप्रैल यानि आज रोहतक में जागरण समूह की ओर से आयोजित किए जा रहे संवाद कार्यक्रम को मॉडरेट करने जा रहे हैं। कार्यक्रम ‘नारी से जुड़े आज़ादी और दायरा’ विषय पर है। इसका आयोजन रोहतक के झज्जर रोड पर स्थिति वैश्य महिला महाविद्यालय पर सुबह 11.30 बजे से है। कार्यक्रम की वक्ता शतरंज चैंपियन और लेखिका अनुराधा बेनिवाल हैं। विनीत ने अपने फेसबुक वॉल पर इस कार्यक्रम की बाकायदा पोस्टर के साथ जानकारी दी है।

हिन्दी चैनलों के संपादक अपने बॉस एंकर सुषमा स्वराज की हिन्दी चिंता पर टीटीएम में लगे हैं!

Vineet Kumar : हिन्दी चैनलों के संपादक ऑब्लिक बॉस एंकर सुषमा स्वराज की हिन्दी चिंता पर जिस कदर टीटीएम में लगे हैं, एक बार पलटकर सुषमा स्वराज पूछ दें कि आपने अपने चैनलों के जरिए किस तरह की हिन्दी को विस्तार दिया तो शर्म से माथा झुक जाएगा. इन संपादकों को इतनी भी तमीज नहीं है कि ये समझ सकें कि वो जो चिंता जाहिर कर रही है, उनमे हम संपादकों के धत्तकर्म भी शामिल हैं. आखिर उन्हें लाइसेंस हिन्दी चैनल चलाने के दिए जाते हैं, हिंग्लिश के तो नहीं ही न..

गौहर रज़ा हैं देशद्रोही कवि! शर्म करो जी न्यूज!!

Vineet Kumar : गौहर रज़ा हैं देशद्रोही कवि! शर्म करो जी न्यूज!! इन दिनों जी न्यूज अफजल प्रेमी गैंग नाम से खबरों की सीरिज चला रहा है. उसने राष्ट्रभक्ति का दायरा इतना संकुचित कर लिया है कि जो सत्ता के साथ नहीं है, जो लंपटता का विरोध करता है, वो इनके हिसाब से देशद्रोही है. प्रतिरोध में अपनी बात कहनेवाले को ये चैनल देशद्रोही का सर्टिफिकेट जारी करने में बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगाता.

स्क्रीन पर स्त्री : जो खल चरित्र होंगी वो प्रगतिशील, पढ़ी-लिखी, कामकाजी, खुद की पहचान के लिए जद्दोजद करती नजर आएंगी

 

दिल्ली। टेलीविजन अपने चरित्रों को पहले लोकप्रिय बनाता है और फिर हमारे वास्तविक जीवन में उसकी दखल होती है। हम जो वास्तविक जिंदगी मे हैं वो व्यक्तित्व टेलीविजन बाहर निकालकर लाता है| उक्त विचार सुपरिचित मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार ने हिन्दू कालेज की वीमेंस डेवलपमेंट सेल के वार्षिक उत्सव समारोह मे ”स्क्रीन पर स्त्री ”विषय  संगोष्ठी में व्यक्त किए।

सीएनएन-आईबीएन ने इसलिए अपने दर्शकों के साथ किया धोखा…

Vineet Kumar  : सीएनएन-आइबीएन का एक्सिस-एपीएम सर्वे एजेंसी से करार था..वो अपने दर्शकों से धमाकेदार प्रोमो के साथ वादा कर रहा था कि सबसे पहले और चौंकानेवाले एक्जिट पोल के नतीजे पेश करेगा लेकिन.. प्रोमो के बाद उसने एक्जिट पोल पर इस कार्यक्रम के प्रसारण का इरादा बदल दिया..ऐसा मेरी याद में शायद पहली बार हुआ होगा कि किसी चैनल ने जिस प्रोमो पर लाखों रूपये खर्च किए हों वो कार्यक्रम ही न दिखाए अब जबकि बिहार के चुनावी नतीजे की तस्वीर साफ हो गई है, इसकी वजह बेहद साफ दिखाई देती है.

लखनऊ के एक अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती ठुमरी गायिका जरीना बेगम को मदद की सख्त जरूरत

Vineet Kumar : लखनऊ के वाशिंदे, संगीत के कद्रदान, आप कुछ तो कीजिए.. ”अम्मा आपको बहुत दुआएं देतीं हैं भैया, बहुत याद करती हैं..फिर जल्दी आना मिलने लखनऊ…” रुबीना दीदी ने फोन पर जब इतना कहा तो अपने आप आखों में आंसू छलक आए..फफककर रो पड़ा. ज़रीना बेगम, ये नास्तिक आपके लिए प्रार्थना भी नहीं कर सकता. वो पहली मुलाकात में बस आपको एकटक देखता रहा..चेहरे की झुर्रियों में आपकी ठुमरी, रियाज़ और बेगम अख़्तर का अक्स पढ़ता रहा. आप कितना कुछ बोलना चाहती थीं हमसे लेकिन बेबस नज़र आयीं..आपके लड़के ने हमें बताया- अम्मा के आगे अभी तबला-हारमोनियम देय दो तो गाने लग जांगी…फिर कहने लगे,अम्मा ठीके थीं,जब पता पड़ा कि बिजली बिल जमा नहीं करने पर ये घर नीलाम हो जागा तो चिंता में घुलने लगीं.

शुक्र मनाइए सुधीर चौधरी सरकार के मीडिया सलाहकार नहीं हुए अन्यथा पुरस्कार लौटाने वाले तिहाड़ जेल में होते!

Vineet Kumar :  जिस संपादक/एंकर को सलाखों के पीछे होना चाहिए उसे मालिक ने प्राइम टाइम में देश की डीएनए टेस्ट करने के लिए बिठा दिया है. ऐसे में जाहिर है कि वो पत्रकारिता नहीं, शोले के डायलॉग बोलेगा. शुक्र मनाइए कि ऐसा संपादक अभी तक मीडिया सलाहकार नहीं हुआ है..नहीं तो उलटे पुरस्कार लौटानेवाले लेखक तिहाड़ जेल में होते. उनपर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाता.

उस लड़की ने इंडिया टुडे टीवी की डिप्टी एडिटर प्रीति चौधरी से पलट कर पूछ लिया- आप जहां से आईं हैं, वो महिलाओं के लिए सुरक्षित है?

Vineet Kumar : इंडिया टुडे टेलीविजन की डिप्टी एडिटर प्रीति चौधरी ने अपनी खास रिपोर्ट हाफ बिहार में सतरह-अठारह साल की एक लड़की से सवाल किया- आपको लगता है कि बिहार लड़कियों के लिए सुरक्षित जगह है? जाहिर है प्रीति चौधरी का सवाल करने का अंदाज ऑथिरिटेरियन था जैसा कि आमतौर पर टीवी के पत्रकार ठसक से पूछते हैं. हालांकि प्रीति चौधरी के इस शो की विजुअल्स और कैमरा वर्क पर गौर करें तो फ्रेम दर फ्रेम रवीश कुमार के शो ये जो हमारा बिहार है से मिलाने की कोशिश है.

हे टीवी मीडिया के महंतों, अब बताओ साहित्य कौन देख रहा है जो प्राइम टाइम में ताने हुए हो

Vineet Kumar : मुझे फिलहाल मीडिया के उन सारे महंतों का चेहरा याद आ रहा है जो उपहास उड़ाते हुए पूछते थे- अब कौन पढ़ता है साहित्य, कौन देखेगा साहित्य की खबर? अभी कौन देख रहा है जनाब जो प्राइम टाइम में ताने हुए हो..सीधे पैनल डिस्कशन पर उतरने से पहले दो मिनट की पैकेज तो लगा दो..पता तो चले काशीनाथ सिंह कौन हैं, मुन्नवर राणा कौन है, उदय प्रकाश किस पेशे से आते हैं?

ये बात बर्दाश्त नहीं की जा सकती कि हम मेहनत से, बिना किसी से प्रभावित हुए काम करें और आप हमें दलाल बताएं : रवीश कुमार

Vineet Kumar : मैं तो प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को सुझाव देना चाहता हूं कि आप ये बिल्कुल स्पष्ट कर दो कि कौन बीजेपी का पत्रकार है, उसके लिए काम कर रहा है, कौन कांग्रेस के लिए या किसी दूसरी पार्टी के लिए. सारा झंझट ही खत्म हो जाएगा. कम से कम लोगों के सामने चीजें स्पष्ट तो होंगी… लेकिन ये बात बर्दाश्त नहीं की जा सकती कि हम मेहनत से, बिना किसी से प्रभावित हुए काम करें और आप हमें दलाल बताएं.

परम आदरणीय जनरल वीके सिंहजी, आप आचमनकर्ता हिन्दी प्रेमियों को आखिर बुलाते ही क्यों हैं?

Vineet Kumar : नवरात्र के दौरान विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित करवाने के संदर्भ में;

परम आदरणीय जनरल वी.के.सिंहजी
जय हिन्दी
जय भारत

कलबुर्गी के हत्यारे से कम नहीं दैनिक भास्कर का जुर्म

Vineet Kumar :  वैसे तो न्यूज वेबसाइट के नाम पर पार्शियल पोर्न वेबसाइट चला रहे भास्कर समूह के लिए हिट्स के खेल में नीचता की हद तक उतर आना आम बात है. इसे हम रूटीन के तौर पर देखते आए हैं. फैशन शो के दौरान मॉडल के कपड़े खिसक जाते हैं तो वो उस हिस्से को ब्लर करने के बजाय लाल रंग का दिल बनाना ज्यादा बेहतर समझता है. लेकिन अब इस हद तक उतर आएगा कि ये अश्लीलता शब्दों को बेधकर घुस आएगी और वो भी उस संदर्भ में जहां असहमति में खड़े होना आसान नहीं है.

कृष्णदत्त पालीवाल का जाना…

Vineet Kumar : नहीं रहे हमारे कृष्णदत्त पालीवाल सर… एमए का आखिरी पेपर उन बच्चों के लिए प्रोजेक्ट हुआ करता था जो ऑप्शन में मीडिया लिया करते थे..और इस प्रोजेक्ट के लिए विभाग से एक गाइड तय किए जाते थे. जब हमने एमए हिन्दी साहित्य में दाखिला लिया तो के डी सर की धूम थी. वो जापान से लौटे ही थे और सीनियर्स को देखता था कि हर दूसरे उन्हीं के साथ पीएचडी करना चाहते थे. एमए की क्लास में गोविंद दर्शन जैसी भीड़ होती. सच पूछिए तो केडी सर और नित्यानंद तिवारी सर के लिए ही हम बच्चे आर्ट्स फैकल्टी जाते..वैसे मैं बैल की तरह पूरी क्लास में मौजूद होता. खैर. एमए की इस प्रोजेक्ट के लिए वो स्वाभाविक रुप से मिल गए. लिस्ट में नाम आने के बाद मैं वहां गया. अपना विषय बताया और कहां सर बताइए- कैसे लिखना है.

रायपुर से लेकर लखनऊ वाया बनारस तक कौन-कौन ‘फासीवाद’ का आपसदार बन गया है, अब आप आसानी से गिन सकते हैं

Abhishek Srivastava : मुझे इस बात की खुशी है कि रायपुर साहित्‍य महोत्‍सव के विरोध से शुरू हुई फेसबुकिया बहस, बनारस के ‘संस्‍कृति’ नामक आयोजन के विरोध से होते हुए आज Vineet Kumar के सौजन्‍य से Samvadi- A Festival of Expressions in Lucknow तक पहुंच गई, जो दैनिक जागरण का आयोजन था। आज ‘जनसत्‍ता’ में ‘खूब परदा है’ शीर्षक से विनीत ने Virendra Yadav के 21 दिसंबर को यहीं छपे लेख को काउंटर किया है जो सवाल के जवाब में दरअसल खुद एक सवाल है। विनीत दैनिक जागरण के बारे में ठीक कहते हैं, ”… यह दरअसल उसी फासीवादी सरकार का मुखपत्र है जिससे हमारा विरोध रहा है और जिसके कार्यक्रम में वीरेंद्र यादव जैसे पवित्र पूंजी से संचालित मंच की तलाश में निकले लोगों ने शिरकत की।”

दूसरों को नैतिकता सिखाने वाला विनीत कुमार लिफाफा और एयर टिकट पाकर ‘हत्यारी’ रमन सिंह सरकार के पीआर कंपेन का हिस्सा बन गया

Yashwant Singh : दलालों रंडियों से क्या बहस करना. जो एयर टिकट और लिफाफा देखकर कहीं भी मुंह मारने पहुंच जाते हैं. वैसे तो ये रोना रोते हैं कि वो देखो सहारा जैसा चोर स्पांसर कर रहा है स्पोर्ट्स टीम को… और फलाने जगह कितना बड़ा अनैतिक काम हो गया…लेकिन पच्चीस हजार रुपये के पैकेट और एयर टिकट ने इनकी आंखों कानों को रमन सिंह सरकार और उनके संरक्षित प्रशासन द्वारा चूहा मार दवा खिलाकर मारी गईं सैकड़ों महिलाओं की चीखों को सुनने से मना कर दिया..

मोदी सरकार पर अपने पहले ऑपरेशन से आजतक ने किया खुलासा- सारी तरक्की सिर्फ कागजों पर

Vineet Kumar : कल मध्यप्रदेश सरकार ने देश के प्रमुख राष्ट्रीय अखबार में करोड़ों रुपये के विज्ञापन देकर घोषित किया कि जन-धन योजना के तहत मध्यप्रदेश के सारे लोगों के खाते खुल गये..एक भी नहीं बचा है. विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बड़ी-बड़ी तस्वीरें छपी है. ऐसे विज्ञापन छपवाने के लिये एक की कीमत 8 से 80 लाख तक होती है..यानी करोड़ों रुपये के विज्ञापन..

दैनिक भास्कर ने कुछ संस्करणों में ‘जेड प्लस’ फिल्म के लेखक रामकुमार सिंह का नाम रिव्यू से हटाया

Ajay Brahmatmaj : जयप्रकाश चौकसे के कॉलम ‘पर्दे के पीछे’ से दैनिक भास्‍कर के जयपुर समेत कुछ संस्‍करणों में फिल्म के लेखक Ramkumar Singh का नाम हटा दिया गया। पत्रकार बिरादरी की तुच्‍छता है यह। यह शर्मनाक और दुखद है। फिलहाल जयप्रकास चौकसे को पढ़ें और कल फिल्‍म देखने का फैसला करें। शेयर करें और दूसरों को पढ़ाएं।

मुंबई के वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज के फेसबुक वॉल से.

‘ओपन’ मैग्जीन का ये अंक खरीदकर रख लीजिए

Vineet Kumar : ओपन मैगजीन का नेहरू पर ये अंक कई मायने में खास है. एक तो इसलिए भी कि नेहरू पर एक साथ जितनी सामग्री आपको चालीस रूपये में मिल जाएगी, उतनी किसी किताब में कम से कम तीन से चार सौ रूपये में मिलेंगे.

जो चैनल सबसे ज्यादा लोटता है, उसी के पत्रकार की मौत…

Vineet Kumar :  ये कम बड़ी बिडंबना है कि जी न्यूज देश का ऐसा चैनल है जो भाजपा, केन्द्र सहित भाजपा शासित राज्यों के आगे लोटता आया है, उसी चैनल का पत्रकार शिवम भट्ट हरियाणा में पत्रकारों पर हुए हमले और अफरातफरी के बीच मारे गए..

और मीडियाकर्मियों ने अपने हिस्से की स्क्रीन पर कब्जा जमा लिया….

Vineet Kumar : p7 न्यूज चैनल बंद हो गया. ये वही न्यूज चैनल है जिसने लांचिंग में अपने एंकरों से रैम्प पर नुमाईश करवायी, शोपीस एंकरिंग को बढ़ावा दिया. पिछले दिनों इसी ग्रुप की पत्रिका बिंदिया और शुक्रवार के बंद हो जाने पर बेहद जरूर सरोकारी मंच के खत्म होने का स्यापा आपने देखा था. पत्रिका सहित ये चैनल क्यों बंद हो गया, ये बार-बार बताने की जरूरत इसलिए पड़ती है कि एक वेंचर बंद होने के वाबजूद दूसरे के बने रहने के दावे मैनेजमेंट की तरफ से ताल ठोंककर दिए जाते हैं..लेकिन सच आपसे और हमसे छिपा नहीं है.

मैनेज आपके मालिक होते हैं और आपको सैलरी उनके हिसाब से मैनेज होने के लिए मिलती है, जर्नलिज्म करने के लिए नहीं

Vineet Kumar : तमाम न्यूज चैनल और मीडिया संस्थान प्रधानसेवक के आगे बिछे हैं..उन्हें देश का प्रधानमंत्री कम, अवतारी पुरुष बताने में ज्यादा रमे हुए हैं लेकिन उनकी ही पार्टी की सरकार की शह पर मीडियाकर्मियों की जमकर पिटाई की जाती है. पुलिस उन पर डंडे बरसाती है..हमने तो जनतंत्र की उम्मीद कभी की ही नहीं लेकिन आपने जो चारण करके जनतंत्र के स्पेस को खत्म किया है, अब आपके लिए भी ऑक्सीजन नहीं बची है..

पोर्न वेबसाइट बंद करना है तो दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स जैसी तथाकथित समाचार वेबसाइट को भी इसके दायरे में लाएं

Vineet Kumar : अगर सरकार सचमुच पोर्न वेबसाइट बंद करना चाहती है तो दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स जैसी तथाकथित समाचार वेबसाइट को भी इसके दायरे में लाए. लगभग सारे मीडिया संस्थानों की दूकानदारी इसी के बूते चलती है..त्वचा से जुड़ी समस्या से लेकर सौन्दर्य तक की अंडरटोन वही होती है जिससे सरकार के अनुसार हमारे संस्कार खत्म हो रहे हैं..पोर्न वेबसाइट को रेखांकित करने के साथ-साथ ऐसी वेबसाइट के भीतर की पोर्नोग्राफी एफेक्ट कंटेंट को बहस के दायरे में शामिल करना बेहद जरूरी है.

अपनी जाति बताने के लिये शुक्रिया राजदीप सरदेसाई

Vineet Kumar : राजदीप की इस ट्वीट से पहले मुझे इनकी जाति पता नहीं थी..इनकी ही तरह उन दर्जनों प्रोग्रेसिव मीडियाकर्मी, लेखक और अकादमिक जगत के सूरमाओं की जाति को लेकर कोई आईडिया नहीं है..इनमे से कुछ वक्त-वेवक्त मुझसे जाति पूछकर अपनी जाति का परिचय दे जाते हैं..और तब हम उनकी जाति भी जान लेते हैं.

मौलाना आजाद की जयंती पर मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा पुरानी स्टोरी गरम करके परोसने के मायने

Vineet Kumar : आज यानी 11 नवम्बर को मौलादा अबुल कलाम आजाद की जयंती है. इस मौके पर मेनस्ट्रीम मीडिया ने तो कोई स्टोरी की और न ही इसे खास महत्व दिया. इसके ठीक उलट अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उनके ना से जो लाइब्रेरी है, उससे जुड़ी दो साल पुरानी बासी स्टोरी गरम करके हम दर्शकों के आगे न्यूज चैनलों ने परोस दिया. विश्वविद्यालय के दो साल पहले के एक समारोह में दिए गए बयान को शामिल करते हुए ये बताया गया कि इस लाइब्रेरी में लड़कियों की सदस्यता दिए जाने की मनाही है. हालांकि वीसी साहब ने जिस अंदाज में इसके पीछे वाहियात तर्क दिए हैं, उसे सुनकर कोई भी अपना सिर पीट लेगा. लेकिन क्या ठीक मौलाना आजाद की जयंती के मौके पर इस स्टोरी को गरम करके परोसना मेनस्ट्रीम मीडिया की रोचमर्रा की रिपोर्टिंग और कार्यक्रम का हिस्सा है या फिर अच्छे दिनवाली सरकार की उस रणनीति की ही एक्सटेंशन है जिसमे बरक्स की राजनीति अपने चरम पर है. देश को एक ऐसा प्रधानसेवक मिल गया है जो कपड़ों का नहीं, इतिहास का दर्जी है. उसकी कलाकारी उस दर्जी के रूप में है कि वो भले ही पाजामी तक सिलने न जानता हो लेकिन दुनियाभर के ब्रांड की ट्राउजर की आल्टरेशन कर सकता है. वो एक को दूसरे के बरक्स खड़ी करके उसे अपनी सुविधानुसार छोटा कर सकता है. मेनस्ट्रीम मीडिया की ट्रेंनिंग कहीं इस कलाकारी से प्रेरित तो नहीं है?

पैर गंवा चुकी स्नेहिल की चैनल से बातचीत चल रही है

Vineet Kumar : स्नेहिल से मेरी बात हुई. उन्हें इस वक्त हमारी जरूरत नहीं है..लिखने से लेकर बाकी चीजों की भी. वो अब इस संबंध में कोई बात नहीं करना चाहती. उनका कहना है कि चैनल से इस संबंध में बातचीत चल रही है. हमारी प्राथमिकता स्नेहिल की जिंदगी और उसके प्रति उत्साह बनाए रखना पहले है जो कि सचमुच एक चुनौती भरा काम है..लिहाजा, हम इस मामले को तूल देकर उनके हिसाब से शायद नुकसान ही करेंगे. रही बात चैनल की तो हम किसी की आइडी, ज्वाइनिंग लेटर की कॉपी जबरदस्ती साझा करने नहीं कह सकते.

केजरीवाल की खांसी और मोदी की चायवाले की पोलिटिकल मार्केटिंग के मायने

Vineet Kumar : मैं मान लेता हूं कि अरविंद केजरीवाल ने अपनी खांसी की पॉलिटिकल मार्केटिंग की..शुरुआत में जो खांसी हुई और उसके प्रति लोगों की जो संवेदना पैदा हुई, उसे उन्होंने सिग्नेचर ट्यून में बदल दिया..ये अलग बात है कि बनावटी खांसी के लिए भी कम एफर्ट नहीं लगाने पड़ते..लेकिन एक दूसरा शख्स अपने को चाय बेचनेवाला बताता है, बचपन के संघर्ष के किस्से सुनाता है जो कि उसकी असल जिंदगी से सालों पहले गायब हो गए तो आप हायपर इमोशनल होकर देश की बागडोर उनके हाथों सौंप देते हैं.

मीडिया में सरोकार, जज्बे और जज्बात के जितने शब्द-एक्सप्रेशन हैं, सबके सब सिर्फ प्रोमो-विज्ञापन के काम लाए जाते हैं

Vineet Kumar : जिया न्यूज की मीडियाकर्मी स्नेहल वाघेला के बारे में जानते हैं आप? 27 साल की स्नेहल अपने चैनल जिया न्यूज जिसकी पंचलाइन है- जर्नलिज्म इन एक्शन, के लिए अपने दोनों पैर गंवा चुकी है. पिछले दिनों जिया चैनल के लिए मेहसाना (अहमदाबाद) रेलवे स्टेशन पर रिपोर्टिंग करते हुए स्नेहल फिसलकर पटरियों पर …

19 साल पूरे होने पर आउटलुक ने शानदार विशेषांक निकाला

Vineet Kumar : रॉबिन जेफ्री की किताब मोबाईल नेशन के बाद सबसे बेहतरीन कंटेंट… आपने अभी तक आउटलुक का ये अंक नहीं खरीदा है तो खरीदकर रख लीजिए. आउटलुक पत्रिका की जिस साल शुरुआत हुई थी, उसी साल हिन्दुस्तान में मोबाईल आया था. पत्रिका ने ये बेहतरीन काम किया कि अपने 19 साल को लेकर ढोल-मंजीरा बजाने के बजाय 19 साल में बनती-बदलती हिन्दुस्तान की दुनिया पर अलग-अलग एंगिल से बेहतरीन लेख, इंटरव्यू और फीचर प्रकाशित किए हैं..इस पत्रिका को अगर किताबी शक्ल दे दी जाए तो हर लाइब्रेरी के लिए एक जरूरी किताब होगी.

रेल में खेल (2) : बैकडोर से पैसे लेकर पैन्ट्रीकार तक में ठूंसने का जो काम हो रहा है वो किस अच्छे दिन का नमूना है?

Vineet Kumar : स्लीपर की टॉयलेट में 12-14 लोग घुसे हैं… पैंट्री कार में 1500-2000 रुपए लेकर घुसाया जा रहा है…. आप कह सकते हैं कि इतनी भीड़ में क्या व्यवस्था होगी भला? लेकिन जिनकी टिकट बहुत पहले से कन्फर्म है, वो अन्दर तक नहीं जा सके और ट्रेन गुजर गयी? ये सिर्फ भीड़ है फिर इसमें भ्रष्टाचार के भी अंश घुले हैं? मोदी सरकार क्या, इससे पहले की भी सरकार नागरिक सुविधाओं में तेजी से कटौती करती आयी है. लेकिन ये मौजूदा सरकार जो नागरिक को ग्राहक मानती है, उनके बीच प्रशासन नहीं मार्केटिंग के जाल बिछाना चाहती है लेकिन ग्राहकों को चूसने के मामले में धंधेबाजों और कार्पोरेट से भी दो कदम आगे निकल जाए तो उसे आप क्या कहेंगे?

जिस रजत शर्मा ने कभी एनबीए को गैरजरूरी और टीवी टुडे नेटवर्क की जागीर बताया था, वही अब इसके प्रेसिडेंट हैं

Vineet Kumar : जिस रजत शर्मा के इंडिया टीवी ने साल 2008 में मुंबई आतंकवादी हमले की कवरेज के दौरान दुनिया की मशहूर आतंकवादी मामलों की विशेषज्ञ फरहाना अली को आतंकवादी बना दिया था और जिसके कारण एनबीए ने चैनल पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया..रजत शर्मा ने ऐसा किए जाने पर एनबीए को गैरजरूरी, अविश्वसनीय और टीवी टुडे की जागीर बताया, अब वही रजत शर्मा इस एनबीए के प्रेसिडेंट है..वो इस हैसियत से टेलीविजन कंटेंट को बेहतर करने के लिए प्रेस रिलीज जारी करेंगे..देश के न्यूज चैनलों को नसीहतें देंगे कि क्या प्रसारित करना राष्ट्रहित में है, क्या नहीं..

राजदीप सरदेसाई के धतकरम के बहाने अपने दाग और जी न्यूज के पाप धोने में जुटे सुधीर चौधरी

सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को… जी न्यूज पर पत्रकारिता की रक्षा के बहाने हाथापाई प्रकरण को मुद्दा बनाकर राजदीप सरदेसाई को घंटे भर तक पाठ पढ़ाते सुधीर चौधरी को देख यही मुंह से निकल गया.. सोचा, फेसबुक पर लिखूंगा. लेकिन जब फेसबुक पर आया तो देखा धरती वीरों से खाली नहीं है. युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार ने सुधीर चौधरी की असलियत बताते हुए दे दनादन पोस्टें लिख मारी हैं. विनीत की सारी पोस्ट्स इकट्ठी कर भड़ास पर प्रकाशित कर दिया. ये लिंक http://goo.gl/7i2JRy देखें. ट्विटर पर पहुंचा तो देखा राजदीप ने सुधीर चौधरी पर सिर्फ दो लाइनें लिख कर तगड़ा पलटवार किया हुआ है. राजदीप ने रिश्वत मांगने पर जेल की हवा खाने वाला संपादक और सुपारी पत्रकार जैसे तमगों से सुधीर चौधरी को नवाजा था..

जी न्यूज के दागदार संपादक और दलाली में जेल जा चुके सुधीर चौधरी पत्रकारिता की नसीहत दे रहे हैं राजदीप सरदेसाई को!

Vineet Kumar : जी न्यूज के दागदार संपादक और दलाली मामले में जेल जा चुके सुधीर चौधरी आज राज राजदीप सरदेसाई को पत्रकारिता कैसे की जाए, नसीहत दे रहे हैं. चैनल शाम से एकतरफा स्टोरी चला रहे हैं. ‪#‎shameaAbroad‬ को ट्रेंड बनाने की कोशिश में लोगों से प्रतिक्रिया मांग रहा है…. आलोक मेहता जैसे बुरी …

जी न्यूज यानि सरकार का भोंपू!

Vineet Kumar : जिस देश में जी न्यूज़ जैसा चैनल हो, उसे सरकार की भोंपू बजाने के लिये दूरदर्शन जैसे पब्लिक ब्रॉडकास्ट चैनल की अलग से कोई ज़रूरत नहीं है..बेवजह करदाताओं के करोड़ों रुपये स्वाहा हो रहे हैं..आप चाहें तो जी न्यूज़ को प्राइवेट दूरदर्शन कह सकते हैं..

द हिंदू को हीरो और टीओआई को गटर में फेंकने का अतिउत्साह : तनु शर्मा और सायमा सहर के मामलों में कहां थे?

Vineet Kumar : TOI और द हिन्दू के बीच विज्ञापन के जरिए एक-दूसरे का मजाक उड़ाने से लेकर नीचा दिखाने की कवायदें बहुत पुरानी रही है. इन विज्ञापनों के दर्जनों वीडियो यूट्यूब पर मौजूद हैं. ऐसे में ये बहुत संभव है कि द हिन्दू अपना अगला विज्ञापन दीपिका पादुकोण के बहाने कुछ इस तरह से बनाए कि जिसमे लगे कि TOI स्त्री को कॉर्पोरेट प्रोडक्ट से ज्यादा कुछ नहीं समझता जबकि द हिन्दू सीमोन और वर्जिनिया की तलाश में भटकता फिरता है. पिछले दिनों सुहासिनी हैदर( स्ट्रैटजिक एंड डिप्लोमेटिक एफेयर एडिटर, द हिन्दू) को सुनने का मौका मिला. वो मीडिया संस्थानों में महिला पत्रकारों की स्थिति पर बात कर रही थीं.

जर्नलिस्ट ऑफ द इयर श्रीनिवासन जैन टीवी पर सिर्फ बोलते नहीं, स्क्रीन एडिटोरियल लिखते हैं

Vineet Kumar : श्रीनिवासन जैन (मैनेजिंग एडिटर, एनडीटीवी 24×7) को साल 2012 के लिए जर्नलिस्ट ऑफ द इयर का अवार्ड दिया गया. मुझे नहीं पता कि बतौर मैनेजिंग एडिटर वो चैनल के भीतर किस रूप में जाने जाते हैं और न ही उनसे मेरी कोई मुलाकात है. लेकिन एक दर्शक की हैसियत से पिछले दस सालों मैं जिस श्रीनिवासन जैन को जानता हूं, वो न तो मधु त्रेहन के साथ बड़े ही इत्मीनान से बैठे मीडियाकर्मी हैं और न ही ग्लैमरस लुक में लोकसभा स्पीकर से रामनाथ गोयनका सम्मान लेते मैनेजिंग एडिटर.