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सीएसई की मुखिया सुनीता नारायण ने केएफसी और रिपब्लिक चिकन जैसे बड़े मुर्गेबाज प्लेयरों को क्यों छोड़ दिया?

Sumant Bhattacharya : सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट ने खोज की है कि दिल्ली और एनसीआर के मुर्गों में 40 से 60 फीसदी एंटी बायोटिक्स दवाएं हैं, जब आप इस चिकन का कोरमा खाते हैं तो चिकन में समाई दवाएं आपके जिस्म में जाकर एंटी बायोटिक्स के लिए प्रतिरोध पैदा कर देती है। यानि आप बीमार पड़े और कोई एंटी बायोटिक ली तो काम ना करेगी।

Sumant Bhattacharya : सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट ने खोज की है कि दिल्ली और एनसीआर के मुर्गों में 40 से 60 फीसदी एंटी बायोटिक्स दवाएं हैं, जब आप इस चिकन का कोरमा खाते हैं तो चिकन में समाई दवाएं आपके जिस्म में जाकर एंटी बायोटिक्स के लिए प्रतिरोध पैदा कर देती है। यानि आप बीमार पड़े और कोई एंटी बायोटिक ली तो काम ना करेगी।

कुल मिलाकर कहें तो एड्स की तरह, जो आपके जिस्म में प्रतिरोधक ताकत को खत्म कर देता है। बहरहाल मेरा मुद्दा यह नहीं है, मैं जानना चाहता हूं सीएसई की मुखिया सुनीता नारायण से, आखिर क्यों केएफसी और रिपब्लिक चिकन की दरयाफ्त नहीं की। यह स्टडी कहीं छोटों को मारकर बाजार में हलब्बियों को जिंदा रखने की कोशिश तो नहीं है सुनीता जी….??

वरिष्ठ पत्रकार सुमंत भट्टाचार्या के फेसबुक वॉल से.

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1 Comment

1 Comment

  1. Jaspal S Bisht

    August 1, 2014 at 2:28 pm

    Isliye kee, Gandhi ji bahut takatwar insaan the aur aaj bhee maujud hai….

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