द हिंदू अखबार का खुलासा, मोदी का बड़बोलापन और शांत मनमोहन का हासिल…

Sheetal P Singh : Surgical strike पर चली बहस ने सेना के स्वर्णिम इतिहास के तमाम अब तक ज़मींदोज़ रहे घटनाक्रम सतह पर ला दिये । नित नई नई सूचनायें / कथायें प्रकाश में आ रही हैं । द हिन्दू ने ऐसी ही २०११ की एक शौर्यगाथा छापी है । प्रशान्त टंडन की पोस्ट पढ़ें…

Prashant Tandon : मोदी का बड़बोलापन और शांत मनमोहन का हासिल : आज के ‘द हिंदू’ ने 2011 में पाकिस्तान की सीमा के भीतर भारतीय सेना की कार्यवाही ‘ऑपरेशन जिंजर’ का ब्योरा छापा है. सुबूत और उस सर्जिकल सट्राइक में शामिल अधिकारियों से बातचीत के अंश के साथ. अंतर्रराष्ट्रीय स्तर पर शांत रह कर ज्यादा हासिल किया जा सकता न कि बिना वजह का शोर मचा कर और सेना के किये पर सेहरा अपने सर बांध कर जैसा 29 सितंबर को हुई सर्जिकल स्ट्राइक पर मोदी और उनके सहयोगी कर रहे है. यूपीए की दाद देनी होगी कि दस सर लाने के उकसावे के बावजूद वो दबाव में नहीं आये और राज़ को राज़ ही रहने दिया.

ऑपरेशन जिंजर बुलेट प्वाइंट्स में :

# ये पाकिस्तान के भारत की सीमा के अंदर 2011 की गर्मियों में की गई कार्यवाही का जवाब था जिसमे पाकिस्तानी भारत के दो सैनिको को मार कर उनके सर वापिस ले गये थे.

# पाकिस्तानी सीमा के अंदर चले इस ऑपरेशन में भारतीय सैनिक तीन पाकिस्तानी सैनिको के सर और उनके हथियार ले कर लौटे थे.

# दो महीने की तैयारी और 25 पैरा कमांडो की टुकड़ी के साथ 30 सितंबर को ये कारवाही की गई थी.

# रात दस बजे के बाद ये कमांडो दस्ता पाकिस्तान सीमा के भीतर घुसा और करीब 48 घंटे तक वहॉ रहकर ऑपरेशन को अंजाम दिया.

# लगभग सुबह 4 बजे एक पकिस्तानी चौकी के करीब पहुंच कर उसके चारो तरह बारुदी सुरंग का जाल बिछाया और हमले की पोज़िशन ली.

# सुबह करीब 7 बजे उन्हे कुछ पाकिस्तानी सैनिक चौकी की तरफ बढ़्ते दिखाई दिये.

# जैसे ही पाकिस्तानी सैनिक चौकी के पास पहुंचे कमांडो दस्ते ने बारुदी सुरंग उड़ा दी और धमाके के फौरन बाद ग्रेनेड और बंदूको के हमला बोल दिया.

पूरा ब्योरा नीचे दिये लिंक को खोल कर पढ़ ले.

http://www.thehindu.com/news/national/operation-ginger-titfortat-across-the-line-of-control/article9202758.ece

नोट: मैं इस तरह की सैनिक कार्यवाही का पक्षधर नही हूँ चाहे वो किसी भी देश के द्वारा की जाये. मसला बातचीत से ही हल होना चाहिये. इस पोस्ट का मकासद सिर्फ ये बताना है कि ये प्रचार झूठा है कि अब से पहले भारतीय सेनाओं ने ऐसी कारवाही नही की थी या फिर सेना को अपनी ताकत का अंदाज़ अब से पहले नही था जैसा मनोहर परिकर कह रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह और प्रशांत टंडन की एफबी वॉल से.

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