क्या वाकई ट्रम्प ने मोदी को धमकाया था? जानिए दूसरा पक्ष और देखें वीडियो

अमेरिका ने भारत को ‘करारा जवाब दिया’, अमेरिका ने दी भारत को धमकी, ट्रंप की धमकी के बाद भारत ने हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन के निर्यात की मंजूरी दी… आज आपको इस तरह की खबरें और ऐसी खबरों पर लंबे-लंबे पोस्ट के साथ कुपित होते क्रांतिकारी प्रचूर मात्रा में दिख सकते हैं। आप भी क्रांतिकारी बन जायें, उससे पहले जान लें कि यह वास्तव में ‘फेक न्यूज’ है।

चाइनावायरस अभी सबसे भयानक कहर अमेरिका में ढा रहा है। इसे लेकर राष्ट्रपति ट्रंप हर रोज मीडियो को अपडेट करते हैं। ऐसी ही एक नियमित ब्रीफिंग सोमवार को हुई। उसी में एक पत्रकार ने सवाल किया, ‘‘आपने चिकित्सा से जुड़े सामानों के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला लिया है। क्या आपको नहीं लगता कि इस फैसले के विरोध में अन्य देश कदम उठाएंगे, जैसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका या किसी अन्य देश को हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन का निर्यात नहीं करने का निर्णय लिया है?’’

ट्रंप का उत्तर है, ‘‘यदि उन्होंने (मोदी ने) ऐसा निर्णय लिया है तो मुझे यह पसंद नहीं। मैंने ऐसा नहीं सुना, यह उनका निर्णय है। मैं जानता हूं कि उन्होंने अन्य देशों के लिये निर्यात (हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन का) रोक दिया है। मैंने कल उनसे बात की, हमारी काफी अच्छी बात हुई। हम देखेंगे कि वह क्या करते हैं। मुझे हैरानी होगी यदि वह अमेरिका को भी निर्यात रोक देते हैं, क्योंकि आपको मालूम है कि भारत और अमेरिका के कई साल के अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कई साल से व्यापार में अमेरिका से फायदा उठाया है, इस कारण भी मुझे हैरानी होगी। उन्हें मुझे इसके बारे में बताना चाहिये था, मैंने रविवार की सुबह उनसे बात की, मैंने उन्हें फोन किया था। मैंने कहा कि यदि वे अमेरिका को (हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन) भेजते हैं तो यह सराहनीय होगा। यदि वे इसकी अनुमति नहीं देते हैं…तब भी ठीक है, निश्चित तौर पर विरोध में कदम उठाये जाये जा सकते हैं, क्यों नहीं उठाये जायेंगे।’’

यह प्रश्नोत्तर अंग्रेजी में इस तरह है…

‘‘Reporter: Are you worried about retaliation to your decision to ban export of medical Goods like Indian Prime Minister Modi’s decision to not export hydroxychloroquine to the United states or other countries?

Trump: I don’t like that decision if that’s. I didn’t hear that, that was his decision. I know that he stopped it for other countries. I spoke to him yesterday but a very good talk and we will see whether or not that says. I would be surprised if he would, you know because India does very well with the United States. For many years they have been taking advantage of the United States on trade, so i would be suprised of that worse decision. He’d have to tell me that, I spoke to him Sunday morning, called him and I said would appreciate your allowing our supply to come out. If he doesn’t alllow it to come out that would be okay, but of course there may be retaliation why wouldn’t.”

आप यह पूरा ब्रीफिंग इस वीडियो में सुन सकते हैं-

ठीक 33.00 से सुनना शुरू करिये। फेक न्यूज फैलाने वालों ने रिपोर्टर का पूरा हिस्सा ही गायब कर दिया। ट्रंप के उत्तर में से कुछ सेकेंड का हिस्सा काटकर खबर की तरह परोस दिया गया। कुछ सेकेंड के उस हिस्से को सुनने पर यही लगेगा कि ट्रंप भारत के निर्णय पर रिटैलियेट करने की बात कर रहे हैं। जब पूरा प्रश्नोत्तर सुनेंगे तो मालूम पड़ेगा कि वह रिपोर्टर की रिटैलियेशन वाली बात पर कह रहे हैं कि बिलकुल ऐसा (रिटैलियेशन) हो सकता है।

यह फेक न्यूज कुछ चुनिंदा लोगों ने एजेंडाधारी पत्रकारिता के कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए प्रोपगेट किया। इसके जाल में फंस गये ‘बेचारे’ टाइप के मंदबुद्धि हिंदी पत्रकार। हिंदी पत्रकारिता वैसे भी अंग्रजी पत्रकारिता के जूठन के सहारे ‘हो जाया’ करती है। हिंदी के बेचारों के दिमाग में ‘राजनीति फिल्म में मनोज वाजपेयी के बोले डॉयलॉग’ से लेकर रामधारी सिंह दिनकर जी की कविताओं का ‘नसें उबालता वीररस’ दौड़ पड़ा। उन्होंने क्षण में ‘रिटैलियेशन’ का ‘करारा जवाब’, ‘धमकी’, ‘चेतावनी’ और नहीं मालूम क्या-क्या कबाड़ कर दिया।

इस पूरे प्रकरण का निचोड़: पहले जो काम राजनीतिक पार्टियों के आईटीसेल करते थे, अब वही काम मीडिया घराने करने लगे हैं। अब कई सारे कथित निष्पक्ष पत्रकार और ‘बोलना ही है’ ब्रांडधारी लोग या तो पार्टटाइम में राजनीतिक पार्टियों के आईटीसेल के लिये काम करने लगे हैं, या फिर पार्टियां ये काम उन्हें आउटसोर्स कर दे रही है। सच क्या है, वही लोग जानें। आप बस इतना करिये कि मेरी किसी भी बात पर भरोसा किये बिना मूल स्रोत को सुन लीजिये। स्रोत मैंने पोस्ट में दे ही दिया है। खुद से अच्छे से सारा प्रकरण समझ लीजिये। इसके बाद एक जरूरी काम यह करिये कि निष्पक्षता की पैरोकारी का दावा करते रहने वाले उन चेहरों को अच्छे से पहचान लीजिये, जो शब्दों की चाशनी में लपेटकर आपके दिमाग को ‘फेक न्यूज’ का जहर खिला रहे हैं.

सुभाष सिंह सुमन के उपरोक्त विश्लेषण पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह की टिप्पणी पढ़ें-

कुछ ढीठ भक्त ऐसे हैं कि ट्रंप अगर पिछवाड़े में लात भी मार दे तो उसे आशीर्वाद सिद्ध करने में जुट जाएंगे अभी तो सिर्फ घुड़की दी है !

फेसबुक और ट्विटर पर ऐसी रचनाएं अवतरित हो चुकी हैं जिनमें कल उसके द्वारा हड़काए जाने का संदर्भ सहित अर्थ बदल कर बताया जा रहा है और हमारे महाबली की पूंछ के तुरंत पिछवाड़े में समा जाने को मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है।

तथ्य जान लें, हमारी सिर्फ दो कंपनियों के पास हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का एपीओ है । कल खुदा न खास्ता हमारे यहां ही रोगी बढ़ गये तो हम किसको धमकाएंगे ? बरसात में मलेरिया के लिए हमें स्टाक खुद ही के लिए चाहिए होता है । अमेरिका में तो मलेरिया होता नहीं । आखिर इनका निर्यात रोकने की कोई वजह थी कि एवेंइ रोक दिया था ? डांट खाते ही रातों रात वो वजह खत्म कैसे हो गयी ?

पर सवाल पूछना तो पहले ही देशद्रोह घोषित करवा चुके हैं मुंहबली ! मुंहनोचवा आते ही होंगे !

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One comment on “क्या वाकई ट्रम्प ने मोदी को धमकाया था? जानिए दूसरा पक्ष और देखें वीडियो”

  • Sab sawal karna chahte he achhe kaam kisi ko dikhte nahi. Jahan galat ho to vo galat hi hoga lekin jo sahi he vo sahi hi hoga. Suman ji alochna ke liye taiyaar raho

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