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उपेंद्र राय सहारा से मुक्त हुए!

एक बड़ी खबर सहारा मीडिया से आ रही है. सूत्रों का कहना है कि डायरेक्टर न्यूज समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर काबिज उपेंद्र राय अब इस संस्थान के हिस्से नहीं रहे. हालांकि उपेंद्र राय के करीबियों का कहना है कि उपेंद्र राय सहारा के हिस्से बने हुए हैं. बस, उनके काम का प्रोफाइल बदल गया है. उन्हें सहारा की तरफ से जो भी सुख सविधाएं मिल रही हैं, वह यथावत जारी है. उनका पद अब ग्रुप एडवाइजर का हो गया है. उनकी रिपोर्टिंग साल भर से जेबी राय को थी. अब वे सीधे सुब्रत राय को रिपोर्ट करेंगे.

एक बड़ी खबर सहारा मीडिया से आ रही है. सूत्रों का कहना है कि डायरेक्टर न्यूज समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर काबिज उपेंद्र राय अब इस संस्थान के हिस्से नहीं रहे. हालांकि उपेंद्र राय के करीबियों का कहना है कि उपेंद्र राय सहारा के हिस्से बने हुए हैं. बस, उनके काम का प्रोफाइल बदल गया है. उन्हें सहारा की तरफ से जो भी सुख सविधाएं मिल रही हैं, वह यथावत जारी है. उनका पद अब ग्रुप एडवाइजर का हो गया है. उनकी रिपोर्टिंग साल भर से जेबी राय को थी. अब वे सीधे सुब्रत राय को रिपोर्ट करेंगे.

वहीं दूसरी तरफ अंदरुनी सूत्र बताते हैं कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) समेत कई जांच एजेंसियों के शिकंजे में फंसे सुब्रत राय को कुछ लोगों ने समझा दिया है कि उनकी तिहाड़ जेल में बंदी जीवन गुजारने के पीछे बड़ी वजह उपेंद्र राय हैं. उन्हीं के जमाने में प्रवर्तन निदेशालय, सेबी समेत कई एजेंसीज के तेजतर्रार अधिकारियों से सहारा का पंगा हुआ और मामला दिनोंदिन उलझता बिगड़ता चला गया. इसी कारण उन दिनों भी सहारा मीडिया से उपेंद्र राय को किनारे कर पीआर का काम सौंप दिया गया था. अब उन्हें पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया है और कहने भर को ग्रुप एडवाइजर का पद दे दिया गया है.

सूत्रों के मुताबिक उपेंद्र राय को सुब्रत राय ने कह दिया है कि वह चाहें तो अपना खुद का या किसी दूसरी कंपनी का काम देख सकते हैं. इससे साफ पता चलता है कि सहारा से उपेंद्र राय की विदाई हो चुकी है. रिश्तों में खटास न आए और सम्मानपूर्ण एक्जिट हो, इसके लिए ग्रुप एडवाइजर का पद क्रिएट किया गया है. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि उपेंद्र राय लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं. इसी के लिए उन्होंने अवकाश हेतु प्रार्थनापत्र दिया था जिसे सुब्रत राय ने मंजूर कर उन्हें मुक्त कर दिया. फिलहाल उपेंद्र राय को लेकर सहारा में जितने मुंह उतनी बातें सुनाई पड़ रही हैं.

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