इस ईडी अफसर के अग्रिम बचाव में मोदी सरकार को भी गरियाने से नहीं हिचका ये भाजपा सांसद!

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के ताकतवर अधिकारी राजेश्वर सिंह के पक्ष में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी चट्टान की तरह आंख मूंद कर खड़े हैं. इसके लिए अगर उन्हें पूरी मोदी सरकार को गरियाना पड़े तो इससे भी नहीं हिचक रहे हैं. सीबीआई के ताजा विवाद में स्वामी बोल पड़े- ‘मेरी सरकार भ्रष्टाचारियों को बचाने में लगी, CBI के बाद ED अधिकारी होंगे सस्पेंड’. Continue reading

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ईडी का दावा- पत्रकार उपेंद्र राय की 26.65 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर दी गई

प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी ने जानकारी दी है कि पत्रकार उपेंद्र राय की कुल 26.65 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई है. इसमें उपेंद्र के परिवार की लग्जरी कारें और कई फ्लैट भी शामिल हैं. Continue reading

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ईडी अफसर राजेश्वर सिंह से संबंधित पत्रकार उपेंद्र राय की याचिका खारिज

The Supreme Court dismissed a plea of journalist Upendra Rai seeking to restrain Enforcement Directorate officer Rajeshwar Singh from conducting an investigation against him in a corruption case. A bench of Justices AK Sikri and Ashok Bhushan said the cases lodged against Mr Rai have nothing to do with the 2G case pending before it and his plea is not maintainable in the present set of proceedings. Continue reading

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दबंग दुनिया अखबार में लीड खबर के रूप में छपा उपेंद्र-राजेश्वर प्रकरण, पढ़ें

ईडी अधिकारी पर ही आय से अधिक संपत्ति का आरोप

बदले की भावना से काम कर रहीं जांच एजेंसियां, चैनल खोलने के लिए उपेंद्र राय ने इकट्ठे किए थे पैसे, राय के करीबियों और वकीलों पर भी ईडी का दबाव

मुंबई। देश के बड़े पत्रकारों में शुमार उपेंद्र राय बहुत कम समय में ऊंचाई पर पहुंचे हैं। उन्होंने ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह पर आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया था। इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी सक्रिय हुई और सुप्रीम कोर्ट में तारीख से पहले सबक सिखाने के लिए उपेंद्र राय की गिरफ्तारी सुनियोजित तरीके से कराई गई। इसके पीछे नेताओं, अफसरों से लेकर वकीलों तक की भी मिलीभगत है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारी की आय से अधिक संपति की जांच पर लगी रोक हटा दिया दिया है। इसके कारण ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। Continue reading

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उपेंद्र राय के खिलाफ चार्जशीट दायर, इसमें एक अफसर और एक उद्यमी का भी नाम

सीबीआई ने पत्रकार उपेंद्र राय के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। पटियाला हाउस कोर्ट में दायर चार्जशीट में उपेंद्र राय समेत कुल पांच लोगों के नाम हैं। ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सेक्युरिटी के असिस्टेंट डायरेक्टर राहुल राठौड़, एयर वन एविएशन के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर आलोक शर्मा का भी चार्जशीट में नाम है। Continue reading

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उपेंद्र राय को सीबीआई रिमांड से मुक्ति मिली तो अब पश्चिम बंगाल पुलिस पीछे पड़ी

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय के दिन वाकई बहुत मुश्किल भरे चल रहे हैं. पुलिस-प्रशासन और राजनीति की तिकड़ी के कुछ घातक लोग इरादतन उनके पीछे पड़े हुए हैं. यही कारण है कि उन्हें जब एक एजेंसी के रिमांड-पूछताछ से मुक्ति मिलती है तो कोई दूसरी एजेंसी उठा लेती है. दूसरी एजेंसी से मुक्ति मिलती है तो तीसरी एजेंसी उठाने के लिए पीछे पड़ जाती है. Continue reading

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कोर्ट ने पत्रकार उपेंद्र राय को 5 दिन की और सीबीआई रिमांड पर भेजा

खबर आ रही है कि सीबीआई की साकेत कोर्ट ने पत्रकार उपेंद्र राय को 5 दिन की और सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों की पूरी कोशिश है कि उपेंद्र राय को ज्यादा से ज्यादा वक्त तक रिमांड पर या जेल में रखा जाए। पांच मई को गिरफ्तार किए गए उपेंद्र राय को कभी सीबीआई तो कभी ईडी रिमांड पर ले लेती है। सीबीआई के मामलों में जमानत मिलने के बाद जेल से छूटे उपेंद्र राय को जेल गेट से ही ईडी यानि इनफोरसमेंट डायरेक्टोरेट ने गिरफ्तार कर लिया। पूरा प्रकरण यूं है… Continue reading

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उपेंद्र राय को सीबीआई ने फिर रिमांड पर लिया, राजेश्वर सिंह को मंत्रालय ने चार्जशीट भेजा

उपेंद्र राय

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को सीबीआई ने फिर से पांच दिन की रिमांड पर ले लिया है. ग्यारह जुलाई को उपेंद्र राय की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने कोर्ट को समझाया कि उपेंद्र राय के पीछे कई बड़ी मछलियां हैं जो संदिग्ध लेन-देन में शामिल हैं. एक जनसेवक को गिरफ्तार किया गया है. यदि राय को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह सबूतों से छेड़छाड़ करके और गवाहों को प्रभावित करके जांच पर असर डाल सकते हैं. Continue reading

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रिमांड खत्म होने के बाद कोर्ट ने उपेंद्र राय को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा

नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने पत्रकार उपेंद्र राय को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक सेहरावत से कहा कि राय से हिरासत में अब और पूछताछ की जरूरत नहीं है. इसके बाद अदालत ने उपेंद्र को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. Continue reading

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सच्चाई के साथ हूं, जीतेंगे हम लोग : उपेंद्र राय

आज कोर्ट से निकलते उपेंद्र राय

प्रवर्तन निदेशालय ने वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को आज कोर्ट में पेश किया। पहले सात दिन, फिर पांच दिन की रिमांड पूरी होने के बाद उपेंद्र राय को आज तीसरी बार अदालत में रिमांड की मांग को लेकर पेश किया गया।  Continue reading

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कोर्ट ने पत्रकार उपेंद्र राय की हिरासत पांच दिन के लिए बढ़ाई

नई दिल्ली: दिल्ली की एक कोर्ट ने पत्रकार उपेंद्र राय की हिरासत पांच दिन के लिए और बढ़ा दी है. कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्रकार उपेंद्र राय से मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पांच और दिन के लिए हिरासत में पूछताछ की आज अनुमति दे दी.  Continue reading

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उपेंद्र राय के भतीजे ने वीडियो जारी कर कहा- ‘चाचा की जान खतरे में…’, देखें वीडियो

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय के भतीजे प्रियेश राय ने एक वीडियो जारी कर अपनी आशंकाएं सोशल मीडिया पर साझा की हैं. प्रियेश ने इस वीडियो में कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी वाले उपेंद्र राय की जान लेने पर आमादा हैं. उपेंद्र को न तो समय से खाना-पीना दिया जा रहा है, न ही उन्हें नित्य कर्म करने की छूट दी जा रही है. Continue reading

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उपेंद्र राय 7 दिन के लिए ईडी के हवाले, जानिए कोर्ट में क्या बात-बहस हुई

पहले सीबीआई ने केस दर्ज कर गिरफ्तार किया और जेल भेजा. जमानत पर छूटते ही तिहाड़ जेल गेट से सहारा मीडिया और तहलका के सीईओ रह चुके उपेंद्र राय को प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी वालों ने अरेस्ट कर लिया. उसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया जहां लंबी चली बहस और सुनवाई के बाद अदालत ने उपेंद्र राय को सात दिन के रिमांड पर ईडी को सौंप दिया. इस घटनाक्रम से उपेंद्र राय के परिजन, समर्थक और शुभचिंतक निराश हैं. Continue reading

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तिहाड़ गेट से उपेंद्र राय की गिरफ्तारी से ख़फा समर्थक करने लगे नारेबाजी, देखें वीडियो

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है. सीबीआई ने जिन मामलों में गिरफ्तार किया था, उनमें जमानत के बाद उपेंद्र ज्यों ही तिहाड़ जेल से छूटे, ईडी यानि प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने जेल गेट पर ही उन्हें पकड़ कर अपनी गाड़ी में बिठा लिया और किसी अज्ञात जगह ले गए. Continue reading

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उपेंद्र राय तिहाड़ से निकलते ही फिर हुए गिरफ्तार, देखें वीडियो

एक बड़ी खबर तिहाड़ जेल से आ रही है. वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को जमानत मिलने के बाद तिहाड़ जेल से बीती रात साढ़े नौ बजे निकलने के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी की टीम ने फिर से उठा लिया है. Continue reading

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वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को मिल गई जमानत

प्रवर्तन निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की साजिशों के तहत गिरफ्तार किए गए वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को आज जमानत मिल गई. उपेंद्र राय को कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन करने और एयरपोर्ट में प्रवेश के लिए अनधिकृत पास रखने का आरोप लगाकर गिरफ्तार किया गया था. बाद में कई सारी एजेंसीज, ईडी से लेकर सीबीआई तक, ने मिलकर उपेंद्र के परिजनों और वकीलों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था. Continue reading

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ताकतवर ईडी अफसर राजेश्वर सिंह के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं! सुप्रीम कोर्ट ने बजा दी घंटी

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को जेल भिजवाने और प्रताड़ित कराने में जिस ताकतवर ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह का नाम आ रहा है, लगता है उनके भी बुरे दिन शुरू होने वाले हैं. दरअसल ये प्रकृति / ब्रह्मांड / नेचर का लॉ है कि समय के वृत्ताकार पैरों तले एक रोज सबको आना होता है, किसी को जल्दी तो किसी को बाद में. Continue reading

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उपेंद्र राय और उनके परिचितों की प्रताड़ना के खिलाफ पत्रकारों ने खोला मोर्चा, देखें तस्वीरें

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय के परिजनों, परिचितों और वकीलों को बेवजह प्रताड़ित करने व आतंकित किए जाने के खिलाफ कई जिलों के पत्रकारों ने मोर्चा खोल दिया है. कुशीनगर से लेकर सीतापुर, गोरखपुर तक के पत्रकारों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अपने जिलों के अधिकारियों को सौंपा. नीचे देखें ज्ञापन देते पत्रकारों की तस्वीरें और उनके ज्ञापन की प्रतियां…
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क्या उपेंद्र राय भड़ास वाले यशवंत और अपनी पत्नी रचना समेत कइयों की फोन कॉल रिकार्डिंग सुना करते थे!

Yashwant Singh : मेरी कोशिश रहती है कि मैं पीड़ित के साथ रहूं (बशर्ते वह मनुष्यता और प्रकृति यानि नेचर के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन न करता हो). भले वो पापी रहा हो. उपेंद्र राय के मामले में मेरी हल्की सी सक्रियता के चलते उनकी नींद उड़ी हुई है जो उन्हें इसी दफे ‘मार’ डालने पर आमादा हैं. Continue reading

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उपेंद्र राय के खिलाफ जांच रोकने और गिरफ्तारी से संरक्षण देने से कोर्ट का इनकार

समाचार एजेंसी भाषा की खबर…

दिल्ली हाई कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय के खिलाफ जांच पर रोक लगाने या उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करने से आज मना कर दिया। मुंबई के एक बिल्डर से 15 करोड़ रुपये की वसूली करने के आरोप में सीबीआई द्वारा दर्ज दूसरी प्राथमिकी को राय ने रद्द करने की मांग की थी। Continue reading

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उपेन्द्र जल्द से जल्द सत्ता के इन घाघों के चंगुल से बाहर निकलें, यही कामना है

Satyendra PS : उपेन्द्र राय। मैं इनके बारे में 1995 के आसपास से सुनता आ रहा हूँ। मेरे तमाम मित्र इन्हें अपना बहुत करीबी बताते हैं। कुछ मित्रों ने कहा भी कि किसी रोज आपसे मिलवाते हैं, लेकिन कभी ऐसा संयोग नहीं मिला। उपेन्द्र राय के बारे में जो भी आलोचनाएं हैं, उनके आगे बढ़ने को लेकर हैं। तरह तरह की कहानियां गढ़ी जाती हैं, कुछ सही भी हो सकती हैं। Continue reading

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बदले की भावना से उपेंद्र राय के पीछे हाथ धोकर पड़ी हैं केंद्रीय जांच एजेंसियां, दो वकील भागे

फाइल फोटो : वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय

कई केंद्रीय जांच एजेंसियां निहित स्वार्थ और बदले की भावना के तहत वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय के पीछे हाथ धोकर पड़ी हैं. सीबीआई से लेकर ईडी तक ने न सिर्फ उपेंद्र राय बल्कि इनके करीबियों को भी डरा-धमका रखा है. यही कारण है कि उपेंद्र राय का केस लड़ने वाले दो वकीलों ने चुपचाप इस केस से अलग हो जाना उचित समझा. इन वकीलों ने फोन तक बंद कर लिया है. ऐसे में उपेंद्र राय के करीबियों को नए वकील करने पड़ रहे हैं. Continue reading

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उपेंद्र राय के खिलाफ एक और एफआईआर, सीबीआई रिमांड दो दिन बढ़ी

आपराधिक षडयंत्र और धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार पत्रकार उपेंद्र राय के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई है. सीबीआई द्वारा दर्ज इस एफआईआर में जबरन उगाही का आरोप है. इसमें उपेन्द्र राय के अलावा उनके सहयोगी राहुल शर्मा भी आरोपी हैं. आरोप है कि उपेंद्र और राहुल दोनों ने स्वयं को आयकर विभाग का ‘पावर ब्रोकर’ बताकर मुंबई के बिल्डर से 15 करोड़ रुपये वसूले थे. सीबीआई का कहना है कि मुंबई के व्हाइट लायन रियल एस्टेट डेवेलॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों में से एक बलविन्दर सिंह मल्होत्रा ने राय के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है. Continue reading

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वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को सीबीआई ने किया गिरफ्तार

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को केंद्रीय जांच ब्यूरो उर्फ सीबीआई ने अरेस्ट कर लिया है. बताया गया है कि उपेंद्र राय पर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर यह गिरफ्तारी की गई है. आरोप है कि उपेंद्र राय ने एयरपोर्ट में प्रवेश से संबंधित एक संवेदनशील पास हासिल किया. इस पास के चलते किसी भी एयरपोर्ट में बिना यात्रा के कागजात के ही प्रवेश किया जा सकता है. आरोप है कि उपेंद्र राय ने सिविल एविएशन मंत्रालय के अधिकारियों से मिलीभगत कर एयरपोर्ट में घुसने के लिए पास हासिल किया. Continue reading

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उपेंद्र राय ने ‘पीगुरुज डॉट कॉम’ पर सौ करोड़ का मानहानि का मुकदमा किया

कई मीडिया घरानों में वरिष्ठ पद पर कार्यरत रहे और इन दिनों खुद का मीडिया वेंचर खड़ा करने में जुटे वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय ने पीगुरुज डॉट कॉम नामक वेबसाइट पर सौ करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा किया है. सौ करोड़ के मानहानि के मुकदमें के लिए निर्धारित कोर्ट फीस के रूप में एक करोड़ रुपये दिल्ली हाईकोर्ट में उपेंद्र राय द्वारा जमा कराया गया है. उपेंद्र राय का आरोप है कि इस वेबसाइट पर उनके बारे में तथ्यहीन और भ्रामक खबर का प्रकाशन किया गया है. Continue reading

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उपेंद्र राय और सहारा मीडिया ने खूब चूतिया बनाया इन कर्मियों को!

एक कहावत है कि मछली मर जाती है लेकिन उसकी गंध मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ती। कुछ ऐसा ही हाल उपेंद्र राय का है। उनके जाने के बाद भी उनकी दुर्गंध से सहारा मीडिया के लोग बेहाल हैं। उपेंद्र राय ने अपने समय में राष्ट्रीय सहारा से आंदोलनकारी लोगों को सेफ एग्जिट प्लान के तहत संस्थान से बाहर निकल जाने को कहा। इस प्लान के तहत संस्था को अलविदा कहने वाले कर्मचारियों को कोई न्याय नहीं मिल रहा है। इस कारण इन कर्मचारियों के अंदर भारी बेचैनी है।

गौरतलब है मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और अन्य परिलाभ देने से बचने के लिए सहारा मीडिया के नए सर्वेसर्वा बने उपेन्द्र राय सेफ या सेल्फ एग्जिट प्लान लेकर आये। इस प्लान को लेने वाले को बकाया वेतन व अन्य बकाया (ईएल, पेपर, मोबाइल, कन्वेंश) एवं फंड और ग्रेच्यूटी आदि एकमुश्त देने का सब्जबाग दिखाया गया। निवेशक की तरह कर्मचारी भी उल्लू बने। बडी संख्या में कर्मचारियों ने “भागते भूत की लंगोटी ही सही” वाली नीति अपनाते हुए इस प्लान को ले तो लिया लेकिन उन्हें मिला क्या? बाबा जी का ठुल्लू।

भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार लगभग 212 कर्मचारियों ने इस उम्मीद में इस प्लान को लिया कि कम से कम उन्हें एकमुश्त पैसा मिल जाएगा। उल्लेखनीय है कि जबसे सहारा प्रमुख सुब्रतो राय जेल में रहे, सहारा मीडिया वालों को कभी भी पूरी सेलरी नहीं मिली। यहां यह भी बता दें कि कोई भी प्लान हमेशा सामान्य से बेहतर होता है, आकर्षक होता है लेकिन इसमें कुछ भी आकर्षक नहीं था। बकाया तो अगर कर्मचारी सामूहिक लड़ाई लड़ते तो उन्हें मिल ही जाता क्योंकि वह तो मिलना ही था।

पता चला है कि अब सेफ एग्जिट प्लान लेने वाले कर्मचारियों से कंपनी इस्तीफा लिखवा रही है। क्या चूतिया बनाया है उपेंद्र राय ने और अब सहारा मीडिया प्रबंधन उसी राह पर कदम आगे बढ़ा रहा है। प्लान लायेगी कंपनी और इस्तीफा देंगे कर्मचारी। यानी चित्त भी मेरी, पट्ट भी मेरी, अंटी मेरे बाप की। अब सवाल उठता है कि क्या कंपनी ने अपने ऐग्जिट प्लान में इसको अपनाने के लिए इस्तीफे की शर्त रखी थी? नहीं। क्या इस प्लान को बनाते समय कर्मचारियों का कोई प्रतिनिधि था? नहीं। कंपनी खुद प्लान लेकर आती है और प्लान लेने वाले कर्मचारियों से इस्तीफा लिखवाती है और कर्मचारी लिख भी दे रहे है। क्यों? इसलिए कि पत्रकारों से बड़ा नपुंसक प्राणी दिया क्या सर्च लाइट लेकर ढूंढ लीजिए, इस धरा पर कोई मिलेगा नहीं।

कह सकते हैं कि निवेशकों के बाद अब कर्मचारियों/ भूतपूर्व कर्मचारियों को बेवकूफ बना दिया उपेंद्र राय और सहारा प्रबंधन ने। सहारा इंडिया चूंकि मूलतः चिटफंड कंपनी है इसलिए सब्जबाग दिखाना इनका पेशा और कामयाब पेशेवर वही है जो पेशागत चीजों को अपनी आदत बना ले। अब कामयाब सब्जबागी ही कामयाब चिटफंडी हो सकता है और ये कामयाब चिटफंडी है। ये हर निवेशक को ही नहीं अपने कर्मचारियों को जनता का जमा धन और उसपर देय अर्जित ब्याज देने का सब्जबाग दिखाते हैं। अपने तथाकथित / क्रांतिकारी एक्जिट प्लान में उपेंद्र राय ने भी सहारा के मीडिया कर्मियों को दिखाया कि एकमुश्त सभी बकाये तय समय के भीतर मिल जाएंगे।

मीडिया प्रमुख बने उपेन्द् राय ने आते ही पुराने कर्मचारियों को निकालने के लिए एक्जिट प्लान रूपी चोर रास्ता अपनाया। प्लान के पहले चरण वाले एक भी कर्मचारी को उसका पूरा बकाया नहीं दिया गया। बाद में जो लोग इस प्लान को अपनाए उन्हें भी कुछ नहीं मिला। सूत्रों का कहना है कि सहारा ने मार्च २०१३ के बाद किसी को पीएफ के मद का पैसा नहीं दिया है। बताते चलें कि सहारा ट्रस्ट के माध्यम से पीएफ का पैसा अभी तक रखती रही है। सरकार की कडाई के बाद उसने यह व्यवस्था समाप्त तो कर दी लेकिन पैसा जमा किया नहीं। देखना है कि सुब्रत राय जेल से बाहर आने के बाद सहारा मीडिया को लेकर क्या नीति अपनाते हैं? फिलहाल उपेंद्र राय तो सहारा से लापता हो चुके हैं और सुना है कि तहलका वाले केडी सिंह को सपना दिखा कर बीमार और पस्त तहलका पर काबिज हो गए हैं. कहीं वहां भी सहारा जैसा सेल्फ एक्जिट प्लान लाकर कर्मचारियों को चूतिया न बना दें! इसलिए ध्यान रखने की जरूरत है दोस्तों. ये आदमी दिखता कुछ है, कहता कुछ है, करता कुछ है और नतीजा कुछ और देता है।

एक पीड़ित सहारा कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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उपेंद्र राय ने सीईओ और एडिटर इन चीफ पद से इस्तीफा दिया

जब मालिक पैसे नहीं देगा तो सीईओ और एडिटर इन चीफ क्या कर लेगा. लंबे समय के जद्दोजहद के बाद उपेंद्र राय ने इस्तीफा दे दिया. बात वही थी. सुब्रत राय फंड रिलीज नहीं कर रहे थे और कर्मचारियों की सेलरी की डिमांड बढ़ती जा रही थी. ऐसे में रोज रोज के किच किच से तंग आकर उपेंद्र राय ने ग्रुप एडिटर इन चीफ और ग्रुप सीईओ के दोनों पदों से इस्तीफा दे दिया है. सहारा के उच्च पदों पर आसीन लोगों ने इस खबर को कनफर्म किया है. यह भी बताया जा रहा है कि अभिजीत सरकार को अब सहारा मीडियाा की भी पूरी जिम्मेदारी दे दी गई है.

पूर्वी यूपी के जिला गाजीपुर के रहने वाले उपेंद्र राय ने सहारा समूह में बहुत छोटे पद से शुरुआत की थी और पूरे ग्रुप को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई. उनकी कमर्ठता और निष्ठा को देखते हुए सहारा प्रबंधन लगातार उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां देता गया. उपेंद्र राय ने पूरी लायल्टी और डेडीकेशन के साथ सहारा समूह को अपने योगदान से काफी बड़ा बनाने में भरपूर योगदान दिया. बाद में किन्हीं मुद्दों को लेकर सहारा प्रबंधन से उपेंद्र राय का विवाद हुआ तो वो इस्तीफा देकर स्टार न्यूज चले गए. ऐसा कम होता है जब सहारा में काम किया कोई वरिष्ठ कर्मी किसी दूसरे ग्रुप में बड़े पद पर जाए. उपेंद्र राय ने दिल्ली और मुंबई में रहकर स्टार न्यूज के लिए जमकर काम किया.

उपेंद्र राय की मेहनत और लगन को देखते हुए, साथ ही पुराने विवादों को निराधार व मनगढ़ंत पाते हुए सहारा प्रबंधन ने उपेंद्र राय के सहारा में कार्यकाल के दौरान कर्तव्यनिष्ठ इतिहास के मद्देनजर उन्हें एक बार फिर सहारा में ससम्मान वापसी कराई. उन्हें मीडिया हेड का पद दिया गया. लेकिन फिर किन्हीं आंतरिक उपद्रवों के चलते उपेंद्र राय को सहारा से साइडलाइन कर दिया गया. ऐसे में उपेंद्र राय ने अपनी मेधा और क्षमता के बल पर जी न्यूज में शीर्षस्थ पद पर ज्वाइन कर सेवा देने की शुरुआत की. कुछ दिनों बाद एक बार फिर सहारा प्रबंधन उपेंद्र राय के शरणागत हुआ और उन्हें ग्रुप सीईओ और एडिटर इन चीफ बनाकर सहारा के मुश्किल दिनों में वापसी कराई. लेकिन सहारा प्रबंधन जिन शर्तों और वादों के जरिए उपेंद्र राय को संस्थान में बड़े पद पर वापस लाया, उन वादों को निभाने में विफल हुआ. सहारा समूह अपने ही कर्मचारियों को सेलरी दे पाने में असफल होता रहा. ऐसे में उपेंद्र राय ने आज एक बार फिर से अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया है. 

माना जा रहा है कि सहारा प्रबंधन अब सिर्फ वादों और भरोसों के जरिए सहारा कर्मियों को अपने साथ जोड़े रखना चाहता है. लेकिन जब तक सहारा कर्मियों को तनख्वाह न दी जाएगी, तब तक वो कैसे सहारा की सेवा कर पाएंगे. ऐसे में अब बड़ा सवाल सहारा कर्मियों के भविष्य का है. क्या सहारा की गाड़ी अब पूरी तरह डगमगा गई है और पूरी ताकत सिर्फ व सिर्फ सहारा श्री सुब्रत राय को छुड़ाने में लगा दिया है, भले ही सहारा कर्मियों का घर बार चौपट होता रहे. कहा जा रहा है कि आने वाले दिन सहारा समूह के लिए बेहद मुश्किल भरे दिन साबित होने वाले हैं. देखना है कि नए मीडिया हेड अभिजीत सरकार इस मुश्किल वक्त को कैसे हैंडल कर पाते हैं.

उपेंद्र राय के ज्वायनिंग के दौरान की भड़ास पर प्रकाशित खबर पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें….

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वेतन मांगने पर बाहर कर दिए गए सहाराकर्मी का एक खुला पत्र उपेंद्र राय के नाम

प्रतिष्ठार्थ
श्री उपेंद्र राय,
एडिटर इन चीफ
सहारा मीडिया
नोएडा

विषय- आपकी कथनी और करनी में अंतर के संर्दभ में

महोदय

मैं सहारा राष्ट्रीय सहारा देहरादून से विगत आठ साल से जुड़ा एक कर्मचारी हूं। इस दौर में मैंने देखा जो मौज सहारा के अफसर और उनके चमचे लेते रहे हैं, वह किसी की नहीं है। हम कुछ लोग खच्चर की तरह सहारा के लिए काम करते रहे और बाकी मौज लेते रहे। महोदय, यह सही है कि पहले सहारा में नौकरी को सरकारी माना जाता था और एक तारीख को वेतन एकाउंट में आ जाता था। विगत डेढ़ साल से सहारा में वेतन भुगतान संबंधी समस्या है। तर्क दिया जा रहा है कि कंपनी संकट में है तो कृपया आप हमें बता दें कि जब कंपनी संकट में नहीं थी तो प्रबंधन ने कितनी बार हमारी सेलरी बढ़ाई?

इसके अलावा कुछ सवाल हैं जिनके उत्तर आपको देने चाहिए ताकि सहारा में कार्यरत लोगों का मनोबल बढ़े। ये सवाल निम्न हैं…

-आपने प्रेरणा सम्मेलन किया। बसपा सुप्रीमो मायावती की तर्ज पर आप अकेले डायस पर बैठे और जमकर भाषण दिया। इसमें आपने जरा भी जिक्र नहीं किया कि किस तरह से कर्मचारियों का जीवन यापन हो रहा है और पिछले बकाया वेतन का भुगतान होगा कब?

-आपने अपने भाषण जिसे आप प्रेरणा कहते हैं, में टीवी सीरियल सम्राट अशोक का जिक्र किया, उसमें आपने कई बातों का उल्लेख किया, लेकिन एक भी बात ऐसी नहीं बतायी कि सम्राट अशोक ने अपनी जनता के लिए अपनी जान हथेली पर रख दी थी। पर आपने क्या ऐसा किया? उल्टे जब हम सेलरी के संकट से जूझ रहे थे तो आपने अपनी मां के निधन को ऐतिहासिक बना दिया। ऐसे प्रचार किया जैसे वो जगत जननी हों। वेतन के लिए पैसे नहीं, लेकिन मां के निधन पर अखबारों में लाखों रुपये का वेतन फूंक दिया गया। यह पैसा कहां से आया?

-महोदय, क्या मां और मां में अंतर होता है? देहरादून में तैनात एक कर्मचारी की मां बीमार थीं तो वह पैसों के अभाव में डाक्टर से सलाह के लिए सरकारी अस्पताल में घंटों अपनी मां को लेकर लाइन में लगा रहा। देहरादून के एक कर्मचारी की 11वीं कक्षा में पढ़ रही बेटी ने स्कूल में दम इसलिए तोड़ दिया कि उसका पिता पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा सका। वह कर्मचारी खुद भी दिल का मरीज है और उसकी ओपन हार्ट सर्जरी भी हो चुकी है। महोदय, देहरादून के पटेल नगर में जहां राष्ट्रीय सहारा का आफिस है, वहां स्थित एक पेट्रोल पंप पर सहारा से निकाला गया एक कर्मचारी महज 50 रुपये रोजाना के हिसाब से नौकरी कर रहा है क्योंकि उसके पास बच्चे की फीस देने के लिए पैसे नहीं हैं। वह 1991 से सहारा में कार्यरत था। उसे महज इसलिए निकाल दिया गया कि वह वेतन मांग रहा था। सहारा अपने को विश्व का सबसे बड़ा परिवार कहता है, क्या परिवार ऐसा होता है?

-सहारा में कार्यरत सब जानते हैं कि आपने सहारा में अपनी खोई कुर्सी हासिल करने के लिए कर्मचारियों के एक गुट को भड़काया। नोएडा व अन्य स्थानों पर हड़ताल करवायी। फिर जेल में बंद सहाराश्री को भ्रमित कर नया पद व रुतबा भी हासिल कर लिया। हड़ताल का नेतृत्व करने वाले को संपादक बना दिया और जो बेचारे अपने वेतन की मांग कर रहे थे, उन्हें यूनियनिस्ट कहकर नौकरी से निकलवा दिया। यह कैसा इंसाफ है?

-आपके झूठ का पुलिंदा नोटिस बोर्ड पर चिपका हुआ है। आपने मार्च माह में दस तारीख तक वेतन देने की बात कही, लेकिन वेतन मिला 21 मार्च को। इसी तरह से उसी पत्र में कहा गया था अप्रैल में वेतन पहले सप्ताह में दे दिया जाएगा लेकिन अब तक नहीं मिला। आखिर कब मिलेगा वेतन?

-जिन लोगों को आपने कथित यूनियन (अपना वेतन मांगना यूनियनबाजी हो गया] के आधार पर नौकरी से हटा दिया, उन्हें भी आज तक पैसा नहीं दिया। क्यों?

-सेफ एक्जिट प्लान के तहत नौकरी छोड़ने वालों, कांट्रेक्ट समाप्त होने वाले कर्मचारियों व जो पहले ही नौकरी से इस्तीफा दे चुके हैं, उन्हें भी आपने अब तक हिसाब नहीं दिया। क्यों?

-महोदय, यदि वेतन संकट को छोड़ भी दिया जाए तो सहारा के अफसर आज भी मौज कर रहे हैं। यदि सहारा के अफसरों की संपत्ति सार्वजनिक करने की बात हो तो पता लगेगा कि सहारा को जितना भुगतान करना है उसका आधा तो अफसरों ने हड़पा है। कर्मचारी तो पहले भी कई साल में इंक्रीमेंट पाते थे और आज तो वेतन के भी लाले हैं। तो आप बताएं सजा कर्मचारियों को ही क्यों?

-महोदय, मैं आपको यह भी याद दिलाना चाहता हूं कि आप सहारा में मात्र एक स्टिंगर ही थे। आपकी लाइजनिंग का कोई जवाब नहीं है। यह आपकी योग्यता है कि आप इतने बड़े पद पर जा पहुंचे। लेकिन उन कर्मचारियों का क्या जो रात तीन बजे तक अखबार छापने का काम करते हैं और बदले में धेला भी नहीं मिल रहा?

-महोदय, आप यह बताने का कष्ट जरूर करें कि आपकी कथनी और करनी में अंतर क्यों है। सब जानते हैं कि आपने निजी स्वार्थ के लिए इतनी बड़ी जिम्मेदारी ली है। इसकी आड़ में आपने महज अपना फायदा सोचा, सहारा का नहीं। यदि सोचा होता तो सहारा मीडिया को और बेहतर बनाते, न कि पतन के रास्ते पर ले जाते।

आपसे विनम्र अनुरोध है कि यदि आपकी अंतरआत्मा आपको जरा भी कचोटती हो तो आप उन कर्मचारियों का दर्द महसूस करें जो सहारा से जुड़े हुए हैं। 

ये तो आप जानते ही होंगे कि मुझे भी अपना वेतन मांगने पर बाहर का रास्ता दिखाया गया.

भवदीय
सुनील परमार
देहरादून
9897593345
sun_parmar@rediffmail.com

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सुब्रत राय जेल में प्रसन्न, सहारा मीडिया कर्मी जेल के बाहर भीषण सेलरी संकट से खिन्न

क्या कांट्रास्ट है. जो जेल में है वो प्रसन्न है. जो आजाद है वह खिन्न है. यह तीसरा महीना चल रहा है सहारा मीडिया में बिना सेलरी काम कराए जाने का. सुब्रत राय तिहाड़ जेल में दबा कर किताबें लिख रहे हैं, बाहर अखबारों में करोड़ों अरबों का विज्ञापन अपनी किताब से संबंधित छपवा रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके पास अपने कर्मियों को देने के लिए पैसे नहीं हैं. सुब्रत राय खुद को रिहा कराने के लिए होटल जमीन सब बेचने का प्रस्ताव कोर्ट के सामने कर रहे हैं लेकिन अपने कर्मियों को सेलरी देने के नाम पर चुप्पी साधे हैं.

ज्ञात हो कि सेलरी संकट पहले भी सहारा मीडिया में था लेकिन तब सहारा कर्मियों ने मोर्चा बनाकर, एकजुट होकर हड़ताल आदि का सहारा लेकर प्रबंधन पर घनघोर दबाव बनाया जिसके परिणामस्वरूप सहारा मीडिया के वरिष्ठों को हटाकर कमान उपेंद्र राय को दे दी गई. तब लोगों में भरोसा जगा कि अब सब बेहतर होगा. उपेंद्र राय ने शुरुआत में एक महीने की सेलरी देकर और सेल्फ एक्जिट पालिसी बनाकर यह संकेत दे दिया कि वह सहारा मीडिया में अब सेलरी का संकट नहीं आने देंगे. पर वक्त बीतने के साथ उपेंद्र राय अपनी सीमाओं में सिमटते गए. असल में उपेंद्र राय या कोई भी तभी सेलरी दे पाएगा जब सुब्रत राय सेलरी देने के लिए बोलेंगे. उन्हें दिख रहा है कि बिना सेलरी भी लोग काम कर रहे हैं इसलिए वह खुद के जेल में होने के नाम पर अपने कर्मियों पर इमोशनल अत्याचार करते हुए उनके पेट पर लात मार रहे हैं.

सहारा मीडिया के सैकड़ों कर्मियों ने भड़ास को फोन और मेल कर के अंदरखाने की जानकारी दी. नोएडा से लेकर लखनऊ, कानपुर, पटना, मुंबई हर जगह सहारा मीडिया कर्मी बेहद उदास और निराश हैं. किसी के बच्चे की फीस नहीं जमा तो किसी ने मकान का किराया नहीं भरा. रोज उम्मीद के साथ आफिस आते हैं और बेहद निराशा में भरकर वापस लौटते हैं. इन हालात में सहारा मीडिया में फिर से एक बार हड़ताल की संभावनाएं बनती नजर आ रही हैं. तिल तिल कर मरने से अच्छा है कि अपने हक के लिए लड़ कर मरो. पिछले दफे जब सहारा मीडिया में जोरदार हड़ताल हुई तो प्रबंधन हिल गया था और सेलरी रिलीज करने के साथ साथ आगे सब कुछ बेहतर होने का भरोसा मिला था. यहां तक कि सुब्रत राय को भी तिहाड़ से पत्र जारी करना पड़ा था. लेकिन प्रबंधन फिर कर्मियों की चुप्पी और धैर्य का नाजायज फायदा उठाने में जुटा है.

उपेंद्र राय भी सुब्रत राय के पैसे रिलीज करने का इंतजार कर रहे हैं. जो हालात सहारा मीडिया में है उसमें उपेंद्र राय भी खुद को चक्रव्यूह में फंसा पा रहे हैं. हालांकि कहने वाले कहते हैं कि तिहाड़ में मीटिंग एसी कांफ्रेंस के नाम पर करोड़ों का बिल भरने वाले और अपनी किताब के विज्ञापन पर करोड़ों खर्च करने वाले सुब्रत राय सेलरी के अलावा बाकी अन्य सभी कामों आयोजनों के लिए जमकर पैसे रिलीज कर रहे हैं लेकिन जाने क्या है कि सेलरी के लिए पैसे देने नाम पर वह एक सैडिस्ट मुस्कान के साथ चुप्पी साध लेते हैं. ऐसे में अब आखिरी हथियार सहाराकर्मियों की एकजुटता और हड़ताल के साथ हल्लाबोल ही है. जितने दिन सहारा कर्मी अलग थलग और चुप चुप रहेंगे, उतने दिन उनकी पीड़ा दुख मुश्किल गहन होते जाएगी.

एक सहारा कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


सहारा मीडिया के संकट के बारे में अगर आपको कुछ बताना है तो भड़ास तक अपनी बात bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं. मेल भेजने वालों का नाम पहचान गोपनीय रखा जाएगा.

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उपेंद्र राय की माता जी को श्रद्धांजलि देने के लिए 17 जनवरी को दिल्ली में प्रार्थना सभा

With profound grief, I inform the sad demise of my beloved Mother Smt Radhika Rai who left my family for her heavenly abode on 7 th January 2016.

Bhajan Sandhya & prayer meeting to pray for peace to the departed soul will be held on Sunday, 17th January 2016 from 4 p.m to 5 p.m in the weightlifting auditorium gate no 19, near by gate no. 1, Jawahar Lal Nehru stadium, Lodhi road, New Delhi.

Regards
Upendrra Rai
Group CEO & Editor In Chief
Sahara News Network


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