उपेंद्र राय को सीबीआई रिमांड से मुक्ति मिली तो अब पश्चिम बंगाल पुलिस पीछे पड़ी

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय के दिन वाकई बहुत मुश्किल भरे चल रहे हैं. पुलिस-प्रशासन और राजनीति की तिकड़ी के कुछ घातक लोग इरादतन उनके पीछे पड़े हुए हैं. यही कारण है कि उन्हें जब एक एजेंसी के रिमांड-पूछताछ से मुक्ति मिलती है तो कोई दूसरी एजेंसी उठा लेती है. दूसरी एजेंसी से मुक्ति मिलती है तो तीसरी एजेंसी उठाने के लिए पीछे पड़ जाती है.

ताजी सूचना ये है कि लगातार कई दिनों तक सीबीआई की रिमांड पर रहने के बाद उपेंद्र राय को तिहाड़ जेल न्यायिक हिरासत में भेज तो दिया गया है लेकिन इधर पश्चिम बंगाल की पुलिस ने एक अर्जी पटियाला हाउस कोर्ट में डाल कर उपेंद्र राय को उन्हें सौंपने की मांग की है. ये मांग राजनेता देवेंद्र प्रसाद यादव की एक शिकायत की जांच के सिलसिले में की गई है.

हालांकि उपेंद्र राय का देवेंद्र प्रसाद यादव की शिकायत में कोई नाम नहीं है और न ही दूर दूर तक कोई नाता है लेकिन देवेंद्र की शिकायत तहलका ग्रुप से जुड़े रहे एक शख्स के मोबाइल नंबर से मिली धमकी पर केंद्रित है तो तहलका में एडिटर इन चीफ के रूप में काम करने वाले उपेंद्र राय को भी इसी शिकायत के लपेटे में लिया जा रहा है. जिन दिनों देवेंद्र प्रसाद यादव ने ये शिकायत पुलिस में की, उन दिनों उपेंद्र राय तहलका के हिस्से नहीं थे.

फिर भी एक पावरफुल पुलिस लॉबी अपने रसूख और एकजुटता के दम पर इस मामले में उपेंद्र राय को खींच लाने पर आमादा है ताकि उन्हें पेरशान किए जाने का सिलसिला चलता रहे. फिलहाल तो उपेंद्र राय के परिजन उपेंद्र राय की जान पर खतरे को लेकर आशंकित हैं कि इसी तरह की कवायद में कहीं उपेंद्र राय की हत्या न कर दी जाए और हत्या को दुर्घटना दिखाकर सारा मामला रफादफा कर दिया जाए.

उपेंद्र राय के एक करीबी का कहना है कि उपेंद्र राय ने जिन लोगों के खिलाफ मोर्चा खोला था, जिनके खिलाफ वह लिखते-लड़ते थे, वे काफी ताकतवर हैं. उनके और उनके परिजनों की लॉबिंग काफी दूर दूर तक और काफी उपर तक है. यही कारण है कि उपेंद्र राय को बिना गैप किए लगातार रिमांड पर लिया जा रहा है और उत्पीड़ित किया जा रहा है.

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