‘नई उमंग’ के जरिए सपा मुस्लिमों को बरगला रही, रिहाई मंच ने उर्दू पत्रिका को भेजा नोटिस

लखनऊ । रिहाई मंच नामक संगठन ने आरोप लगाया है कि अखिलेश सरकार मुसलमानों को गुमराह करने के लिए उनके बीच अपनी उपलब्ध्यिों के झूठे दावों वाली उर्दू की सरकारी पत्रिका ‘नई उमंग’ प्रकाशित कर वितरित करा रही है जिसमें बेगुनाह मुसलमानों के रिहा किए जाने का वादा पूरा कर दिए जाने का दावा किया गया है। रिहाई मंच ने ‘नई उमंग’ पत्रिका के खिलाफ नोटिस भेजा है।

लाटूश रोड स्थित रिहाई मंच कार्यालय पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में रिहाई मंच अध्यक्ष मो0 शुऐब ने कहा कि ‘नई उमंग’ नाम से सूचना विभाग द्वारा जारी उर्दू पत्रिका के पृष्ठ संख्या 34 और 35 पर प्रदेश के एडीशनल एडवोकेट जनरल जफरयाब जीलानी ने दावा किया है कि ‘अखिलेश सरकार ने बेकसूरों पर से मुकदमा खत्म कराने के मामले में बेहद संजीदगी से काम किया तथा निमेष कमीशन की रिपोर्ट की सिफारिशात को कबूल करते हुए उन्हें भी अमल में लाया गया’।

वहीं इस इंटरव्यूव में उन्होंने यह भी दावा किया है कि सरकार ने 5 हजार बेगुनाहों की रिहाई कराई है जबकि सच्चाई तो यह है कि पूरे देश में आतंकवाद के नाम पर 5 हजार बेगुनाह मुसलमान बंद भी नहीं हैं। वहीं निमेष कमीशन की रिपोर्ट पर सरकार ने कोई कार्यवाई ही नहीं की है। अगर कार्यवाई की होती तो तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद को फंसाने वाले पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाई की होती और उन्हें जेल भेजा होता। वहीं उल्टे सरकार ने अदालत द्वारा 9 साल बाद बरी हुए 6 मुस्लिम युवकों नौशाद, जलालुद्दीन, मोहम्मद अली अकबर हुसैन, शेख मुख्तार, अजीजुर्रहमान सरदार और नूर इस्लाम मंडल के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर दी है। जिसकी सुनवाई की तारीख 31 जनवरी 2017 को नियत है।

रिहाई मंच अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी ऐसी पत्रिकाओं के जरिए मुसलमानों को बरगलाने की कोशिश कर रही है। जिसके खिलाफ रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, जफरयाब जीलानी, अपर महाधिवक्ता, ‘नई उमंग’ के संरक्षक श्री नवनीत सहगल, सुधीश कुमार ओझा, प्रकाशक, डाॅ आरएस पांडेय, सम्पादकीय सलाहकार, सैय्यद अमजद हुसैन सम्पादकीय सलाहकार, सैय्यद वजाहत हुसैन रिजवी, निगरां, सुहैल वहीद, सम्पादक को पार्टी बनाते हुए कानूनी नोटिस भेजा है। जिसमें आरोप लगाया गया है कि पुस्तक द्वारा सबने एक राय से साजिश करके सपा को राजनीतिक लाभ पहंुचाने के लिए राजकीय धन का जिसके वे न्यासी हैं, राजकीय कार्य से अतिरिक्त व्यय करके न्यास भंग किया है। नोटिस के जरिए सभी से सामूहिक रूप से तथा अलग-अलग स्पष्टीकरण मांगी गई है। जिसके न मिलने पर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने और विधिक कार्यवाई कर प्रकाशन में होने वाले व्यय को उनसे वसूलने और राजकीय कोष में जमा कराने और इस प्रक्रिया में होने वाले खर्च को उनसे वसूल करने की बात कही गई है।

लखनऊ रिहाई मंच के महासचिव शकील कुरैशी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सपा ने न सिर्फ वादा खिलाफी की है बल्कि ऐसे झूठे दावे करके मुसलमानों के जख्म पर नमक छिड़कने का काम किया है। जिसका खामियाजा उसे चुनाव में भुगतना पड़ेगा। श्री कुरैशी जिनका पिछले दिनों भोपाल फर्जी एनकांउटर के खिलाफ धरना देते वक्त पुलिस ने हमला करके हाथ तोड़ दिया था, ने कहा कि मुसलमानों को बरगलाकर सपा के लिए वोट दिलवाने का काम करने वाले का तो जमीर तभी बिक गया था जब उन्होंने बाबरी मस्जिद को चांदी की तश्तरी में रखकर विहिप को सौंप दी थी। जिसके एवज में उनको माडल हाउस में रामभवन नाम की एक शानदार कोठी विहिप ने बतौर तौफा सौंपी थी। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुसलमान सपा के 5 साल के मुस्लिम विरोधी शासन मंे 300 से ज्यादा हुए दंगों का हिसाब मांगने जा रहा है। 

नजीब के लिए इन्साफ मांग रहे एएमयू छात्रों पर सपाई पुलिस के हमलों ने खोली विकास अभियान की पोल 

अलीगढ : जेएनयू के लापता छात्र नजीब के लिए अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों के इन्साफ मार्च पर मार्च उत्तर प्रदेश की सांप्रदायिक सपा सरकार के बर्बर पुलिसिया हमले की रिहाई मंच ने घोर निंदा की है। अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी से छात्रों का जनसैलाब नजीब के लिए इंसाफ मार्च की शक्ल में शुरू हुआ। यह मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण था। छात्रों की मांग थी की नजीब को वापस लाया जाये और उसपर हमला करने वाले एबीवीपी के गुंडों पर कार्यवाही की जाये| छात्रों ने रेल रोकने का ऐलान किया था। उत्तर प्रदेश की पुलिस द्वारा पहले तो छात्रों को यूनिवर्सिटी कैंपस में ही रोकने की कोशिशें की गयी और बाब-ए-सय्यद पर भारी पुलिस और आर.ए.एफ बल लगा दिया गया लेकिन छात्रों के शांतिपूर्ण जनसैलाब को रोका नहीं जा सका। छात्रों द्वारा निकाले  इन्साफ मार्च को बरगलाने में जब गए सपा सरकार की सांप्रदायिक पुलिस नाकाम रही तो अपनी तीन नाकाम कोशिशों के बाद आगे बढ़ रहे छात्रों पर पुलिस ने हमला कर दिया।

बाब ए सय्यद से निकलकर छात्र का जनसैलाब घंटाघर पहुँच गया जहाँ उत्तर प्रदेश की  सांप्रदायिक सपा सरकार की पुलिस ने छात्रों पर वाटर कैनन का प्रयोग किया और हमला कर दिया। इस बर्बर पिटाई में बहुत से छात्र घायल हुए। पुलिस ने मार्च में शामिल छात्राओं को भी नहीं बख्शा और उन पर भी लाठियां बरसाईं। इस बर्बर पिटाई के बाद नजीब के लिए इन्साफ मांग रहे छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया| 

रिहाई मंच इस पुलिस कार्यवाही के लिए सपा और भाजपा के नापाक और सांप्रदायिक गठजोड़ को जिम्मेदार मानता है। रिहाई मंच के मोहम्मद आरिफ ने कहा कि सपा सरकार का विकास एक जुमला भर है। पहले मदसों के छात्रों को आतंकवादी बताकर फर्जी फंसाया जाता था अब यह मदरसों से बढ़कर जेएनयू और एएमयू जैसे संस्थानों में पढने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। रोहित वेमुला और नजीब जैसों को जब पढने की आजादी और सुरक्षा नहीं है तो क्या उन्हें जेलों में डालकर सपा सरकार विकास करना चाहती है। इन्साफ मांग रहे एएमयू छात्रों को उत्तर प्रदेश  पुलिस द्वारा यह कहना कि तुम्हे भी नजीब बना देंगे, सपा की सामाजिक न्याय और विकास के दावों की पोल खोल देता है। सपा सरकार की मौजूदा कलह को उन्होंने दरअसल अखिलेश और शिवपाल के बीच लूट को लेकर झगड़ा बताया जिसका विकास से कोई लेना देना नहीं है।

रिहाई मंच के साथी और एएमयू के शोध छात्र अमानुल्लाह ने कहा कि आनेवाले २०१७ चुनाव में सपा सरकार को हर एक लाठी का हिसाब देना होगा और एएमयू छात्रों पर पड़ी हर एक लाठी सपा के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। रिहाई मंच के साथी और एएमयू के शोध छात्र सलमान हबीब ने कहा कि भोपाल फर्जी एनकाउंटर के विरोध में लखनऊ में राजीव यादव पर पुलिसिया हमला और एएमयू छात्रों पर हमला अखिलेश के सारे विकास दावों की पोल खोल देता है। अखिलेश के लिए विकास का मतलब अपना विकास है जिसमें लूट के हिस्से को लेकर उनकी पार्टी में खुद घमासान मचा हुआ है। इस में दलित और मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्हें केवल झूठ, जेल और लाठियां, और दंगे ही मिले हैं। नजीब के लिए इन्साफ मार्च में एएमयू छात्रसंघ के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे साथ में रिहाई मंच अलीगढ के मोहम्मद आरिफ, सलमान हबीब, अमानुल्लाह, तौसीफ खान, दाऊद इब्राहीम आदि भी इस मार्च में शामिल हुए।

द्वारा जारी :
रिहाई मंच
लखमऊ / अलीगढ़



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