कैंसर के शिकार पत्रकार वैभव वर्धन की आखिरी तस्वीर और आखिरी बातें!

Gagan Sethi-

जब हम वैभव को देखने पीजीआई चंडीगढ़ गए थे तो बातों-बातों में उसने बताया कि उसके कई करीबी (जो अब मंत्री, मुख्यमंत्री हैं) मदद की पेशकश कर रहे हैं। हमने कहा, इस वक्त पैसे की मदद लेने में कोई हिचक मत करो क्योंकि कैंसर के इलाज में पैसा पानी की तरह बह रहा होगा। ये सुनकर कहीं खो गया था वैभव।

वैभव वर्धन
गगन सेठी और वैभव वर्धन

फिर बोला, ‘किस्मत जिंदगी के ऐसे मोड़ पर ले आई है, जहां लगता है सिर्फ और सिर्फ सेहत ही सब कुछ है। मेरे पास नौकरी नहीं थी। फिर अचानक एक CM के मीडिया सलाहकार बनने का ऑफर आया। मुझे लगा, अब सब कुछ पटरी पर आ जाएगा लेकिन जिस दिन CM ऑफिस से जॉयनिंग के लिए फोन आया, उसी दिन कैंसर का पता लगा। अब तो पैसे का मोह ही खत्म हो गया है।’

वैसे पैसे का मोह उसे कभी था ही नहीं। कैंसर की जंग लड़ते-लड़ते वैभव आज सुबह चला गया। आजतक में उसके साथ सालों तक काम किया। इस पेशे में कम ही लोग हैं जो अपनी गलती हंसकर मान लेते हैं और दूसरों के सिर नहीं थोपते। वैभव उन्हीं में से एक था। पिछले कुछ महीने उसने बहुत पीड़ा झेलते हुए बिताए थे। अब जहां भी रहे खुश रहे। बाकी परिवार के लिए तो जिंदगी भर की मुसीबत है ही।



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