थाने से उड़ गई रिपोर्टर की तहरीर, दुबारा गुहार, फिर भी पुलिस खामोश

वाराणसी : अभी पिछले माह की ही बात है, जब एक लोकल चैनल डेन काशी के लंका-भेलूपुर प्रतिनिधि को ठिकाने लगाने की धमकी मिली थी. सभी मामलो की तरह यह भी मामला पंहुचा थाने लेकिन इस मामले में हुआ कुछ अलग. 

अधिकांश मामलों में तहरीर लेने के लिए पुलिस पीड़ितों को थाने के इतने चक्कर लगवा देती है कि आम जनता न्याय के पहले अड्डे पर ही थक के हार मान जाती है या फिर पुलिस खुद पैसे लेकर आरोपी के पक्ष में पीड़ित को ही इतना धमका देती है कि पीड़ित शांत हो जाता है. लेकिन पत्रकार को जब जान से मारने की धमकी मिली और जैसे ही यह बात पहुंची अन्य पत्रकारों तक, वे थाने पहुंच गए।

उसके बाद लंका थाने ने तहरीर ली और थानाध्यक्ष रमेश यादव ने आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ने का आश्वासन  भी दिया लेकिन जब सप्ताह भर बाद पीड़ित पत्रकार ओमकारनाथ ने थाने पहुंचकर एसओ से यह जानकारी हासिल करनी चाही कि क्या आरोपी पकड़ा गया तो एसओ को शर्म भी नहीं आई। कहा कि आप की तहरीर गायब हो  गयी है। आप दूसरी तहरीर दे दे. पत्रकार ने तुरंत दुबारा तहरीर भी दे दी लेकिन फिर भी पुलिस एक्शन में नहीं दिखी।

क्या पुलिस अब किसी अप्रिय घटना का इन्तजार कर रही है? हालाँकि तहरीर गायब होने का यह कोई पहला मामला नहीं। समय समय पर ऐसी सूचनाएं मिलती रहती हैं। अब यहाँ पुलिस कार्यप्रणाली पर उंगली उठना लाजिमी है कि जब छोटे से मामले में पुलिस के हाथ आरोपी तक नहीं पहुंच पाए तो इलाके में अपराधियों के हौसले तो बुलंद होंगे ही। 

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनो ओमकार नाथ को जान से मारने की धमकी दी गई थी। घटना से लंका पुलिस थाने के एस ओ को मौखिक रूप से अवगत कराने के साथ ही रिपोर्ट भी दर्ज कराने को तहरीर दी गई थी। बताया गया था कि मोबाइल नंबर 8931893649 से ओमकार के मोबाइल नंबर 8423182294 पर किसी ने फोन कर पहले तो उनके बारे में जानकारी ली। नाम-पता पूछा, उसके बाद गंदी-गंदी गालियाँ देने लगा। इस पर ओमकार ने ऐतराज जताया तो फ़ोन करने वाले ने धमकाते हुए कहा कि तुम बहुत तेज़-तर्रार रिपोर्टर बनते हो। सुधार जाओ वरना अभी तो सिर्फ समझा रहा हूं। नहीं माने तो तुम्हे जान से हाथ धोना पड़ेगा। उस समय ओमकार लंका पर एक घटनास्थल पर मौजूद थे। वहां एसओ लंका भी उस समय मौजूद थे। 

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