रिपब्लिक टीवी की महिला पत्रकार का यह चेहरा स्तब्ध करता है!

Prakash K Ray : जिस तरह से फ़ेक न्यूज़ और बुली चैनल रिपब्लिक की रिपोर्टर माइक छीनने झपट रही है, उसे देख कर लगता है कि किसी दिन लफंगे एंकर और लुम्पेन रिपोर्टर तार से गला घोंट कर गेस्ट/पैनलिस्ट की हत्या कर डालेंगे. दूसरे घामड़ चैनल टाइम्स नाउ वाली रिपोर्टर तुलनात्मक रूप से शक्तिशाली लग रही है, अन्यथा खींचतान में उस भले आदमी को चोट भी आ सकती थी. 

Dilip Khan : रिपब्लिक टीवी के लिए Shehla Rashid की निंदा करने वालों को वो वीडियो ज़रूर देखना चाहिए, जिसमें रिपब्लिक की पत्रकार प्रद्युम्न के पिता की कॉलर से लेपल माइक झटक देती है। रायन इंटरनेशनल स्कूल अभी मीडिया के लिए बिकाऊ माल है। कंसर्न वगैरह की दलील मत दीजिएगा, मीडिया शुद्ध रूप से इस घटना को बेच रहा है। TIMES NOW पर प्रद्युम्न के पिता लाइव कर रहे थे, रिपब्लिक की रिपोर्टर भी वहीं खड़ी थी। चैनल से फोन आया होगा कि लाइव चाहिए। एक संवेदनशील पत्रकार क्या करता/करती?  टाइम्स नाऊ के लोगों से वो लड़की कहती कि उसे भी लाइव लेना है, थोड़ा शॉर्ट रखें। लेकिन रिपब्लिक की रिपोर्टर ने क्या किया? लाइव के दौरान झपट्टा मारकर प्रद्युम्न के पिता के कॉलर से माइक खींचने लगी।  टाइम्स नाऊ और रिपब्लिक की दोनों लड़कियां कुश्ती लड़ने लगीं। यही संवेदनशीलता है?  अब ये मत कह दीजिएगा कि ये एक रिपोर्टर की चूक या ग़लती है और इसे उसी चैनल के दूसरे रिपोर्टर के साथ कंपेयर नहीं करना चाहिए। ये बेसिकली ट्रेनिंग का मामला है जो रिपब्लिक नाम की संस्था और इसके डॉन अर्नब गोस्वामी ने सभी स्टाफ को दी है।  रिपब्लिक टीवी के पक्ष में सिर्फ़ उसी दिन आऊंगा, जिस दिन डिसेंट के लिए सरकार उसपर कोई कार्रवाई करेगी। वरना सिविल सोसाइटी के लोग इनको गरियाए, लतियाए मैं उसे “‘मीडिया” और “मीडिया की आज़ादी” पर हमला नहीं मानूंगा।  सारा खेल आइडियोलॉजिकल है। रिपब्लिक चैनल बेसिकली गुंडई कर रहा है। असंवेदनशील और तलुवाचाट है।

संबंधित वीडियो ये है :

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश के. रे और दिलीप खान की एफबी वॉल से.

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‘न्यूज़ नेशन’ अपने रीजनल चैनल ‘न्यूज़ स्टेट’ के स्ट्रिंगरों से करवा रहा अवैध उगाही !

लखनऊ : न्यूज़ नेशन का रीजनल चैनल न्यूज़ स्टेट यूपी अपने स्ट्रिंगरों से अवैध उगाही करवा रहा है। नहीं करने पर उत्पीड़ित किया जा रहा है। 

बताया गया है कि चैनल में बैठे कुछ लोग अब स्ट्रिंगरों से उगाही करवा रहे हैं वो भी विज्ञापन के नाम पर। जिन स्ट्रिंगरों को ये महीने का पैसा भी ठीक से उनकी मेहनत अनुसार देते, उन स्ट्रिंगरों से 25 -25 लाख के विज्ञापन मांग रहे हैं और जो नहीं दे रहा, उसको निकाल देने की धमकी रोज दी जाती है। पिछले 15 दिनों में इन धमकियों के चलते 5 से 6 दुखी स्ट्रिंगर चैनल को अलविदा कह चुके हैं। 

सौरभ उपाध्याय नाम के एक शख्स विज्ञापन की पूरी कमान संभाले है और सुबह शाम फोन काल करते हैं। इतना ही नहीं, व्हट्सप्प ग्रुप तक बनाकर सुबह-शाम विज्ञापन का दबाव बनाया जा रहा है और ऊपर बैठे लोग ये सब तमाशा बंद आँखों से नहीं खुली आँखों से देख रहे हैं। आज भी चैनल के एक व्हाट्सप्प ग्रुप पर कई लोगो ने सीनियर्स से अपनी पीड़ा बताते हुए चैनल को अलविदा कह दिया मगर ऊपर वालों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। उल्टे एक झटके में इस्तीफा मंजूर कर लिया और बेचारे को ग्रुप से आउट कर दिया। 

जो कर्मी इतनी मेहनत करते करते चैनल को नंबर एक पोजीशन पर पहुंचाये हैं, आज उन्ही को लाखों रुपए के विज्ञापन के लिए तंग किया जा रहा है। महीने में पांच हज़ार तक मेहनत का पैसा देते हुए इनकी घिग्घी बंध जा रही है और विज्ञापन चाहिए इनको लाखों रुपए। चैनल ठीक ठाक स्तिथि में चल भी रहा है मगर उसके बाद भी पूरा दबाव बनाया जा रहा है।

अपुष्ट तौर पर बताया गया है कि इसी महीने एक साथ करीब 50 स्ट्रिंगर इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं। कोई भी स्ट्रिंगर 25  लाख रुपए के अगर विज्ञापन इकट्ठा कर सकता तो खुद की विज्ञापन एजेंसी खोल लेता और 10 से 20 हज़ार रुपए महीना कमा लेता। चैनल प्रबंधन स्ट्रिंगर की मेहनत का पूरा पैसा नहीं देता है और विज्ञापन का कमीशन तो दूर की बात। 

एक दुखी स्ट्रिंगर अपने पत्र में लिखता है कि ”अरे आप लोग ज़ी संगम, इ टीवी, संचार प्लस से आगे निकलने की बात कह रहे हैं मगर इन तीनों चैनल में विज्ञापन तक का दबाव नहीं है। रणजीत कुमार, सौरभ उपाध्याय, आप जान लो कि एक साथ सैकड़ों स्ट्रिंगरों की बद्दुआ मत लो। कभी जमीन पर आकर ये देख लो कि आपका स्ट्रिंगर कैसे आपके चैनल को नंबर एक बनाने के लिए हर वक़्त मरता है और आप लोग एसी में बैठकर उनपर विज्ञापन का दबाव बनाते हो। न्यूज़ नेशन के चेयरमैन से निवेदन है कि यहाँ बैठे लोगो को समझाओ वर्ना यूपी और यूके के सैकड़ों स्ट्रिंगर एक साथ इस्तीफा देकर मोर्चा खोल देंगे।”

एक दुखी स्ट्रिंगर  

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प्रताड़ना से क्षुब्ध न्यूज नेशन के रिपोर्टर ने दिया इस्तीफा, फटकार मिली कि विज्ञापन नहीं दे सकते तो फांसी पर लटक जाओ !

मऊ (उ.प्र.) : यहां न्यूज़ स्टेट/न्यूज़ नेशन के प्रतिनिधि तैनात रहे रविन्द्र माली ने डेस्क इंचार्ज (इनपुट हेड), नोएडा को अपना इस्तीफा भेज दिया है। त्यागपत्र में उन्होंने अपनी आर्थिक हालत बयान करने के साथ ही बताया है कि विज्ञापन विभाग के लोग कह रहे हैं, एड नहीं दे सकते तो फांसी पर लटक जाओ। 

उन्होंने अपने त्यागपत्र में डेस्क इंचार्ज को बताया है कि ”आपके प्रतिष्ठित समाचार चैनल न्यूज़ स्टेट उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड में बतौर संवाददाता मऊ जिले में तब से हूं, जब इसके ‘अल्फ़ा न्यूज़’ नाम से आने की तैयारी हो रही थी । फिर नेशनल से लेकर रीजनल तक अभी तक पूरी ईमानदारी से काम किया है। विज्ञापन विभाग द्वारा मुझसे पंचायत चुनाव में 24 लाख रुपये के विज्ञापन की डिमांड की गई। मैं एक स्ट्रिंगर हूँ और स्ट्रिंगर का कोई नहीं होता। वो अपना सब कुछ दांव पर लगाकर खबर कलेक्ट करके अपने चैनल पर प्राथमिकता के साथ भेजता है लेकिन जब उसके साथ कोई घटना होती है तो उसे कोई भी पूछने वाला नहीं होता। 

”चैनल से एक आदेश पर स्ट्रिंगर अपना खाना छोड़कर सबसे पहले खबर पर दौड़ता है। हर खतरों से अनजान रास्ते में क्या होगा, वो घर सही सलामत अपने पारिवार में लौटेगा की नहीं, ये सोचते हुए सक्रिय हो जाता है। इस कमरतोड़ महंगाई में एक स्ट्रिंगर अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करता है, सर सब जानते है। पत्रकारिता में हमें 10 साल हो गए। इसके आलावा न कही नौकरी की और न ही कहीं कोई साइड में आज तक कोई दूसरा काम। एक बेटी 11 साल की और एक बेटा 10 साल का है, जिसकी पढाई-लिखाई बड़ी मुस्किल से हो रही है । 

”आप के चैनल से करीब 5 हजार और समाचार प्लस भी देखता हूं, इसलिए वो भी पांच हजार रुपए देता है। इस बात को आप सभी जानते हैं। विज्ञापन के लिए धमकी दी जा रही है कि नहीं  दोगे तो निकाल दिए जाओगे। कहते हैं, ख़बर भेज कर मऊ से कौन सा क्रांति लिख दोगे। 24 लाख का एड नहीं दे पाओगे तो फांसी लगाकर मर जाना। खबर से नहीं, एड से अपना भविष्य बनाओ। खबर में क्या रखा है। 

”सर बहुत कुछ कहा जा रहा है। बहुत दिनों  से टार्चर हो रहा है। ये हमारे साथ ही नहीं, सभी के साथ हो रहा है। कोई कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है क्योंकि डर है कि कहीं ऐसा न हो कि हमें निकाल दिया जाए। हम एड के लिए पूरी कोशिश करते हैं और जो मिल जाता है, हम देते भी हैं। 15 अगस्त पर भी 10 एड लिया हूं बड़ी मुश्किल से । दो दिनों से सोया नहीं हूं। बहुत परेशान हूं। यहाँ तक कि मै सर दर्द का मरीज बन गया हूं। आप लोगों का बहुत प्यार और आशीर्वाद मिला। 

”मैं कहीं भी रहूं, आप लोगों का सदैव आशीर्वाद बना रहे। ये मेल करते वक्त हमारा शरीर कांप रहा है और आँखों से आंसू निकल रहे हैं। फिर भी। अतः श्रीमान निवेदन के साथ कहना है कि आपके चैनल से कार्यमुक्ति की इच्छा प्रकट करते हुए अपने पद से त्याग पत्र देना चाहता हूँ । आप प्रार्थना पत्र पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए प्रार्थी का त्याग पत्र स्वीकार करने की कृपा करे।  

रविन्द्र माली, मऊ।” 

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जी न्यूज से निकाले गए 26 स्ट्रिंगर और रिपोर्टर जाएंगे कोर्ट

जी न्यूज के 26 स्ट्रिंगरों को पूर्व सूचना और उनके बकाया देय के भुगतान के बिना हटा दिया जाना चैनल प्रबंधन को भारी पड़ सकता है। बताया गया है कि चैनल हेड दिलीप तिवारी, इनपुट हेड विकास कौशिक और भोपाल ब्यूरो प्रमुख आशुतोष गुप्ता ने षड्यंत्र पूर्वक हटा दिया। स्ट्रिंगरों ने 31 जुलाई तक खबरें भेजी थीं, लेकिन यह कहकर होल्ड रखा गया कि खबरें नहीं चलाई गईं। वहीं खबरें अन्य एजेंसी से लेकर प्रसारित की जाती रहीं। 

मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के  रीजनल न्यूज चैनल जीएमपी सीजी में उठापठक का दौर जारी है , चैनल हैड राजेन्द्र शर्मा के इस्तीफे के बाद से ही चैनल में तानाशाही का दौर प्रारम्भ हो गया था। सबसे पहले नोएडा डेस्क पर कार्य करने वालो की रवानगी हुई, उसके बाद भोपाल और इंदौर के रिपोर्टरों को निशाना बनाया गया। अब  26 स्ट्रिंगरों पर गाज गिरी है, जिन्हें चैनल ने बिना कारण बताये एकाएक हटा दिया और उन्हें नोएडा आफिस में चैनल आईडी जमा करने का फरमान एचआर द्वारा मेल से भेजा गया। 

चैनल में किये जा रहे बदलाव का खामियाजा ईमानदार और कर्मठ लोगो को उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार हटाये गए लोगों के स्थान पर अपने मोहरे बैठाने की तैयारी की जा रही है।  जीएमपी सीजी में किये जा रहे फेर-बदल और चैनल में चल रही आंतरिक कलह की तमाम जानकारी चैयरमेन सहित एक्सेल ग्रुप से जुड़े सभी पदाधिकारियों को भेजी जा चुकी है, जिसकी जाँच करने एचआर टीम भोपाल भी पहुंची थी, लेकिन रिजल्ट उन्ही के पक्ष में गया जो तानाशाही पर आमादा हैं।

मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ से भी स्टिंगर हटाये दिए गए है। प्रताड़ित रिपोर्टरों को गत चार अगस्त को मेल से सूचित किया गया कि उनको एक जून 2015 से हटाया गया है। सभी स्ट्रिंगर प्रबंधन के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर चुके हैं। उनका आरोप है कि बिना पूर्व सूचना और पेमेंट के उन्हें अकारण कैसे हटा दिया गया। 

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‘बजंरगी भाईजान’ वाले असली रिपोर्टर चांद नवाब ने बच्चे को पीटा, वीडियो वायरल

फिल्म ‘बजंरगी भाईजान’ से चर्चित हुए पाकिस्तान के पत्रकार चांद नवाब का इन दिनो वायरल हो रहा एक वीडियो उनकी खूब छीछालेदर करा रहा है। एक रिपोर्ट लाइव प्रसारित होने के दौरान कैमरे के सामने आने पर वह एक बच्चे पर थप्पड़ बरसाने लगते हैं। 

गौरतलब है कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी के किरदार वाले ये वही चांद नवाब हैं, जिनका वो वीडियो यू-ट्यूब पर वायरल हुआ था, जिसमें वह पाकिस्तान के किसी रेलवे स्टेशन पर ‘ईद’ की रिपोर्टिंग कर रहे होते हैं। 

विगत तीन अगस्त को यू-ट्यूब पर पोस्ट इस वीडियो में कराची (पाकिस्तान) के चांद नवाब लाइव रिपोर्टिंग करने के दौरान उस समय गुस्सा उठते हैं, जब कैमरे पर लाइव न्यूज प्रस्तुत करने समय एक बच्चा सामने आ जाता है। 

https://www.youtube.com/watch?v=oTxMgJUogXU

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बाबूलाल गौर ने इंडिया टीवी के रिपोर्टर से कहा – जाओ यहां से, मैं तुम्हे पसंद नहीं करता

भोपाल : प्रायः अपनी बेतुकी टिप्पणियों, बयानों से सुर्खियों में रहने वाले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर एक टीवी रिपोर्टर से उलझ पड़े और उन्होंने उसको लगभग अपने घर से भगाते हुए कहा कि तुम जाओ, यहां से मुझे तुमसे नफरत है, आज के बाद मेरे घर पर मत आना।

मामला दरअसल ये है कि इंडिया टीवी के भोपाल ब्यूरो के रिपोर्टर अनुराग उपाध्याय मंत्रिमंडल विस्तार से संबंधित विषय पर बाबूलाल गौर से बाईट लेने गये थे और उन्होंने गौर से यह पूछा था कि प्रस्तावित मंत्रिमंडल में बुजुर्गों को शायद जगह नहीं मिलेगी। क्या इस संबंध में आप हाईकमान से बात करेंगे। गौर इस पर आगबबूला हो गये और अनुराग उपाध्याय से कहा कि तुम जाओ यहां से, मुझे तुमसे बात नहीं करनी। मैं तुमको पसंद नहीं करता। आज के बाद मेरे घर मत आना।

दरअसल अनुराग उपाध्याय से गौर का यह गुस्सा तब से है, जब वे मुख्यमंत्री थे और अनुराग ने ही शगुफ्ता शमीन वाले केस की खबर की थी। इसके बाद गौर को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और शिवराज मुख्यमंत्री बने थे।

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जान लेने के इरादे से जनसंदेश टाइम्स के रिपोर्टर पर हमला

लखनऊ : जनसंदेश टाइम्स के रिपोर्टर सलाहउद्दीन शेख पर पिछले दिनो जान लेने की नीयत से हमला किया गया। स्थानीय लोगों के जमा हो जाने से उनकी जान बच गई। उन्होंने घटना के संबंध में हजरतगंज कोतवाली पुलिस को लिखित रूप से अवगत करा दिया है।

रिपोर्टर सलाहउद्दीन शेख ने पुलिस को बताया है कि वह रोजाना की तरह जब अपनी ड्यूटी समाप्त कर कसमंडा स्थित कार्यालय से घर लौट रहे थे, ऑफिस के गेट पर बाहर निकल कर अपने साथी आशीष यादव से बातचीत करने लगे। इसी दौरान इंदिरा नगर निवासी अशोक चतुर्वेदी अपने दर्जन भर साथियों समेत वहां आ धमके और उन्होंने ललकारते हुए कहा कि इसे जान से मार डालो। 

उन्होंने बताया है कि अशोक ने अपने साथियों की मदद से उन पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। उनके शोर मचाने पर कार्यालय और आसपास के लोग मौक पर इकट्ठे हो गए। इसके बाद हमलावर जान से मारने की धमकी देते हुए वहां भाग खड़े हुए। उन्होंने संदेह जताया है कि पत्रकार हिमांशु त्रिपाठी और संजय त्रिपाठी के कहने पर उनकी जान लेने की कोशिश की गई। उन्होंने घटना की रिपोर्ट दर्ज करने की अपील की है।   

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राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर ने चारागाह की जमीन को पत्नी के नाम आवंटित करा लिया

अजमेर (राजस्थान) : जिले के सावर क्षेत्र में राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर सत्यनारायण कहार पर लाखों रूपयों की बेशकीमती चारागाह भूमि को अपने नाम आवंटित करवाने का आरोप लगा है। सत्यनारायण पूर्व में ग्राम पंचायत सदारा का उपसरपंच रह चुका है। तब भी यह पत्रिका का ही रिपोर्टर था।

सत्यनारायण पर आरोप हैं कि इसने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए मिलिभगत कर ग्राम सदारी में देवनारायण मंदिर के रास्ते पर स्थित जमीन को अपनी पत्नी के नाम आवंटित करवा लिया। इसके विरोध में सोमवार को ग्राम सदारी व भोपों का झोपड़ा के ग्रामीणों ने उपखण्ड मुख्यालय केकड़ी पर प्रदर्शन किया और एसडीएम को कलक्टर के नाम का ज्ञापन भी सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त जमीन पर उनके मवेशी चारा चरते हैं और यह देवनारायण भगवान के मंदिर की जमीन है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि यह आवंटन निरस्त नहीं किया गया तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।

एक पत्रकार द्वारा भेजे पत्र पर आधारित खब

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पुलिसकर्मी ने अपने पैंट की जीप खोल पत्रकार को जलील किया

केरल : यहां के एक पत्रकार से अभद्रता कर रहे पुलिस कर्मी ने अपने पैंट की ज़िप खोल दी. मीडिया में मामला सुर्खियों में आने पर पता चला कि पुलिसकर्मी एक्सिडेंट के बाद एक व्यक्ति को पीट रहे थे। पत्रकार मोहम्मद रफी ने उसे अपने कैमरे में कैद कर लिया। इस पुलिस वाले आग बबूला हो गए। 

मोहम्मद रफी के मुताबिक पुलिस वालों ने उसके साथ ऐसी गंदी हरकत उस वक्त की, जब दुर्घटना के बाद एक व्यक्ति को पुलिस वाले पीट रहे थे। उन्होंने उसे रिकॉर्ड कर लिया। पुलिस वाले जिसे पीट रहे थे, उसके कपड़े भी फाड़ दिए।

जब पुलिस कर्मियों ने रफी से वीडियो अपने हवाले करने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने रफी को प्रताड़ित किया। वह हरकत भी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने उल्टे रफी के ही खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। 

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मंत्री के टुकड़ों पर बिके जनसत्ता, अमर उजाला, जागरण, ईटीवी, हिन्दुस्तान और ज़ी न्यूज़ के रिपोर्टर

गोंडा : कई प्रदेशों में पत्रकारों को ज़मीन या फ्लैट दिया गया है, जो किसी न किसी स्कीम के तहत मिला है मगर यहां तो अंधी कट रही है। जिले के दबंग मंत्री विनोद कुमार सिंह ऊर्फ पंडित सिंह ने जनसत्ता, जी न्यूज, जागरण आदि अखबारों के पत्रकारों का मुंह बंद रखने के लिए उनके सामने चार-चार बिसवा ज़मीन के टुकड़े फेंक दिए हैं। ज़मीन पर 28 गुणा 60 फीट के प्लाट काटकर उन पर उन के मकान भी बनने लगे हैं, जबकि उन सरकारी भूखंडों का अभी उनके नाम पट्टा तक नहीं हुआ है। पंडित सिंह के टुकड़ों पर मचल उठे पत्रकारों के नाम हैं – जानकीशरण द्विवेदी (जनसत्ता/पीटीआई), अरुण मिश्रा (अमर उजाला), धनंजय तिवारी, गोविन्द मिश्रा (दैनिक जागरण), देवमणि त्रिपाठी (ईटीवी), संजय तिवारी, कमर अब्बास (हिन्दुस्तान) और अम्बिकेश्वर पाण्डेय (ज़ी न्यूज़)। 

गोंडा : चारागाह की जमीन, जिस पर शुरू हो चुका है पत्रकारों के मकानों का निर्माण

इन आठों पत्रकारों को चारागाह की सरकारी जमीन दान में दे दी गई है। जिस ज़मीन पर पत्रकार भू माफिया की तरह कब्जा कर रहे हैं, वो जमीन असल में ग्राम समाज की  है और चारागाह के नाम पर खतौनी में दर्ज है। एक मंत्री की सह पर सरकारी ज़मीन के अवैध कब्जे के इस मामले पर प्रशासन ऑखें मूंदकर बैठा है। ग्राम प्रधान, लेखपाल और डीएम से स्थानीय लोगों ने इस बाबत शिकायत भी की मगर किसी भी अधिकारी के कान पर जूं तक नही रेंग रही है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और कानून को कानून के रखवालों ने ही ताक पर रख दिया है। उच्चतम न्यायालय ने सरकारी जमीनों पर कब्जो पर सख्त रुख अपनाते हुए देश के सभी राज्य सरकारों को दिशा निर्देश जारी कर रखा है कि यदि कही पर भी कोई सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा करने की कोशिश करे तो अबिलम्ब कार्यवाही करें । मगर गोण्डा में तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को दरकिनार कर उ.प्र. सरकार के मंत्री और गोण्डा जिला प्रशासन ही भूमाफिया के ज़मीन कब्जा करने में मदद कर रहा है। 

गोण्डा सदर के विधायक और प्रदेश सरकार के मंत्री विनोद कुमार सिंह ऊर्फ पंडित सिंह और गोण्डा के जिलाधिकारी अजय उपाध्याय की सह पर पत्रकार ही चारागाह की ज़मीन कब्जाने पर उतारू हैं। सुनने में तो ये भी आ रहा है कि मंत्री जी की खुद एक ज़मीन पर नज़र है, जो वह आसानी से बिना किसी रुकावट के हजम कर सकें, इसके लिए उन्होंने ये दांव खेला है। उच्चतम न्यायलय के आदेशों की धज्जियां उड़ रहीं हैं कुछ लोग सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के मामले की शिकायत अजय उपध्याय से की तो वे  पहले तो मामले से अन्जान बने लेकिन बाद में रटा रटाया राग अलाप दिया कि यदि जमीन कब्जे़ का मामला सामने आया तो भू माफिया को चिन्हित कर तुरंत जेल भेजा जायेगा। 

गोण्डा जिले का ये मामला ग्राम पंचायत जानकी नगर का है, जहाँ पर गाटा संख्या २०१ मि -५८० मि लगभग 9920 हेक्टेयर भूमि है जो चारागाह के नाम पर दर्ज है और वह बहराइच रोड पर स्थित कोको गैस एजेंसी के पीछे पुरवा माध्यमिक विद्यालय रानी पुरवा न्याय पंचायत जानकी नगर के ठीक सामने स्थित है। इस गाँव के ग्राम प्रधान शिवबहादुर पाण्डेय से दूरभाष नंबर 9415407083 पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह सरकारी भू अभिलेखो में चारागाह के रूप में दर्ज है मगर जब पत्रकार ही इसपर कब्जा करेंगे तो कोई क्या कर लेगा । लेखपाल ने तो कहा कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है।

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संपादक ने ना ढूंढा तिन पाइयां, इंटरव्यू में रिपोर्टर फेल

बहुत सोचा कि इस पोस्ट को लिखूं या न लिखूं। पर दिल नहीं माना, शेयर करता हूं। वाकया हमारे एक पत्रकार मित्र से जुड़ा है। इंटरव्यू देने गए थे, एक नामचीन संस्था में। एक नामी गिरामी संपादक ने इंटरव्यू लिया। भाई रिजेक्ट हो गए। वजह उनमें वह बात नहीं थी जो संपादक ढूढ़ रहे थे। अब वह संपादक तलाश क्या रहे थे सुनिए, इधर उधर के सवालों के बाद मुख्य सवाल-राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय एक ब़ड़े नेता के संदर्भ में –

संपादक- आप उन्हें जानते हैं.

रिपोर्टर- जी जानता हूं..

संपादक- तो फिर वह कितनी बार आपके घर और आप उनके घर खाना खाने गए

रिपोर्टर- सर ऐसी जान पहचान नहीं है। खबरों के सिलसिले में मुलाकात होती है और वह मुझे जानते हैं।

संपादक असंतुष्ट- फिर यही सवाल यूपी के एक कद्दावर नेता के बारे में (इस वक्त विपक्ष में हैं)। रिपोर्टर का जवाब फिर वही- परिचय है, एक दूसरे के घर पर खाना खाने वाली घनिष्ठता नहीं है।

नतीजा–पत्रकार मित्र बैरंग लौटा दिए गए। उनमें वह स्पार्क नहीं थी, जिसकी जरूरत संपादक ( अगर यह शब्द उनके लिए माकूल हो तो) को थी।

( जानबूझकर न संस्था का नाम लिखा और न नेताओं का, पर वाकया सौ फीसदी सच है)।

what a shame!! probably he needed a broker in disguise of a journalist

प्रांशु मिश्रा के एफबी वाल से

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छेड़खानी की खबर प्रसारित करने पर फंसा जी न्यूज रिपोर्टर, गिरफ्तारी की मांग, धरना-प्रदर्शन

उरई (उ.प्र.) : विकलांग से मारपीट और छेड़खानी की गलत खबर प्रसारित किए जाने के कारण जालौन ज़ी न्यूज़ के रिपोर्टर मनीष राज फंस गए हैं।

उनके खिलाफ बुंदेलखंड विकलांग जन संस्थान की ओर से जारी धरना-प्रदर्शन में संगठन के जिलाध्यक्ष अजय सिंह अहिरवार न कहा कि जब तक मनीष राज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल नहीं भेजा जाता है, धरना-प्रदर्शन चलता रहेगा। उधर, पीड़ित लड़की की माँ ने जिलाधिकारी कार्यालय में मनीष राज पर गुस्सा उतारते हुए कहा कि सुधर जाओ, नहीं तो चप्पलों से पिटाई होगी।

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न्यूज़नेशन के रिपोर्टर ने अन्य पत्रकारों पर निशाना साधा, वकील ने नोटिस भेजा

न्यूज़नेशन के रिपोर्टर मुज़्ज़ामिल दानिश ने सम्भल ज़िले के सभी पोर्टल न्यूज़ रिपोर्टरों पर मुकदमा लिखवाने की बात कही है, साथ ही सभी को फर्जी बताया है। न्यूज़ नेशन के तीन ज़िलों के रिपोर्टर दानिश ने पूरे सम्भल के पोर्टल न्यूज़ रिपोर्टरों को टारगेट कर लिया।

सच की चुगली करते स्क्रीनशॉट

उनके खिलाफ मुक़दमा लिखवाने की बात एक एसपी सम्भल के व्हात्साप ग्रुप में कही गई है। सभी पोर्टल न्यूज़ रिपोर्टर की लिस्ट भी एसपी सम्भल के ग्रुप में वायरल की गई। इस बात से पूरे ज़िले के पोर्टल न्यूज़ के रिपोर्टरों में न्यूज़ नेशन के रिपोर्टर के खिलाफ गुस्सा है। इसी बात से गुस्सा होकर स्पेशल न्यूज़ पोर्टल के रिपोर्टर ऐडवोकेट हर्षवर्धन ने न्यूज़ नेशन के रिपोर्टर मुज़्ज़ामिल दानिश को नोटिस भेजा है। अन्य न्यूज़ पोर्टल के रिपोर्टर भी उसके खिलाफ कार्यवाही की बात कर रहे हैं।

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अक्षय के परिजनों ने सीएम शिवराज से मदद लेने से किया इनकार

पिछले दिनो रहस्यमय हालात में जान गंवा बैठे न्यूज चैनल ‘आज तक’ के खोजी रिपोर्टर अक्षय सिंह के परिवार ने मध्य प्रदेश सरकार से किसी भी तरह की आर्थिक मदद लेने से साफ मना कर दिया है। उऩकी मांग है कि अक्षय की मौत की घटना की निष्पक्ष जांच हो। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अक्षय के परिजनों से मुलाकात कर हर तरह से मदद करने की बात कही थी। 

मुख्यमंत्री ने कहा था – मैं उनके परिवार के साथ खड़ा हूं. एक मां ने अपना बेटा खोया है और बहन ने अपना भाई। मैं उसकी कमी तो पूरी नहीं कर सकता, लेकिन मैं उनका दुख कम करने की कोशिश करूंगा। वो जैसा कहेंगे हम वैसा करेंगे। नौकरी को लेकर बहन से बात की है। भाई की तरह मैं उस बहन की देखरेख करने की कोशिश करूंगा। मेरी जिंदगी का मिशन है कि व्यापम का सच सामने आए।’

उधर, व्यापम घोटाले से जुड़ी नम्रता दामोर के मौत की फाइल पुलिस ने बंद कर दी है। 12 घंटे में ही पुलिस इस नतीजे पर पहुंच गई कि मौत की वजह में कुछ नया नहीं है। मध्य प्रदेश पुलिस ने फिर से मान लिया है कि नम्रता की मौत एक खुदकुशी है जबकि न्यूज चैनल ‘आजतक’ खुलासा कर चुका है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में नम्रता की मौत गला दबाने और दम घुटने से हुई है। 

मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले की के एक आरोपी उत्तर प्रदेश के देवरिया का प्रभात कृष्ण शर्मा के परिवार को अब उसकी जान की चिंता सताने लगी है। परिवारवालों को अंदेशा है कि कहीं वो व्यापम की बलि न चढ़ जाए। प्रभात कृष्ण शर्मा वो छात्र है, जो भोपाल में रहकर मेडिकल की तैयारी करता था। यह कैंडिडेट्स को पैसा लेकर भोपाल पीएमटी परीक्षा में पास करवाता था। वह दो साल से फरार है। 

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क्राइम रिपोर्टर का मोहताज़ बना प्रभात खबर

भागलपुर : बिहार के भागलपुर में प्रभात खबर में क्राइम रिपोर्टर की सीट सूनी हो गयी है। भास्कर की लॉन्चिंग से पत्रकारों की आवाजाही तो जारी थी ही, चर्चित क्राइम रिपोर्टर राकेश पुरोहितवार के भास्कर ज्वाइन करने के बाद प्रभात खबर में क्राइम रिपोर्टिंग के लिए कोई अन्य रिपोर्टर तैयार नहीं हो रहा है।

हिंदुस्तान के 2 पत्रकारों ने मोटी सैलरी के बावजूद प्रभात खबर का प्रस्ताव सिरे से ख़ारिज कर दिया है। कारण-ऑफिस का माहौल। इन दिनों क्राइम रिपोर्टिंग में दो सिटी रिपोर्टर के अलावे प्रोविएंस इंचार्ज को भी लगा दिया गया है। अब माना जा रहा है कि डेस्क  से किसी को रिपोर्टिंग में लगाया जा सकता है।

इन दिनों प्रभात खबर की सेहत भी बिगड़ी हुई है। युवा पत्रकार निलेश भगत पहले ही प्रभात खबर को इस्तीफा दे चुके थे। अंदरखाने की खबर तो ये है कि प्रभात खबर के संपादक राकेश और निलेश से खिन्न चल रहे हैं और हाउस में भी इन दोनों को लेकर सांठ-गांठ की चर्चा गर्म है। निलेश के इस्तीफे के बाद रिपोर्टर्स ने सैलरी बढ़ाने को लेकर प्रबंधन के पास प्रस्ताव रखा था। सैलरी बढ़ कर नहीं आने के बाद से माहौल कुछ ठीक नहीं है। कुछेक पत्रकार के और विदा होने की संभावना बनी हुई है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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पत्रकार की मां को फूंकने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन

बाराबंकी के कोठी थाने में पत्रकार की मां को जलाने के विरोध में पत्रकारों ने जिला पंचायत सभागार में बैठक कर आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ जमकर गुस्से का इजहार किया। घटना की पुरजोर मजामत की और एक मिनट का मौन रखकर मृतक की आत्मशांति के लिए दुआ की। 

इसके बाद पत्रकारों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया और आईजी लखनऊ जोन जकी अहमद, डीआईजी फैजाबाद मंडल विजय कुमार गर्ग, कमिश्नर फैजाबाद मंडल, डीएम बाराबंकी योगेश्वर राम मिश्रा, एसपी बाराबंकी से कार्रवाई की फरियाद की। पत्रकारों ने प्रशासन को ज्ञापन देकर तत्काल दोषी पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की। 

इस मौके पर सीनियर पत्रकार अखिलेश ठाकुर, सैयद रिजवान मुस्तफा, रणधीर सिंह सुमन, प्रदीप सारंग, बाबाजी, आसिफ हुसैन जर्नलिस्ट, आजमी रिजवी, परवेज, भूपेंद्र मिश्रा सहित बड़ी तादाद में जिले के पत्रकार मौजूद रहे। 

वरिष्ठ पत्रकार आजमी रिजवी के एफबी वाल से

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खबर का खंडन छापने के बाद हिंदुस्तान के रिपोर्टर ने माफी भी मांगी

पाकुड़ (झारखण्ड): पाकुड़ में हिन्दुस्तान समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ कार्तिक कुमार रजक ने पहले तो गलत खबर छापी लेकिन, खबर गलत होने के बाद वकील द्वारा प्लीडर नोटिस मिलते ही रिपोर्टर महोदय ने न सिर्फ खबर का खंडन निकाला बल्कि हाथ से लिख कर माफ़ी भी मांगी ।

वकील को इतने से संतोष न हुआ तो रिपोर्टर महोदय से टाइप करके माफ़ी मंगवाई । दरअसल, पत्रकार को लगा कि ये खबर छापकर पार्टी पर दबाव बनाकर उनसे कुछ जमीन की ब्लैकमेलिंग करेंगे लेकिन बात कुछ उल्टी हो गई । अब हिन्दुस्तान के ये पत्रकार महोदय खबर छापने के रोज हाथ-पांव जोड़ रहे हैं और रहम की भीख मांग रहे हैं ।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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निगम बोध घाट पर अक्षय का अंतिम संस्कार, मौत की एसआईटी जांच कराएंगे एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान

दिल्ली में रविवार दोपहर निगमबोध घाट पर आजतक के रिपोर्टर अक्षय सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अक्षय सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय माकन निगम बोध घाट पर पहुंचे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मौत की SIT जांच का भरोसा दिया है। शिवराज ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार मामले की जांच में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। 

दिल्ली में रविवार दोपहर निगम बोध घाट पर पत्रकार अक्षय सिंह की अंत्येष्टि में शामिल होने पहुंचे राहुल गांधी, सीएम केजरीवाल, डिप्टी सीएम सिसौदिया

‘आजतक’ लिखता है – ”अक्षय पिछले चार दिनों से मध्य प्रदेश की अलग-अलग जगहों पर जाकर व्यापम घोटाला कवर कर रहे थे। तीन लोगों की टीम इस घोटाले पर स्पेशल रिपोर्ट तैयार करने मेघनगर गई थी। अक्षय शनिवार को नम्रता डामोर के परिजनों का इंटरव्यू लेने मेघनगर गए। साल 2012 में नम्रता डामोर का नाम व्यापम घोटाले में आने के बाद उज्जैन में रेल पटरियों के पास उनका शव संदिग्ध परिस्थ‍ितियों में बरामद किया गया।

” नम्रता के पिता मेहताब सिंह डामोर ने कहा, ‘आज दोपहर घर पर एक रिपोर्टर सहित चैनल के तीन लोग आए थे। बातचीत होने के बाद संबंधित कागजात की फोटोकॉपी कराने हमारा एक परिचित बाजार गया। रिपोर्टर सहित चैनल के लोग जब उनके घर के बाहर फोटोकॉपी का इंतजार कर रहे थे, तभी अक्षय के मुंह से अचानक झाग निकलने लगा और उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें एक निजी अस्पताल भेज दिया गया.’

”हालांकि उस निजी अस्पताल से अक्षय को मध्य प्रदेश की सीमा से लगे गुजरात के दाहोद भी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सीएम शिवराज सिंह ने कहा, ‘गुजरात के दाहोद में डॉक्टरों की टीम पत्रकार का पोस्टमार्टम कर रही है, जिसकी वीडियोग्राफी भी हो रही है।’

”आजतक से फोन पर हुई बातचीत में सीएम चौहान ने कहा कि 4-5 दिन पहले तक यानी नरेंद्र कैलाश सिंह तोमर और राजेंद्र आर्य की मौत से पहले तक किसी भी आरोपी की मौत पर परिजनों ने संदिग्ध मौत की शिकायत नहीं की। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने एकाएक मीडिया में इस बात को उछाला है।

” मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि व्यापम घोटाले की जांच हाईकोर्ट के अंतर्गत है इसलिए उनकी सरकार इसमें कोई फैसला नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि इस घोटाले की सीबीआई जांच से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि सीएम जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘सीएम को सीबीआई जांच के लिए बस एक चिट्ठी लिखने की जरूरत है।

”कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने पत्रकार अक्षय सिंह की मौत पर संवेदना प्रकट की। साथ ही उन्होंने कहा कि संवाददाता की मौत संदिग्ध है। आजतक से फोन पर बातचीत में दिग्विजय ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘शनिवार सुबह 8 बजे अक्षय जब इंदौर से झाबुआ रवाना हुए थे तब वो स्वस्थ थे। फिर अचानक दो मिनट के अंदर उनके मुंह से झाग कैसे निकलने लगे? ट्विटर पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने इस सिलसिले में अक्षय को आगाह भी किया था।”

अक्षय सिंह की मौत के बाद एक बार फिर व्यापम घोटाले से जुड़े लोगों की मौतों के बढ़ते आंकड़े को लेकर बहस छिड़ गई है। प्रदेश कांग्रेस ने व्यापमं घोटाले से जुड़े व्यक्तियों की मौत को लेकर दावा किया है कि अब तक 33 नहीं, बल्कि 46 मौतें हो चुकी हैं। मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने एसआईटी को मृतकों की सूची सौंपते हुए गहराई से जांच की मांग की है। साथ ही जेल में बंद पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, सुधीर शर्मा, पंकज त्रिवेदी, नितिन, यूसी उपरीत की सुरक्षा को लेकर आशंका जाहिर की है। 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी अक्षय सिंह की मौत पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ट्विटर के जरिए संवेदना जताते हुए कहा, ‘युवा पत्रकार अक्षय सिंह की असमय मौत से मैं दुखी हूं। उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।’

My condolences on sad & untimely demise of young journalist Akshay Singh. My thoughts & prayers are with the bereaved family.

— Arun Jaitley (@arunjaitley)

आप नेता संजय सिंह ने भी ट्वीट करके मुख्यमंत्री शिवराज चौहान पर निशाना साधा। उन्होंने शिवराज की तुलना यमराज से करते हुए लिखा- ‘शिवराज या यमराज:व्यापम घोटाले में CM से लेकर राज्यपाल तक संदेह के घेरे में हैं।’

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सीनियरों को पांच लाख न देने पर रिपोर्टर को लॉकअप में रखा, सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगा जेल भेजवाया

सहरसा : वर्षों से दैनिक जागरण में सहरसा से रिपोर्टिंग करते रहे पत्रकार संजय साह का कसूर इतना था कि वह गलत तरिके से धन उगाही कर अपने सीनियरों की तीमारदारी नहीं कर पाते थे। उन्हें सैक्स रैकेट चलाने के आरोप में जेल भेज दिया गया।

लगभग 35 वर्षों से इनके पिता सहरसा शहर के गंगजला चौक पर रह रहे हैं। कभी इनका या इनके परिवार का किसी गलत व्यक्ति से संपर्क नहीं रहा। शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायियों में इनका नाम आता था लेकिन बेटे की समाज सेवा की चाह ने इस परिवार को बदनामी के भंवर में झोंक दिया है। लगभग 4 वर्षों से दैनिक जागरण में बतौर संवाददाता कार्यरत संजय को इसकी भनक तक नहीं लगी थी कि पत्रकारिता की आड़ में गलत तरीके से पैसा भी कमाया जाता है। जबकि ऐसा करने के लिए बार-बार संजय को बाध्य किया जाता था। 

समाज के सभी वर्गों के लोगों के साथ अपनापन, पारस्परिक मधुर संबंध तथा सामाजिक गतिविधियों व अध्यात्म में बढ़चढ़कर भाग लेने वाले इस परिवार को सदर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह और मीडिया के लोगों ने मिलकर ऐसा शर्मनांक इल्जाम लगाया, जिसके बारें में सोचने मात्रा से लोग कांपने लगते हैं। 19 अप्रैल 2015 रविवार इस परिवार के लिए काला दिन बनकर आया। दिन के तीन बजे संजय रिपोर्टिंग कर अपने आवास पर आराम कर रहे थे। उसी समय गैस्ट हाउस में एसडीपीओ प्रेमसागर के साथ सदर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह मय पुलिस कर्मियों के अंदर घुस आये। ठीक उसी समय गैस्ट हाउस के मैनेजर चिरंजीव रिसेप्शन पर ही बैठकर खाना खा रहे थे। पुलिस ने आते ही संजय कौन है! संजय कौन है! नाम लेकर गैस्ट हाउस का रजिस्टर अपने कब्जे में लेकर पूछताछ शुरु कर दी। 

संजय के सीनियरों के दबाव में पुलिस सभी नियमों को ताख पर रखकर बिना किसी सर्च वारंट के, बिना किसी गिरफ्तारी वारंट के संजय, गैस्टहाउस के मैनेजर तथा गैस्टहाउस में ठहरे महिला-पुरुषों को गिरफ्तार कर थाने ले गई। बिना कारण 60 घंटे तक थाने के लॉकप में बंद रखा। संजय से थाने पर पांच लाख देने की मांग की गयी। बोला गया, अगर पांच लाख नहीं दोगे तो सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगा देंगे। संजय ने पैसा देने से मना कर दिया। तब उस पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाकर 60 घंटे बाद रात के 7 बजे सीजीएम के ठिकाने पर हाजिर किया गया और महिलाओं को अल्पवास गृह तथा पुरुषों को जेल भेज दिया गया। 

मीडिया के लोगों ने पुलिस के साथ ही गैस्ट हाउस पर धवा बोला था। मीडिया कर्मियों ने गिरफ्तार किसी भी आदमी से कोई पूछताछ नहीं की। जिस तरह पुलिस ने आरोप लगाया, वही अखबार में छाप दिया। जिस महिला को गैस्ट हाउस में पकड़ उसका न मेडिकल जांच हुई नहीं, सीजीएम कोर्ट में उसकी गवाही की गयी, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस और कथित पत्रकारों ने चंद रुपये के लिए दामन पर दाग लगा दिया। क्या ऐसे कथित पत्रकारों से यह पूछा नहीं जाना चाहिए कि आपने उस पत्रकार पर आरोप मढ़ दिया, जो कई वर्षों से पत्रकारिता कर रहा था, वह कैसे सेक्स रैकेट चलाने लगा। इसके लिए दैनिक जागरण के स्थानीय और मुख्यालय में बैठे कुछ कथित पत्रकारों से स्पष्टीकरण नहीं लेना चाहिए।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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पढ़ाई-लिखाई से टीवी पत्रकारों का कोई वास्ता नहीं

ना जाने क्यों टीवी एंकर्स के चेहरों पर दो किस्म के भाव रहते हैं। अव्वल तो यह मान कर टीवी एंकर्स चलते हैं, सामने वाला शख्स मूर्ख है और मैं यह भी तय करूंगा कि सामने वाले को क्या बोलना है। दूसरे, कुछेक एंकर्स ऐसी अदा से कैमरे को ताकते हुए मेहमान पर मुस्कराते हैं मानो कह रहे हों, जरा इस लल्लू को देखो तो..या फिर इस कदर आक्रामक हो उठते हैं..लगता है कि दर्शक मेहमान को नहीं, एंकर को सुनने टीवी खोल के बैठा है। 

स्मृति ईरानी के इंटरव्यू में अंजना ओम कश्यप और अशोक सिंघल ने साफ कर दिया कि अध्ययन और पढ़ाई-लिखाई से टीवी पत्रकारों का कोई वास्ता नहीं है। धन्य हो। सवाल जो पूछे जाने चाहिए थे..

1. 2011 से संसद में शिक्षा पर कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई है…मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में यह बिंदू कहां हैं..?

2. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शिक्षा का मुख्य बिंदू रहा है. शिक्षा का व्यावसायीकरण रोकना…वो प्रश्न कहां लुफ्त है..?

3. बतौर प्रोफेसर और बतौर मानव संसाधन मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी के होने के बाद भी मोदी ने क्यों स्मृति ईरानी को चुना..?

4. क्या कभी इस बात की तस्दीक होगी कि सरकारी इमदाद पर चलने वाली यूनिवर्सिटीज तक पहुंचने वाले छात्रों में कितने छात्र वास्तविक दलित और मुस्लिम हैं..?

5. लिंगदोह के मसले पर मोदी सरकार का क्या रुख है….?

सवाल और भी है..फिलहाल इतना ही.

सुमंत भट्टाचार्य के एफबी वाल से 

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जब गृहमंत्रालय संभाल रहे मंत्री ने पीछे से महिला रिपोर्टर के गले में बांहें डाल दीं

एक सरकार में एक बहुत शक्तिशाली मंत्री थे। वे उस समय गृह मंत्रालय संभाल रहे थे। एक दिन बड़ा बम विस्फोट हुआ। हमारे चैनल के एक रिपोर्टर को इस बारे में बयान लेने के लिए भेजा गया। वह मंत्री से मिलने के उनके घर पहुंचीं। उसने उनके निजी स्टाफ से कहा कि वह उनसे मिलना चाहती है। उस समय बड़ी संख्या में दूसरे चैनलों के रिपोर्टर भी मंत्री का इंतजार कर रहे थे।

उसे आश्चर्य हुआ कि जब स्टाफ के एक कर्मचारी ने उससे कहा कि आइए और अपने साथ ले जाकर उसे ड्रांइग रुम में बैठा दिया। खुद को मिलने वाले इस वीआइपी बरताव से वह खुद भी बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही थी। कुछ देर बाद किसी के कदमों की आवाज़ आती सुनाई पड़ी। वह उस समय अकेली थी। अचानक उसने महसूस किया कि कोई उसके सोफे के पीछे खड़ा हो गया और फिर किसी ने उसके गले में अपनी बाहें डाल दीं। यह सब उसके लिए एकदम अप्रत्याशित था जिसकी कि उसने कल्पना भी नहीं की थी।

अनायास ही उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई। वह चौक कर, उठकर खड़ी हो गई। अब दोनों आमने सामने थे। उसने देखा कि उसके गले में बांहे डालने वाला कोई और नहीं बल्कि वह मंत्री था जिससे कि वह मिलने के लिए आयी थी। उसे देखकर वह भौंचक्की रह गई। वह समझ नहीं पायी कि उसे क्या करना चाहिए। जब मंत्री ने उसका चेहरा देखा तो वह गुस्से में चिल्लाने लगा। इस तरह की हरकत करने के बाद भी शर्मिंदा होने या सारी कहने की जगह उस पर बरसते हुए बोला कि तुम अंदर कैसे आ गई? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे ड्राइंग रुम में घुसने की?

एक तो वह इस घटना से वैसे ही घबरा गई थी और मंत्री के इस व्यवहार ने उसे और भी परेशान कर दिया। वह रोती हुई बाहर भागी। जब वह घर से बाहर निकली तो उसकी हालत देखकर वहां मौजूद बाकी पत्रकारों को भी लगा कि कुछ गड़बड़ हो गया है। उन्होंने इस बारे में पूछना भी चाहा पर वह रोती हुई अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से चली आयी। 

उस समय हमारे संपादक लंदन में थे। उसने दफ्तर आते ही सबसे पहला काम यह किया कि इस पूरी घटना को सोशल मीडिया पर लिख डाला। फिर क्या था हंगामा खड़ा हो गया। यह बात आग की तरह फैल गई। कुछ ही देर में उस मंत्री को इसका पता चल गया और उसने सीधे संपादक से संपर्क किया। संपादक ने उससे बात की और समझाते हुए कहा कि वह उनके आने का इंतजार करें और उसने जो कुछ लिखा है उसे तुरंत सोशल मीडिया से हटा ले। इस घटना की चर्चा भी किसी और से न करें। उसने मुझसे बात की और मैंने उससे कहा कि वे सही कह रहे हैं। तुम्हें इस पूरे प्रकरण को सार्वजनिक करने की जगह पहले संपादक को बताना चाहिए था। इसके बड़े दूरगामी परिणाम निकल सकते हैं।

वे मेरी बात मान गई और उसने वह घटना सोशल मीडिया से हटा ली। बाद में पता चला कि उस मंत्री ने जान बूझ कर हरकत नहीं की। उसकी कोई पत्रकार मित्र थी जिससे उसके अंतरंग संबंध रहे होंगे। उस दिन उसने उस पत्रकार को मिलने का समय दे रखा था। जब मेरी मित्र ने उसके स्टाफ से कहा कि वह मंत्री से मिलने आयी है तो उन लोगों को यह भ्रम हो गया कि वह वही महिला थी जिसे मंत्री ने सीधे ड्रांइग रुम में भेजने के निर्देश दिए हुए थे। उन्होंने उसे वहां भेज दिया और मंत्री को सूचित कर दिया। वह उसी धोखे में आकर आत्मीयता प्रदर्शित करते हुए उससे मिला और उसका आलिंगन करना चाहा पर वहां तो कोई और था। बाद में जब संपादक स्वदेश लौटा तो उसने उसे समझाया और मुझसे भी कहा कि तुम अपनी दोस्त को समझाओ की आवेश में आकर ऐसे कदम उठाना ठीक नहीं है।

उसने मुझे बताया कि पहले तो मंत्री ने मुझसे कहा कि अपनी रिपोर्टर को समझा दो कि सोशल मीडिया पर बकवास लिखना बंद कर दे। उसे इतनी भी तहजीब नहीं है कि मंत्री से मिलने आने के पहले उससे मुलाकात का समय लिया जाता है। संपादक ने मुझसे कहा कि मैंने बहुत मुश्किल से इस रिपोर्टर की नौकरी बचायी है। मंत्री मेरे ऊपर उसे नौकरी से हटा देने के लिए बहुत दबाव डाल रहा था। तब मुझे लगा कि यह संपादक कितना आर्दशों व सिद्धांतों पर चलने वाला है जो कि अपने अधीनस्थ लोगों को बचाने के लिए किसी भी तरह के दबाव में नहीं आता है।

मेरी यह धारणा कुछ समय बाद एक खबर के चलते बदल गई। प्रवर्तन निदेशालय में मेरे संपर्क चाहते थे कि मैं एक व्यवसायिक घराने द्वारा मनी लांडरिंग व ठगी के मामले की खबर दूं। यह घराना राजनीतिक पहुंच वाला था व प्रवर्तन निदेशालय तक को आंखें दिखा रहा था। उन्होंने मुझे सारे दस्तावेज सौंप दिए और यह अनुरोध किया कि मैं इनके आधार पर खबर तैयार करुं पर मूल दस्तावेजों को चैनल पर न दिखाउं।

मैंने संपादक को वे दस्तावेज सौंप दिए और इस निर्देश से भी अवगत करवा दिया। पर वह कहां मानने वाला था। उसने उनसे पूरा वाक्य उद्धृत करना शुरु कर दिया। जब यह खबर चली तो मेरे सोर्स ने मुझे फोन करके कहा कि ऐसा क्यों कर रहे हो? हमने मना किया था। मैंने संपादक से बात की तो वह बोला कुछ नहीं होता। खबर चलने दो। अगर इतना ही डर रहे थे तो यह दस्तावेज क्यों दिए?

उधर दूसरी ओर उस कंपनी के लोगों ने भी संपादक से संपर्क साधना शुरु कर दिया। उन्होंने ईमेल भी भेजा जिसमें दावा किया गया था कि इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है। संपादक ने उनसे कहा कि हमारे पास पूरे दस्तावेज है। मेरे पास मेरे सोर्स का भी फोन आ रहा था कि प्लीज खबर रुकवा दो पूरा मामला उल्टा पड़ रहा है। मेरी हालत फुटबाल सरीखी हो गई थी। न तो संपादक ही मेरी सुन रहा था और न ही मेरा सोर्स कुछ सुनने को तैयार था। उसने अपने नौ बजे के प्राइम टाइम शो में वह दस्तावेज दिखला दिए। उसकी दलील थी कि उस कंपनी के लोग चैनल पर मानहानि का दावा ठोकने की धमकी दे रहे थे इसलिए ऐसा करना जरुरी हो गया था। इधर दस्तावेज दिखाए गए कि उधर से मेरे सोर्स ने मुझे से फोन कर कहा कि तुमने मेरी नौकरी लेने का पूरा इंतजाम कर लिया है। मैंने भी झल्ला कर कहा कि मैं कुछ नहीं कर सकती हूं। अगर इतना ही डर था तो मुझे दस्तावेज क्यों दिए थे। मैंने उससे सीधे संपादक से बात करने को कहा। बाद में अचानक पूरी खबर व दस्तावेज 10 बजे के बुलेटिन से गायब हो गए। उनका कहीं जिक्र तक नहीं था। जब अगले दिन मैंने अपने ब्यूरो चीफ से इसकी वजह पूछी तो उन्होंने रहस्यमयी मुस्कान के साथ जवाब दिया कि तुम तो जानती ही हो कि तरह-तरह की डील होती हैं कौन कैसे डील करता है, इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। 

‘नया इंडिया’ से साभार (लेखिका देश के एक शीर्ष चैनल से जुड़ी हैं)

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अलीगढ़ में रिजल्ट की कवरेज के दौरान जागरण के रिपोर्टर की हार्ट अटैक से मौत

अलीगढ़ : दैनिक जागरण के रिपोर्ट मयंक त्यागी का सीबीएससी बोर्ड के रिजल्ट की खबर की कवरेज के दौरान आज अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया। वह मात्र 32 वर्ष के थे। वह अपने पीछे अपनी पत्नी, एक छोटे बच्चा, मां और बड़े भाई को छोड़ गए हैं। अल्पायु में उऩके निधन से जिले के पत्रकारों में शोक की लहर फैल गई। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

मयंक त्यागी आज दोपहर रिजल्ट की खबर कवर करने के लिए शहर के एक स्कूल में गए थे। वहीं उन्हें अचानक बड़ी तेज बेचैनी महसूस हुई। मौके पर मौजूद लोगों से उन्होंने कहा कि मुझे लगता है, डीहाइड्रेशन हो रहा है। इसके बाद ग्लूकोज मिलाकर तुरंत उन्होंने एक गिलास पानी पीया। तब भी बेचैनी कुछ कम नहीं हुई तो पास खड़े फोटोग्राफर उन्हें तुरंत कार से निकट सिंघल हास्पिटल ले गए।

बताया जाता है कि हास्पिटल पहुंचते ही मयंक त्यागी डाक्टर से बात करते करते वहीं बेहोश हो गए। डॉक्टर ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें तुरंत हार्ट के डॉक्टर के पास ले जाने को कहा। उन्हें बगल में स्थित के.के. हास्पिटल ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कालेज में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की लेकिन उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि वह अभी एकदम स्वस्थ थे। कुछ दिनो से उन्हें बीपी की शिकायत जरूरत थी। उनका मंगलवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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कप्तान के बयान से पत्रकारों में रोष, मनमानी बर्दाश्त नहीं

गाजीपुर : गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन की एक आपात बैठक कचहरी स्थित कैम्प कार्यालय पर हुई। 25 मई 2015 को प्रेसवार्ता में एक हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के ब्यूरो प्रमुख अविनाश प्रधान के प्रश्न से तिलमिला कर पुलिस अधीक्षक द्वारा उन्हें आगे से किसी कांफ्रेंस में न आने के फरमान पर पत्रकारों में काफी रोष है। 

पुलिस अधीक्षक के इस अव्यावहारिक बयान की सभी पत्रकारों ने एक स्वर से निन्दा की है। पत्रकारों ने कहा कि प्रत्येक पत्रकार अपनी अपनी समझ से प्रश्न पूछता है और पत्रकार के इस प्रयास का सम्मान होना चाहिए। मीडिया स्वतंत्र है और इसकी स्वतंत्रता पर लगाम लगाने का यह प्रयास हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। 

पुलिस के इस रवैये से पुलिस व जनता के बीच की दूरी बढ़ेगी। पुलिस अधीक्षक के इस व्यवहार की सभी पत्रकारों ने एक स्वर में घोर निन्दा की। बैठक में गुलाब राय, आर सी खरवार, अविनाश प्रधान, रविकान्त पाण्डेय, आशुतोश त्रिपाठी, कमलेश यादव, सूर्यवीर सिह, आलोक त्रिपाठी, विनोग गुप्ता, शशिकान्त यादव, कमलेश आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन चन्द्र कुमार तिवारी व अध्यक्षता अनिल उपाध्याय ने किया।

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आज के युग में मीडिया की अहम भूमिका : विधानसभा अध्यक्ष

शिमला : विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने कहा कि मीडिया कर्मियों से निष्पक्ष व निडर बनकर कार्य करने की जरूरत है। आज के युग में मीडिया की अहम भूमिका है। निर्भीक कार्य करते हुए मीडिया को जनता के समक्ष सच्चाई लानी चाहिए। 

गत दिनो वह पत्रकारों की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान समिति को देश की पहली ई विधान प्रणाली की जानकारी दी गई। बुटेल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा में चार अगस्त 2014 को ई विधान प्रणाली को लागू किया गया। हिमाचल प्रदेश विधानसभा पेपरलैस व हाईटेक कर दी गई है। इससे हर साल जहा 15 करोड़ की बचत होगी व करीब छह हजार वृक्ष कटने से भी बचेंगे। 

इसके अतिरिक्त केरल विधान सभा की पिछड़ा वर्ग नौ सदस्यों वाली कल्याण समिति ने भी हिमाचल बुटेल के साथ शिष्टाचार भेंट की। समिति के सभापति सी मामुटी ने केरल विधानसभा की पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। इस दौरान सदस्य पीटीए रहीम, वीएस उमर मास्टर व एटी जॉर्ज और हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिव सुंदर सिंह वर्मा भी उपस्थित थे। दोनों समितियों ने सदन में स्थापित ई विधान प्रणाली का अवलोकन किया व बुटेल को इसके लिए बधाई दी।

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कालपी में जुआ खेलते रिपोर्टर गिरफ्तार, जमानत पर छोड़ा गया

जालौन : कालपी कोतवाली में स्थानीय पुलिस ने कल के न्यूज के क्षेत्रीय प्रतिनिधि मोहित शुक्ला को कई अन्य आरोपियों के साथ जुआ खेलते हुए गिरफ्तार कर लिया। इस तरह की भी चर्चाएं हैं कि पुलिस किसी बात पर मोहित शुक्ला से पहले से खुन्नस खाए हुई थी। मौका मिलते ही उसने बदला चुका लिया है।

पुलिस को काफी दिनो से इस तरह के सुराग मिल रहे थे कि मोहित शुक्ला के साथ कई जुआरी कस्बे में सक्रिय हैं। कल अचानक सूचना मिली कि वांछित आरोपी इस समय जुआ खेल रहे हैं। कालपी थाने की पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंच कर तीन चार अन्य जुआरियों के साथ कालपी निवासी रिपोर्टर मोहित शुक्ला को भी गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बताया है कि सभी आरोपियों को अदालत के सामने आज पेश करने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया। इस घटना को लेकर जिले के पत्रकारों में दिन भर चर्चाएं चलती रहीं। इस तरह की भी चर्चाएं हैं कि पुलिस किसी बात पर मोहित शुक्ला से पहले से खुन्नस खाए हुई थी। मौका मिलते ही उसने बदला चुका लिया है।

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जीडीए वीसी का स्वागत कर पत्रकारिता की मर्यादा को किया तार तार

गाजियाबाद : सरकारी अधिकारियों को अपने दबाव में रखने के लिए हाल ही में गाजियाबाद के कुछ मुट्ठीभर पत्रकारों द्वारा गठित की गई पत्रकार एसोशिएशन के स्वंभू अध्यक्ष अजेय जैन और महासचिव संदीप सिंघल जीडीए के नवनियुक्त उपाध्यक्ष विजय यादव का स्वागत करने नौएडा पहुंच गये । 

विजय यादव इससे पहले नौएडा विकास प्राधिकरण में तैनात थे, वह संतोष यादव के स्थान पर  आये हैं । बुधवार को विजय यादव ने गाजियाबाद आकर चार्ज लिया लेकिन इन दोनों पदाधिकारियों ने तेल लगाने की सारी हदें पार कर विजय यादव के चार्ज लेने से एक दिन पहल यानी मंगलवार को ही नोएडा जाकर यादव को गुलदस्ता दिया और उनकी जबरदस्त बटरिंग की।

यही नहीं इन प़त्रकारों के ठेकेदारों ने एक स्थानीय अखबार में यादव के साथ सैल्फी फोटो भी प्रकाशित करा डाली। वह फोटो महामेधा अखबार ने 20 मई 15 के पेज 4 पर छापी । नागरिकों का कहना है कि जब पत्रकार ऐसी शर्मनाक हरकतें करेंगे तो इस शहर में भ्रष्टाचार की नकेल कैसे कसेगी । सू़त्रों का कहना है कि यादव को गाजियाबाद के प़त्रकारों के इन दोनों ठेकेदारों ने जीडीए के पक्ष में पाजीटिव खबर छापने का भी भरोसा दिया, हालांकि कि श्रमजीवी प़त्रकारों ने जीडीए वीसी विजय यादव से मिलकर साफ कर दिया कि इन दोनों धंधेबाजों का गाजियाबाद के प़त्रकारों से कोई सरोकार नहीं है ।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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कोतवाली प्रभारी ने न्यूज चैनल के रिपोर्टर को लात मारी

उरई (जालौन) : न्यूज24 के रिपोर्टर अखिलेश कुमार सिंह ने जिला कोतवाली मुख्यालय में अपने साथ कोतवाली प्रभारी द्वारा की गई बदसलूकी की शिकायत पुलिस उच्चाधिकारियों से की है। उन्होंने बताया है कि बेवजह गुस्से में कोतवाली प्रभारी ने सबके सामने उन्हें लात मारी।  

उन्होंने बताया है कि पिछले दिनों वह खबरों के संकलन के सिलसिले में कोतवाली पहुंचे तो उन्होंने कोतवाल दयाशंकर सिंह ने फर्जी मुकदमे में फंसा देने की धमकी दी। रिपोर्टर के मुताबिक कोतवाली प्रभारी ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि तुम्हें दो सगी बहनों के अपहरण के मामले में फंसा दूंगा। 

इसके बाद कोतवाली प्रभारी ने उन पर लात भी चलाई। उनका रौद्र रूप देखकर कोतवाली में मौजूद अन्य फरियादी वहां से खिसक लिए। अखिलेश कुमार सिंह ने अपने साथ हुई इस घटना की शिकायत डीआईजी, आईजी, एसपी एवं उच्चाधिकारियों से करते हुए दया शंकर सिंह के स्थान पर किसी अन्य प्रभारी की तैनाती की मांग की है। 

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आदिवासी बच्चे बने ‘संगवारी खबरिया’ के रिपोर्टर और कैमरामैन

सरगूजा जिले के बालमजूदर आदिवासी बच्चों को यूनिसेफ की अनूठी पहल पर हैदराबाद विश्वविद्यालय ने अपने मुद्दे उठाने के लिए मीडिया का जरिया प्रदान किया है। यूनिसेफ द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम संगवारी खबरिया यानी मित्र संवाददाता अब आदिवासी इलाकों में बच्चों में ही नहीं बल्कि वयस्कों में भी नई अलख जगा रहा है।

सरगूजा के चार ब्लाकों मेनपट, अंबिकापुर, उदयपुर तथा बतौदी में संगवारी खबरिया में 20 बच्चों की टीम है, जो खबरिया चैनलों के पत्रकारों की बात काम कर रही है। हर सदस्य या तो रिपोर्टर है या फिर कैमरामैन। वे कंप्यूटर पर अपनी खबरें खुद ही एडिट भी करते हैं। ये ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। ज्यादातर स्कूल से ड्राप आउट हैं। लेकिन कैमरा चलाना उन्हें यूनिसेफ ने सिखाया है जिसके जरिये वे उन मुद्दों की वीडियो बनाकर प्रशासन को पेश करते हैं जो उन्हें प्रभावित करते हैं।

सरगूजा की कलक्टर रितु सेन ने बताया कि इन बच्चों ने एक ऐसा शिक्षक का वीडियो बनाकर दिया जो स्कूल में नहीं पढ़ा रहा था। जब ये बच्चे स्कूल जाते थे तो शिक्षक का नहीं पढ़ाना आम बात थी लेकिन तब वे इसका महत्व नहीं जानते थे। लेकिन इस मंच पर आकर वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गए हैं।

संगवारी खबरिया की सोच हैदराबाद विश्वविद्यालय की देन है। वहां के मीडिया विभाग के प्रोफेसर वासुकी बेलवाडी ने बताया कि शोध में हमने पाया कि मीडिया में बच्चों के बारे में जो कुछ आता है, वह बड़े की सोच पर आधारित है, क्यों न बच्चे अपने मुद्दे खुद तलाशें ? यही सोचकर पहले विवि ने मेडक जिले में एक पायलट प्रोजेक्ट किया। उसके बाद यूनिसेफ की मदद से सरगूजा जिले को चुना। जो नक्सल समस्या के कारण विकास में काफी पिछड़ा गया। हालांकि हाल के वर्षों में उसमें कमी आई है।

बतौदी ब्लाक की संगवारी टीम की सदस्य रवीना बताती है कि वह दसवीं में फेल हो गई थी। गांव में गाय, भैंस चराती थी। लेकिन अब वह कैमरा चलाती है। गांव में जो भी गलत हो रहा है, उसे कैमरे में रिकार्ड कर लेती है तथा प्रशासन को सौंप देती है। यह ग्रुप बाल मजदूरी, बच्चों एवं महिलाओं के शोषण, स्कूल छोड़ने, अवैध शराब की बिक्री, लैंगिक मुद्दों को उठाने में सफल रहा है। इसी प्रकार उदयपुर के दिनेश कुमार ने बताया कि उनके गांव खसूरा में मां-बाप बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे। उनके काम करते थे। इस मुद्दे को हमने उठाया और आज मां-बाप शिक्षा के महत्व को समझ रहे हैं तथा बच्चे स्कूल जाने लगे हैं।

जिला कलक्टर सेन की मानें तो सांगवारी खबरिया की यह टीम अब जिला प्रशासन की आंख और कान बन चुकी है। हम अपने हर कार्यक्रम में इन्हें बुलाते हैं। वे मुद्दों की अपने हिसाब से रिकार्डिग करती हैं तथा उन्हें पेश करते हैं। यूनिसेफ के छत्तीसगढ़ के प्रभारी प्रसन्न दास के अनुसार ये बच्चे आज आत्मविश्वास से लबालब हो रहे हैं। ये कभी घर या गांव से बाहर नहीं निकले थे लेकिन आज इन्हें देखकर गांव के दूसरे बच्चे भी उनकी तरह से समाज की मुख्यधारा में जुड़ना चाहते हैं और अपना कौशल विकसित करना चाहते हैं। बड़े पैमाने पर बच्चे इस कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं। उनमें कुछ सीखने की ललक पैदा हो रही है।

हिंदुस्तान से साभार मदन जैड़ा की रिपोर्ट

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‘आजतक’ के संवाददाता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने वाला एसओ लाइन हाजिर

दिल्ली : नरेला फैक्ट्री वसूली मामले में राजेश खत्री के खिलाफ गलत तरीके से एफआईआर दर्ज करने के आरोपी यहां के एसओ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। गौरतलब है कि गत दिनो विजय सिंह पुत्र महेंद्र सिंह निवासी श्रीश्याम अपार्टमेंट, नरेला ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि राजेश खत्री ने धमकाते हुए उससे 50 हजार रुपए मांगे थे। अब घटनाक्रम की हकीकत कुछ और ही खुल कर सामने आ रही है। पुलिस, फैक्ट्री मालिक के बीच पूरा मामला किसी और सिरे से प्रायोजित कर खत्री को जाल में फंसाने का प्रयास किया गया था।  

नरैला क्षेत्र की वही है ये फैक्ट्री, जिसके मालिक विजय सिंह ने पत्रकार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी

मौके पर छानबीन करते रिपोर्टर

खत्री की सूचना आजतक पर प्रसारित करते हुए बताया गया था कि देश की राजधानी में हज़ारों ज़िन्दगियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। राजधानी की फैक्ट्रियों में बायो मेडिकल वेस्ट इस्तेमाल किये जाने का मामला सामने आया है। बाहरी दिल्ली के नरेला औद्योगिक क्षेत्र से ये रिपोर्ट आई है कि प्लास्टिक प्रोडक्ट से सम्बंधित कम से कम चालीस ऐसी फैक्ट्रियाँ चल रही हैं जिनमें भारी मात्रा में बायो मेडिकल वेस्ट का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है।

बायो मेडिकल वेस्ट दरअसल अस्पतालों में मरीजों के इस्तेमाल में लाये जाने वाले वो प्रोडक्ट होते हैं जिनको इस्तेमाल के बाद बेहद सावधानी के साथ नष्ट कर डिस्पोज़ करने की जरूरत होती है। ये प्रोडक्ट जैसे, कि सिरिंज, नीडल के कवर , इंजेक्शन की शीशियाँ , नाली, बोतल या इस तरह की कोई भी सामग्री हो सकती हैं, जिनको मरीज के इलाज में उपयोग किया जाता है और उसके बाद वो बेकार हो जाती हैं। इस्तेमाल के बाद इनको बेहद सावधानी के साथ डिस्पोज किये जाने की जरूरत होती है क्योंकि किसी भी तरह से अगर ये स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में दुबारा आयें तो इन्फेक्शन हो सकता है और भयानक संक्रामक रोगों का कारण बन सकता है। 

खत्री ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाया था कि इतनी भारी मात्रा में  बायो मेडिकल वेस्ट से भरे ये ट्रक आखिर राजधानी के बाहरी इलाके में चल रहे नरेला औद्योगिक क्षेत्र तक कहाँ से पहुँचते हैं? आखिर कौन से वो अस्पताल हैं जो कि ये मौत का सामान फैक्ट्रियों तक पहुँचा रहे हैं? बताया गया कि प्लास्टिक के काम से जुड़ी ये फैक्ट्री काफ़ी समय से बायो मेडिकल वेस्ट को रीसायकल कर बेचने का काम कर रही है। रीसायकल कर इन प्लास्टिक से डिस्पोजेबल ग्लास, प्लेट, खिलौने या अन्य दैनिक उपयोग में लायी जाने वाली चीजें बनायीं जाती हैं।

जब फैक्ट्री के अंदर पड़ताल की गयी तो और भी चौंका देने वाली तस्वीरें सामने आईं। ये महिलाएँ नंगे हाथों से ही इन बायो मेडिकल वेस्ट जैसे की नीडल्स और सिरिंज को छाँट रही थीं । फैक्ट्री मालिक विजय सिंह ने भी स्वयं इस बात को कबूल किया कि ये ग़लत काम उसकी फैक्ट्री में चलाया जा रहा है और इस तरह की पैंतीस चालीस फैक्ट्रियाँ इस औद्योगिक क्षेत्र में हैं।

जब पूरी हकीकत आजतक की टीम ने पुलिस के साथ कैमरे में कैद कर ली तो पहले तो उनको मामले को ले दे कर रफा दफा करने को कहा गया। जब रिपोर्टर नहीं माने तो खबर दबाने के लिए लगातार उनपर दबाव बनाया गया और धमकियाँ भी दी गयीं। रिपोर्टर नहीं झुके। आखिर फैक्ट्री मालिक ने उलटे पत्रकार पर ही रंगदारी वसूलने का आरोप लगा दिया और झूठी एफ आई आर भी दर्ज़ करा दी थी। मामले का सच सामने आने पर अब रिपोर्ट दर्ज करने वाले एसओ को लाइन हाजिर कर दिया गया।  

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जान लेने के लिए हैवान ने रिपोर्टर को खिलाया शीशा और सिंदूर

भले ही मकसद किसी बात के प्रतिशोध का भी क्यों न हो, सोचकर हैरत होती है कि क्या कोई इस हद तक नीच हो सकता है ! मेरठ में ‘इंडिया न्यूज’ के रिपोर्टर रजनीश चौहान के साथ जितनी क्रूरतापूर्ण घिनौनी हरकत हुई है, वह किसी भी जानने-सुनने वाले को झकझोर सकती है। वह इन दिनो किसी नीच व्यक्ति की दी हुई असहनीय पीड़ा से कराह रहे हैं। कुछ समय पहले उसने किसी दिन शातिराना तरीके से चुपचाप खाद्य पदार्थ में पीसा हुआ शीशा और सिंदूर मिलाकर राजेश को खिला दिया था। उन्हें खुद नहीं मालूम कि उनके साथ ये हरकत कब, किसने कर डाली। 

हफ्ते-पंद्रह दिन तो राजेश को इस हरकत का आभास तक नहीं हुआ। एक दिन अपने बीमार बच्चे को दिखाने के लिए जब डॉक्टर के पास पहुंचे तो अपनी गले की अनजान दिक्कत से भी डॉक्टर को अवगत कराया। उस समय बच्चे के अलावा राजेश के साथ उनकी पत्नी भी थीं। मामला गंभीर था, इसलिए डॉक्टर ने उनसे कहा कि आप जल्द अकेले में मिलें। वह पत्नी-बच्चे को घर छोड़ कर पुनः डॉक्टर के यहां पहुंचे तो अपने गले के जख्म की वजह जानकर हैरत में पड़ गए। उसके बाद वह दवा के साथ रामदेव की औषधि से गरारे भी करते रहे। 

इतने के बावजूद उन्होंने काफी हिम्मत से काम लिया। उनके गले से धीमी भी आवाज आनी बंद हो गई थी। संयोग से मिले पूर्वपरिचित कुशल चिकित्सक ने बेहतर इलाज ही नहीं शुरु कर दिया, हिम्मत से काम लेने की दिलासा भी दी। पिछले एक-डेढ़ माह से उनका इलाज जारी है। भड़ास4मीडिया को उन्होंने बताया कि हरकत करने वाले किसी व्यक्ति पर उन्हें संदेह नहीं है, न ही वह उसे जानना चाहते हैं। उनका उद्देश्य तो इतना भर है कि स्वस्थ हो जाएं और अपने मीडिया संस्थान का दायित्व फिर से निभाने लगें। संस्थान ने उन्हें हर तरह की मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन वह इस मुश्किल में किसी का भी कृपापात्र नहीं बनना चाहते हैं।  

राजेश बताते हैं कि गले में गंभीर तकलीफ के दौरान कई दिनो तक वह इंडिया न्यूज को किसी तरह खबरें तो भेजते रहे लेकिन फोनो अटेंड न कर पा रहे थे। इस पर संस्थान के सीनियर कर्मियों को अंदेशा हुआ। जानने के लिए उन्होंने पूछा कि आप बोल क्यों नहीं रहे हैं? उन्हें क्या पता था कि राजेश ने तो अपने परिजनों, यहां तक कि पत्नी को भी आपबीती अभी छिपा रखी है। बार बार पूछने पर उन्हें इंडिया न्यूज के संपादकीय प्रमुख को घटना से अवगत कराना पड़ा। 

आज भी राजेश चौहान चुपचाप पूरी दृढ़ता से अपने स्वास्थ्य-संकट का सामना कर रहे हैं। पुलिस कप्तान ने भी उनसे किसी संदिग्ध आरोपी के संबंध में जानकारी प्राप्त कर कार्रवाई में मदद करनी चाही, लेकिन वह उस दुष्ट आत्मा के बारे में जानें, तब तो कुछ बताएं। वैसे उनका कहना है कि मैंने किसी का बुरा नहीं किया है। घर परिवार चलाने के लिए पढ़ाई लिखाई के बाद मीडिया की राह चुनी लेकिन मुझे क्या पता था कि कोई इस तरह मेरी जान ले लेना चाहेगा। अंदेशा तो यही है कि आरोपी का मकसद राजेश की जान से खेलना रहा होगा। अब वह धीरे धीरे स्वस्थ हो रहे हैं। रुक-रुक कर दो चार शब्द बोल पा रहे हैं। 

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