काशी पत्रकार संघ का द्विवार्षिक चुनाव : सुभाष सिंह अध्यक्ष, अत्रि महामंत्री व दीनबन्धु कोषाध्यक्ष

वाराणसी । काशी पत्रकार संघ के द्विवार्षिक चुनाव में रविवार को सुभाष चन्द्र सिंह (138 मत) वर्तमान अध्यक्ष बी॰ बी॰ यादव (101 मत) को सीधे मुकाबले में पराजित कर निर्वाचित घोषित किये गये। इसके अलावा महामंत्री पद पर अत्रि भारद्वाज (88 मत) त्रिकोणीय मुकाबले में कड़ी चुनौती पेश करते हुए वर्तमान कोषाध्यक्ष पवन कुमार सिंह (74 मत) को परास्त कर विजयी घोषित किये गये। इस पद पर एक अन्य प्रत्याशी वर्तमान महामंत्री रामात्मा श्रीवास्तव को 67 मत मिले। कोषाध्यक्ष पद पर दीनबन्धु राय (127 मत) निर्वाचित घोषित किये गये। उन्होंने डा॰ जयप्रकाश श्रीवास्तव (104 मत) को परास्त किया। पत्रकार सुभाष सिंह आज अखबार, काशीवार्ता और जनवार्ता में सेवा दे चुके हैं. अत्रि भारद्वाज गांडीव अखबार में रह चुके हैं. वे पत्रकार के साथ साथ गीतकार और कवि भी हैं।

बनारस : खताएं कौन करता है, सजा किसको मिलती है

बनारस। भीड़ की कदमों की आहटों से हमेशा गुलजार रहने वाला शहर का गोदौलिया चौराहा सोमवार की शाम अचानक जल उठा। न जाने कैसी आग लगाई की आने-जाने वाले राहगीर, पुलिसकर्मी, मीडियाकर्मी सहित दर्जनों घायल होकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंच गए। बीच चौराहे से उठती आग की लपटें तुलसी के मानस चरित और कबीर के पोगापंथ पर किए गए प्रहार से कही ज्यादा उंची होती दिखी। लगा कि गुस्से और नफरत के कारोबार ने कुछ ज्यादा ही पांव पसार लिया है। नहीं तो डरी, सहमी, रोती- बिलखती सुरक्षित ठिकाना तलाशने के लिए भागती महिलाओं के चेहरे पर इतना खौफ और डर नहीं होता। बनारस कोई जंगल तो नहीं कि बीच बाजार कोई खौफनाक जानवर निकल कर इंसानों पर हमला बोल दिया हो। इंसानों की बस्ती में ये कौन सा मंजर है, कि आदमी बस बदहवास भागता रहता है।

वाराणसी सहारा के संपादक को गुस्साए कर्मियों ने घंटों उनके केबिन में घेरा, जमकर नोकझोक

वाराणसी राष्ट्रीय सहारा के संपादक स्नेह रंजन के उत्पीड़न से आजिज आये संपादकीय विभाग के कर्मचारियों का गुस्सा आखिरकार फूट ही पड़ा। आक्रोशित कर्मचारियों ने घंटों संपादक को उनके ही केबिन में घेरे रखा। इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर नोकझोक हुई। गनीमत यह रही की मारपीट नहीं हुई। कर्मचारियों ने पूरे मामले की जानकारी मीडिया हेड राजेश सिंह को दे दी है । 

मरीज के इलाज में वाराणसी का मैक्सवेल हास्पिटल दोषी करार

वाराणसी : अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की जांच में पता चला है कि बक्सर निवासी मरीज ओंकारनाथ तिवारी के इलाज में मैक्सवेल अस्पताल के डॉक्टर ने लापरवाही बरती थी। इसकी शिकायत सोशल फाउंडेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के अध्यक्ष ने चिकित्सा प्रशासन से गंभीर शिकायत की थी। उल्लेखनीय है मैक्सवेल के डॉक्टरों ने ज्यादा पैसे वसूलने के चक्कर में ओंकारनाथ का पैर काट दिया था। 

घायल राष्ट्रीय पक्षी को सारनाथ पक्षी विहार में मिला आसरा

वाराणसी : चौबेपुर क्षेत्र के भंदहा कला (कैथी) गाँव स्थित टेलीफ़ोन एक्सचेंज के पास एक बगीचे में एक माह पूर्व एक मोरनी की चोंच के पास घाव हो गया था। मोरनी को स्थानीय निवासियों ने इलाज कराने के बाद छोड़ दिया। घाव के कारण उसकी एक आँख जाती रही , एक तरफ से न दिखाई  देने के कारण कुछ दिन बाद मोरनी सड़क पार करते समय किसी वाहन की चपेट में आ गयी। 

घायल मोरनी का इलाज कराते स्थानी पक्षीप्रेमी

मेरी चिंता बस इतनी, खत्‍म होते जा रहे हैं भाष्‍यम जैसे लोग

पता चला है कि भाष्‍यम श्रीनिवासन नहीं रहे। इनका जाना वैसे ही है जैसे कुछ साल पहले टंडनजी का जाना रहा या चाची का जाना। कौन थे ये शख्‍स? बनारस में बीएचयू से लेकर अस्‍सी चौराहे के बीच कभी भी और कहीं भी अचानक दिख जाने वाले भाष्‍यम उन सैकड़ों लोगों में एक थे जो बनारस को बनारस बनाते हैं। 

‘आज’ के मालिक शार्दूल विक्रम गुप्त ने अपने कर्मचारी को कफन के पैसे देने से मना किया

वाराणसी : मेडिकल की भाषा में कहें तो मुर्दा वो है, जिसकी दिल की धड़कनें और सांसें थम जाती हैं, पर मुझे समझ में नहीं आता ऐसे  लोगों को किस श्रेणी में रखा जाए, जो सब कुछ जानते-देखते और समझते हुए भी खामोशी का आवरण ओढ़े दूसरों की मजबूरी को तमाशा बना कर रख देते हैं। जो दिखावे के लिए मंदिर में सैकड़ों रुपये पुजारी के हाथों में दान स्वरूप रख देते हैं, पर अपने ही किसी कर्मचारी के गिड़गिड़ाने पर घर पर रखी उसके बेटी की लाश के कफन तक के पैसे देने से इन्कार कर देते हैं, भले ही वो कर्मचारी अपनी मेहनत और हक के पैसे मांग रहा हो। ये कहानी है वरिष्ठ पत्रकार आर. राजीवन की। आर. राजीवन की जुबानी सुनिए उनके शोषण और दुख की कहानी…

महिला पत्रकार ने घर में घुसकर स्वतंत्र पत्रकार की मां को पीटा, रिपोर्ट दर्ज

वाराणसी : यहां के एक प्रातः कालीन प्रतिष्ठित अखबार में कार्यरत महिला पत्रकार वंदना सिंह के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोप यह है कि उन्होंने अपने दो भाइयो के साथ अपने ही क्षेत्र के निवासी स्वतंत्र पत्रकार विपिन मिश्रा के घर में घुसकर उनकी माँ धनेश्वरी देवी के साथ मारपीट व गाली गलौज किया। थाना चौक इंस्पेक्टर प्रकाश गुप्ता ने मामले को जाँच में सही पाते हुए तत्काल आई पी सी की धारा 323, 504  के तहत महिला पत्रकार व उनके दोनों भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया ।

ये पत्रकारों का दोस्त है या दुश्मन, जांच अधिकारी ही बदलवा दिया!

मामला जनसंदेश टाइम्स, बनारस यूनिट का है, जहाँ अभी बीते सप्ताह PF घोटाले वाली जाँच में नए कोतवाल रतन सिंह यादव जाँच आगे बढ़ाने पर तुल गये थे। कई बार पुलिस पहुंची अखबार के दफ्तर, लेकिन सम्पादक रवींद्र कुमार गायब हो जाते ऐन मौके पर। अंत में पत्रकार विजय विनीत ने दबाव डालकर जांच अधिकारी ही बदलवा दिया। कैसे कैसे लोग हैं पत्रकारिता के नाम पर कलंक। 

सालभर से लापता पत्रकार को नहीं खोज पाई ‘मोदी के बनारस’ की पुलिस

वाराणसी : हैरत होती है कि सिस्टम कितना नाकारा हो चुका है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस की पुलिस एक लापता पत्रकार को साल भर से खोज नहीं पाई है। 

सहारा वाराणसी के खिलाफ पीएफ का मामला भी उठा, जाँच के आदेश

मजीठिया वेज बोर्ड की माँग को लेकर जनवरी 2015 से सक्रिय राष्ट्रीय सहारा वाराणसी में कार्यरत चीफ़ रिपोर्टर सुभाष पाठक ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के साथ ही अब स्थानीय श्रम कार्यालय में भी लिखित शिकायत की है। पाठक ने ऐसा मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुनवाई के दौरान 28 अप्रैल 2015 को जारी आदेश के मद्देनजर किया है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में सहारा परिवार के मुखिया सुब्रत राय सहाराए जयब्रत राय एवं सुशांतो राय को पार्टी बनाया है । 

सीकरौरा नरसंहार : सुनवाई के दौरान गुम हुई फाइल मिली, बढ़ेंगी डान बृजेश सिंह की मुश्किलें

सीकरौरा नरसंहार एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा का मुख्य बिन्दु समाजसेवी राकेश न्यायिक हैं। न्यायिक ने तमाम न्यायालयों के अभिलेखों कें आधार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सीकरौरा नरसंहार की फाइल जानबूझ कर जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल सिंह व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ताओं, अन्य पुलिस, न्यायिक कर्मचारियों की मिलीभगत से गुम कर दी गई। पिछले 8 सालों से गिरफ्तार व देश के विभिन्न जेलो में बन्द होते हुए वर्तमान में वाराणसी के केन्द्रीय कारागार शिवपुर में निरुद्ध माफिया डान बृजेश सिंह को आज तक उपरोक्त मुकदमे में तलब कर रिमांड तक नहीं बनवाया गया है बल्कि अभियुक्तों को बचाने के लिए सत्र न्यायालय की पत्रावली तक को गायब करा दिया गया है। 

वाराणसी में पत्रकारों का प्रोत्साहन-सम्मान, रेल राज्यमंत्री को सौंपा 14 सूत्री मांगपत्र

वाराणसी में गांधीयन मिडिया ग्रुप एवं भारतीय जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के स्थापना दिवस पर सराहनीय योगदान के लिए “गांधीयन अचीवमेंट एवार्ड 2015 ” से विशिष्ट जनों को नवाजा गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने पत्रकारों, साहित्यकारों और कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर साहित्यकार पत्रकार व कलाकार के सर्वहित सवालों पर गहरी चिंता चर्चा की गई।

सम्मान समारोह की एक झलक

दशाश्वमेध घाट पर पत्रकारों एवं समाजसेवियों का सम्मान

काशी के दशाश्वमेध घाट पर बनारस के समाजसेवियों, पत्रकारों एवं स्वच्छता अभियान से जुड़ी 65 विभूतियों को नेशनल मीडिया क्लब द्वारा सम्मानित किया गया। क्लब की ओर से पत्रकार मनोज श्रीवास्तव, राकेश पाण्डेय, आशुतोश पाण्डेय, अजय राय, विनय सिंह, रामात्मा, पवन दीक्षित, दिनेश मिश्रा, सुशान्त मुखर्जी, अजय सिंह, अरविन्द सिंह, शैलेश चौरसिया, रवि पाण्डेय, सन्तोष चैरसिया, अमित मुखर्जी, अशोक सिंह, सुजीत पटेल, उमेश गुप्ता, आशुतोष सिंह आदि को सम्मानित किया गया। 

थाने से उड़ गई रिपोर्टर की तहरीर, दुबारा गुहार, फिर भी पुलिस खामोश

वाराणसी : अभी पिछले माह की ही बात है, जब एक लोकल चैनल डेन काशी के लंका-भेलूपुर प्रतिनिधि को ठिकाने लगाने की धमकी मिली थी. सभी मामलो की तरह यह भी मामला पंहुचा थाने लेकिन इस मामले में हुआ कुछ अलग. 

लालची-लापरवाह चिकित्सा माफिया ने काट डाला युवक का पैर

वाराणसी : ओंकार नाथ तिवारी, उम्र 16 साल, सपना था सेना में जाकर देशसेवा का, पर अब शायद कभी उसका ये सपना पूरा नहीं होगा। कारण चिकित्सा के नाम पर धन उगाही का केन्द्र बने नर्सिंग होम और इस काम में उनके सहयोगी बने लोभी और लापरवाह चिकित्सकों के चलते वो अपना दहीना पैर खो चुका है। पैर ही क्यों, चिकित्सकीय लापरवाही के चलते उसकी किडनी और लीवर भी संक्रमित हो चले हैं। चिकित्सकीय लापरवाही का ये नमूना ही है कि 16 साल के घायल इस नौजवान को इलाज के नाम पर नर्सिंग होम के अन्दर 12 घंटे ऐसे ही रख कर छोड़ दिया गया। इस दौरान बड़ा भाई चक्कर काटता रहा लेकिन किसी ने न तो कुछ सुना और न कुछ किया। अब हाल ये है कि ओंकार बनारस में कटे पैर और पस्त हाल के साथ जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। मां के बहते आंसू और बड़े भाई का प्रयास ही जिदंगी की इस जंग में उसके साथ है।

मरीजों की जान और जेब दोनो से खेल रहे वाराणसी के डॉक्टर

जन अधिकार मंच के अध्यक्ष अनिल कुमार मौर्य ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और प्रमुख सचिव चिकित्सा, लखनऊ से शिकायत की है कि मरीजों के इलाज में सरकारी चिकित्सालय जान से ही नहीं, जेब से भी खेल रहे हैं। 

वाराणसी में बंग दर्शन ने किया बांग्ला नववर्ष का अभिनंदन

वाराणसी : मिनी बंगाल कहे जाने वाले बनारस में बांग्ला नव वर्ष की अगवानी में आयोजित एक कार्यक्रम में सांस्कृतिक मूल्य बोध के बीच सामाजिक सरोकारों से जुड़े मसलों की झलक दिखी। गीत-संगीत, कविता, नृत्य सब के केन्द्र में संवेदनशील सामाजिक मुद्दे और जमीन पर खटकर भी दो जून की रोटी न पाने की कशिश परिदृश्य में रही। 

बनारस में बांग्ला नव वर्ष की अगवानी में आयोजित कार्यक्रम की एक झलक

वाराणसी में जिलाधिकारी ने प्रेस कार्ड देखने के बहाने पत्रकारों से की हाथापाई

वाराणसी : बीएचयू में छात्रों पर बल प्रयोग से पहले प्रशासन और पुलिस को रिपोर्टिंग करने पहुंच पत्रकार रास्ते का रोड़ा दिखे। उन्हें वहां से हटाने की ओछी तरकीब जब कारगर होती न दिखी तो जिलाधिकारी पत्रकारों से हाथापाई पर उतर आए। इसके बाद कुछ पत्रकार वहां से खिसक लिए और कुछ एक अधिकारियों के तलवे सहलाने में जुट गए। इस बीच प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में फोर्स ने हॉस्टल खाली करा लिया।

वाराणसी में न्यूज चैनल के रिपोर्टर को जान से मारने की धमकी, रिपोर्ट दर्ज

वाराणसी : यहां के एक न्यूज चैनल डेन काशी के लंका-भेलूपुर के रिपोर्टर ओमकार नाथ को जान से मारने की धमकी दी गई है। घटना से लंका पुलिस थाने के एस ओ को मौखिक रूप से अवगत कराने के साथ ही रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई है।

सपा अध्यक्ष ने दरोगा की जीभ काट लेने की धमकी दी, आईपीएस अमिताभ ने की डीजीपी से जांच की मांग

वाराणसी : सपा सरकार के जमाने में जो न हो जाए, कम ही है. वाराणसी जिले के सिगरा थाने के लल्लापुर चौकी के दारोगा रामसरीख को पहले तो समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष राज कुमार जायसवाल ने फोन पर जीभ काटने की धमकी दी। इसके बाद एसएसपी ने कार्य की लापरवाही बरतने के आरोप में चौकी प्रभारी को लाइनहाजिर कर दिया। इस बीच सोशल मीडिया पर एक रिकॉर्ड आडियो वायरल हो गया। रिकार्ड में सुनाई दे रहा है कि सपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार जयसवाल दरोगा की जुबान काटने की धमकी दे रहे हैं। साथ ही कई एसओ के जिला कार्यालय में बैठे होने की  बात कहते हुए बता रहे हैं कि कई दरोगा तुम्हारी शिकायत कर रहे हैं। तुम्हे लाइन में बैठा दूंगा। 

वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय को मिलेगा जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार

वाराणसी : श्रीमठ, काशी की ओर से प्रतिवर्ष दिया जाने वाला एक लाख रुपये का जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार इस वर्ष देश के जाने-माने पत्रकार औऱ राजनीतिक विश्लेषक रामबहादुर राय को दिया जाएगा। स्वामी रामानंद जयंती के अवसर पर वाराणसी के नागरी नाटक मंडली सभागार में 12 जनवरी को संध्या समय राय साहब को एक लाख रुपये नकद, अंग वस्त्रम्, प्रशस्ति पत्र आदि प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

रायपुर से लेकर लखनऊ वाया बनारस तक कौन-कौन ‘फासीवाद’ का आपसदार बन गया है, अब आप आसानी से गिन सकते हैं

Abhishek Srivastava : मुझे इस बात की खुशी है कि रायपुर साहित्‍य महोत्‍सव के विरोध से शुरू हुई फेसबुकिया बहस, बनारस के ‘संस्‍कृति’ नामक आयोजन के विरोध से होते हुए आज Vineet Kumar के सौजन्‍य से Samvadi- A Festival of Expressions in Lucknow तक पहुंच गई, जो दैनिक जागरण का आयोजन था। आज ‘जनसत्‍ता’ में ‘खूब परदा है’ शीर्षक से विनीत ने Virendra Yadav के 21 दिसंबर को यहीं छपे लेख को काउंटर किया है जो सवाल के जवाब में दरअसल खुद एक सवाल है। विनीत दैनिक जागरण के बारे में ठीक कहते हैं, ”… यह दरअसल उसी फासीवादी सरकार का मुखपत्र है जिससे हमारा विरोध रहा है और जिसके कार्यक्रम में वीरेंद्र यादव जैसे पवित्र पूंजी से संचालित मंच की तलाश में निकले लोगों ने शिरकत की।”

Varanasi : This is one of the filthiest and most congested cities in the world

Jagdish Singh : I frequently c posts of my Benarasi friends praising Benaras. I fail to understand them. I have studied in BHU and lived in Benaras for quite sometime. I hardly found anything praiseworthy in this city. This is one of the filthiest and most congested cities in the world. People have no sense of cleanliness. They keep spitting all the time, majority are quite backward and ignorant, arrogant and full of blind faith, ritualistic, intolerant and they hero worship gunda type people.

बनारसी कुल थूकिहन सगरो घुला के मुंह में पान, का ई सुनत बानी अब काशी बन जाई जापान?

आजकल बनारस सुर्खियों में है… बनारस को लेकर रोज कोई न कोई घोषणा सुनने को मिल रही है…. ऐसा होगा बनारस… वैसा होगा बनारस… पर न जाने कैसा होगा बनारस…. सब कुछ भविष्य के गर्भ में है…. पर दीपंकर की कविता में आज के बनारस की तस्वीर है…. दीपंकर भट्टाचार्य कविता लिखते हैं… दीपांकर कविता फैंटसी नहीं रचतीं बल्कि बड़े सीधे और सरल शब्दों में समय के सच को हमारे सामने खड़ा कर देतीं हैं…. दीपांकर के शब्दों का बनारस हमारा-आपका आज का बनारस है जिसे हम जी रहे है… आप भी सुनिए उनकी कविता…

रस से रिक्त हो गया है पीएम मोदी का बनारस

बीते पखवाड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश के भ्रमण पर था। इसकी विधिवत शुरुआत बनारस या वाराणसी में ट्रेन से उतरने के बाद सडक मार्ग से बस के जरिये हुई। लेकिन बस के सफर ने जिस-जिस तरह के जितने झांसे दिए, धोखाधड़ी की, चकमे दिए, बस जाएगी-नहीं जाएगी, के जितने सच्चे-झूठे पाठ पढ़ाए गए, बातें बनाई गईं, आनाकानी की गई, बहाने बनाए गए, उसकी मिसाल अपने अब तक के इस जीवन में मैंने न तो कहीं देखी, न सुनी, न ही पढ़ी है। यूपी सरकार की बस पवन सेवा में आजमगढ़ जाने के लिए जब मैं पत्नी संग सवार हुआ तो उसमें पहले से सवार समस्त यात्रीगण बेहद असमंजस में फंसे अनिश्चितता के भंवर में हिचकोले ले रहे थे। बस के कंडक्टर और ड्राइवर कभी कहते बस जाएगी, कभी कहते नहीं जाएगी। कभी ऐलानिया तौर पर बोल पड़ते, उतर जाइए-उतर जाइए बस कैंसिल हो गई, अब नहीं जाएगी, दूसरी बस जा रही है, उसमें बैठ जाइए, वह आजमगढ़ जाएगी। उहापोह का ऐसा माहौल इन दोनों बस कर्मचारियों ने बना रखा था कि सारे बस यात्री बेहद परेशान हो गए।

राष्ट्रीय सहारा वाराणसी के स्ट्रिंगरो पर काम का बोझ अधिक लेकिन वेतन कम, विरोध करने पर किया जा रहा परेशान

सर जी, आपको अवगत करना चाहते है की राष्ट्रीय सहारा, वाराणसी यूनिट को शुरु हुए चार साल होने जा रहे हैं लेकिन यहां काम करने वाले स्ट्रिंगरों का वेतन एक रुपया भी नहीं बढ़ा है। सहारा श्री के जेल जाने से पहले तक अधिकारी सभी को परमानेंट कर देने का आश्वासन दे रहे थे। अब इस संबंध में बात भी करो तो अधिकारी नौकरी छोड़ देने की बाते करते हैं। स्ट्रिंगरो का वेतन यहाँ 36सौ रुपये से शुरु है जो अधिकतम 9 हजार तक है।

भाजपाइयों ने बनारस में मीडियाकर्मियों से की मारपीट

क्‍या भाजपा कार्यकर्ता भी समाजवादी पार्टी की राह पर चल पड़े हैं? क्‍या उन्‍हें भी सत्‍ता का नशा हो गया है? क्‍या वे भी अब गुंडई करेंगे, पत्रकारों से मारपीट करेंगे? ये सारे सवाल तब खड़े हुए जब बुधवार को बनारस में भाजपा के कार्यकर्ता कवरेज कर रहे पत्रकारों तथा छायाकारों से भिड़ गए, उनसे मारपीट किया.

वाराणसी के सांस्कृतिक पत्रकार शायद सांस्कृतिक थे भी नहीं और हो भी न पाएंगे!

प्रिय भड़ास, कहीं से सुना की आपके ब्लॉग पर यदि भड़ास निकली जाये तो उसे गंभीरता से ले लिया जाता है कभी-कभार. तो उत्साहित हो उठा. मैं बनारस का एक रंगकर्मी हूँ जो अब बनारस के रंगकर्म से खिन्न होकर विदा ले चुका है. कारण बहुत से हैं. हमारा वाराणसी जितना धार्मिक रहा है उतना ही साहित्यिक भी. जैसा की आपको विदित होगा ही की हिंदी साहित्य के निर्माण में यहाँ के रचनाकारों की कितनी बड़ी तादात है. सबसे मशहूर कुछ दो लोगों का ज़िक्र करना चाहूँगा. एक भारतेंदु हरीश चन्द्र दूसरे प्रेमचंद. दोनों ही चंद अब भुलाये जा चुके हैं यहाँ. चौखम्बा स्थित भारतेंदु भवन तो फिर भी ठीक है पर लमही स्थित प्रेमचन्द निवास के क्या कहने. जाकर देखने योग्य भी नहीं है.