चुनाव आयोग की सख्ती के बाद भी भदोही में बाहुबली विजय मिश्रा का आतंक

सौ से अधिक आपराधिक मामलों का आरोपी विजय मिश्रा भदोही का एक ऐसा बाहुबली है, जो अपने ही सगे-संबंधियों की हत्या कराने के लिए कुख्यात हैं। इसके इसी हरकत पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पांच साल तक जेल के सलाखों के पीछे रखा। लेकिन, जैसे ही सपा की सरकार बनी, यादवी कुनबे के आकाओं की चरणवंदना कर न सिर्फ जेल से बाहर आया, बल्कि पांच साल के कार्यकाल में हर वह कुकर्म किया, जिससे जनता खौफ में जीने को विवश रही। अब जब चचा-भतीजे की लड़ाई में अखिलेश ने टिकट काट दिया है, तो उन्हें ही धमकी देते हुए कहा है वह भदोही ही नहीं, पूर्वांचल से सपा को नेस्तनाबूद कर देंगे। हालांकि यह उसका सिर्फ और सिर्फ गीदड़भभकी से अधिक कुछ नहीं है। इस धमकी के पीछे उसकी मंशा है किसी दूसरे दल में शामिल होकर टिकट हासिल करने की…

सुरेश गांधी

चुनाव में स्वच्छ छवि बनाने के लिए सपा के सर्वेसर्वा अखिलेश यादव ने ज्ञानपुर (भदोही) के विधायक विजय मिश्रा का टिकट काट दिया। इस बौखलाहट में उसने न सिर्फ पूर्वांचल से सपा का सूपड़ा साफ करने की धमकी दी, बल्कि भदोही के कई जनप्रतिनिधियों को धौंस के बल पर सपा से इस्तीफा भी दिलवा दिया। माना जा रहा है कि उसकी इस धमकी व करोड़ो-अरबों की काली कमाई के घनचक्कर में कोई दूसरा दल उसे अपना उम्मींदवार बना सकता है। सूत्रों पर यकीन करें तो विजय मिश्रा पिछले छह महीने से बीजेपी के संपर्क में है। प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या के साथ उसकी कई मीटिंग भी हो चुकी है। लेकिन उसके आतंक वाली छवि को लेकर बीजेपी किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है। यही कारण है कि केशव प्रसाद मौर्या से डील होने के बाद भी पार्टी आलाकमान उन्हें सीधी इंट्री देने से कतरा रहा है।

कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी विजय मिश्रा को अपना दल के अनुप्रिया गुट के जरिए अपने साथ जोड़ेगी। मतलब साफ है बीजेपी एक तीर से दो निशाना साधना चाहती है। ऐसे में बड़ा सवाल तो यही है कि चाल, चरित्र और चेहरे की बात करने वाली भाजपा का यही असली मुखौटा है। हालांकि भाजपा से भी दुत्कारे जाने पर वह प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के प्रेम चंद बिन्द से भी मिलकर चुनाव लड़ सकता है। हो जो भी, सपा ने इस बार विजय मिश्रा का टिकट काटकर रामरति बिन्द को मैदान में उतारा है।

गौरतलब है कि मुलायम, शिवपाल व रामगोपाल से नजदीकियों के चलते पूरी पार्टी ने हमेशा विजय मिश्रा को सिर आंखों पर बैठाये रखा। मौजूदा दौर में जब सपा के अंदर सत्ता का संग्राम व काली कमाई के बंटवारे को लेकर झगड़े में जब शिवपाल का कद घटा तो उसने अपना नया ठौर खोजने में ही भलाई समझी। जब अखिलेश ने टिकट काटकर बाहर का रास्ता दिखा दिया है तो अकेले ही चुनावी समर में उतरने का फैसला लिया है। उसका दावा है कि भदोही समेत आसपास के कई जिलों में अपने उम्मीदवार उतारकर सपा से अपने अपमान का बदला लेगा। उसने एमएलसी पत्नी रामलली मिश्र, उसके टुकड़ों पर पलने वाले पूर्व विधायक शारदा प्रसाद बिंद, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य आदि से इस्तीफा भी दिलवा दिया है।

पुलिस रिकार्ड के मुताबिक रुंगटा अपहरणकांड से सुर्खियों में आए विजय मिश्रा पर भदोही, इलाहाबाद समेत अन्य जनपदों में लूट, हत्या, डकैती, चोरी आदि के कुल 105 मामले दर्ज हैं। इसमें सबसे बड़ा जघन्य अपराध साल 2002 के चुनाव में ज्ञानपुर विधानसभा से बीजेपी से चुनाव लड़ रहे गोरखनाथ पांडेय के भाई रामेश्वर पांडेय की 22 फरवरी को मतदानबूथ पर हत्या किए जाने का है। हालांकि तीन-तिकड़म से इस घटना से वह बरी हो गया है। इलाहाबाद में अमवा निवासी कांस्टेबिल महेन्द्र मिश्रा व राकेशधर त्रिपाठी के भाई धरनीधर त्रिपाठी की नृशंस हत्या, पूर्वमंत्री नंदगोपाल नंदी पर आरडीएक्स विस्फोटक से प्राणघातक हमला, इलाहाबाद के प्रतापपुर में चुनाव के दौरान फायरिंग की घटना में आरोपी होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पुलिस लगा दी। हालांकि वेश बदलकर फरारी काटने के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें नैनी जेल समेत कई जेलों का सफर करना पड़ा।

सपा की सरकार बनते ही मानो उसकी लाटरी लग गयी। विधानसभा चुनाव 2017 में फिर से सत्ता पाने को बेताब कुनबे के आका शिवपाल ने पूर्वांचल के ईनामी माफियाओं को एकजुट करने का जिम्मा विजय मिश्रा को सौंपा। मन इतना बढ़ा कि अखिलेश यादव की मौजूदगी में भदोही की एक सभा मंच पर मुलायम के करीबी कालीन निर्यातक को धमकी दी थी कि अखिलेश से यारी करनी है तो घर बुलाकर करो, सभा में नहीं। इस धमकी का ही असर रहा कि अखिलेश जनता से विकास की बात कहने के बजाय विजय की शान में कसीदें पढ़ने लगे थे। विजय मिश्रा की ही साठगांठ व तीन-तिकड़म का नतीजा है कि अतीक इलाहाबाद के मंच पर चढ़े तो अंसारी बंधुओं की पार्टी कौमी एकता दल का विलय सपा में हुआ।

बता दें, यह वही बाहुबली विधायक विजय मिश्रा है जो मुख्तार अंसारी के करीबियों में से एक तो है ही भदोही समेत पूर्वांचल में सौ से अधिक हत्या, लूट, डकैती, अपहरण रंगदारी आदि के मुकदमें दर्ज है। रुंगटा अपहरण कांड में मुख्तार के साथ आरोपी भी बनाएं जा चुके है। इनकी सेटिंग-गेटिंग का हाल यह है कि अपनी बात मनवाने व अपना जलवा कायम करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है। एमएलसी चुनाव में अपनी पत्नी रामलली को जितवाने के लिए मुख्तार के धुर विरोधी बृजेश सिंह से हाथ मिलाना और उन्हें जितवाना तो एक बानगी है। इनके एक-दो नहीं सैकड़ों किस्से व कारनामे क्षेत्र में मशहूर है जिसमें वह सगे-संबंधियों को भी वाट लगाने में नहीं हिचकिचाते।

हालांकि पार्टी में अंदरुनी कलह तो काफी दिनों से थी, लेकिन बाहुबली विधायक विजय मिश्रा द्वारा बालू खनन से लेकर सड़क निर्माण सहित अन्य योजनाओं की धन के बंदरबाट व डीएम-एसपी से मिलकर पार्टी कार्यर्ताओं के उत्पीड़न, पत्रकार, कालीन निर्यातकों व संभ्रात नागरिकों पर फर्जी मुकदमा कराने के साथ ही जमीन कब्जा आदि प्रकरण के बाद सत्ता के शिखर प्रोफेसर रामगोपाल यादव, मुलायम सिंह यादव व शिवपाल सिंह यादव को अपने अकूत धन के बूते अपना गुलाम बनाकर अपनी बिटिया सीमा मिश्रा को टिकट हथिया लेने से बेबस संगठन व पार्टी कार्यकर्ता घुटन सा महसूस करने लगे थे। जिलाध्यक्ष प्रदीप यादव सहित तमाम कार्यकर्ताओं ने पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलकर अनुरोध किया कि अगर प्रत्याशी नहीं बदला गया तो न सिर्फ हम चुनाव हार जायेंगे, बल्कि पार्टी की छवि भी धूमिल हो रही है।

विजय मिश्रा के अकूत धन से दबे मुलायम सिंह यादव ने इन जांबाज कार्यकर्ताओं को डांटने के बाद यह कहकर भगा दिया कि जाओ सभी मिलकर सीमा को हरवा देना, मैं कह रहा हूं। निराश कार्यकर्ता वापस तो चले आए, लेकिन अंदर ही अंदर घुटते रहे। संगठन सहित पार्टी के जुझारु कार्यकर्ताओं को तवज्जो न देकर बाहुबली विधायक ने बूथ स्तर पर किराए के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंप दी और संगठन से यहकर बैठने को कहा कि रुपये में बड़ी ताकत होती है, 50 करोड़ रुपये खर्च कर मैं चुनाव जीत जाउंगा। लेकिन जनता ने हरा दिया।

आम जनमानस में एक ही चर्चा है, दगा किसी का सगा नही। तीन-पांच के घनचक्कर में भले ही विजय मिश्रा बरी हो गया, लेकिन सच्चाई किसी से छिपी नहीं। तिहरेकांड में मारे गए सूर्यनारायण शुक्ला के हत्यारों को सजा दिलाने का श्री मिश्रा भले ही दंभ भरता हो, लेकिन पूरा जिला जानता है कि लड़ाई वर्चस्व व ठेकेदारी की रही। डाक्टर को सजा दिलाकर पूरे जनपद में सड़क से लेकर बालू खनन तक पर कब्जा कर लिया गया। प्रतिदिन अवैध तरीके से 150-180 ट्रक बालू इब्राहिमपुर-बिहरोजपुर से विजय मिश्रा फिलिंग टोकन से जा रहा है, आखिर क्यों मौन है प्रशसन। ब्राह्मण समाज घड़ियाली आंसू बहाने वाले श्री मिश्रा को समझ चुकी है, इंतजार है तो बस उस वक्त का। निर्यातक व बुनकर वर्ग कह रहा है कि माफिया विधायक द्वारा विकास का पैसा खुलेआम बंदरबाट करने, भ्रष्टाचार को बढ़ावा व जिले को माफियाओं के हवाले कर पिस्तौल की राजनीति पनपाने के लिए इस बार सबक सिखाएंगी।

लेखक सुरेश गांधी भदोही के वरिष्ठ पत्रकार हैं. SURESH GANDHI से संपर्क iamsureshgandhi@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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