मुख्यमंत्री हरीश रावत को पीसी तिवारी से डर क्यों लगता है!

गैरसैंण : उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी को कहीं जाने से रोकने के लिए एक साल में यह दूसरी गिरफ्तारी है। गत वर्ष 10 अक्टूबर को खूंट में भारत रत्न पं गोविन्द बल्लभ पंत जयंती पर जाते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया था प्रशासन ने इसे केवल रोके रखने की कार्यवाही बताया था, संभवतः आज भी प्रशासन का तर्क रोकना ही होगा। खूंट में विरोध कार्यक्रम नहीं था बावजूद इसके उन्हें इसलिए रोका गया कि क्योंकि वहां मुख्यमंत्री को आना था। नैनीसार में भी मुख्यमंत्री को आना था इसलिए गिरफ्तारी हुई।

5 सितम्बर 15 को सल्ट के जिला पंचायत सदस्य नारायणसिंह नेगी को शहीद स्मारक खूमाड जाने से रोका गया। वहां मुख्य मंत्री हरीश रावत मुख्य अतिथि थे। मुख्यमंत्री जी, बेशक पीसी तिवारी का कद वोट के हिसाब से बहुत बड़ा न हो लेकिन राजनीति के हिसाब से आपसे उन्नीस नहीं हैं। छात्र राजनीति से सक्रिय पीसी की पहली गिरफ्तारी 1978 के वन आन्दोलन में हुई। उसके बाद तो उत्तराखण्ड और जनपक्षीय मुद्दे पर कई जेल यात्राएं हो गयी हैं।

क्या ये सवाल नहीं बनता कि पहाड़ों में भूमि आवंटन जैसे सवाल जन सुनवाई के साथ होने चाहिए? क्या आपका प्रशासन कुछ खरीद फरोख्त वाले लोगों से मिल किसी भी माफिया को भूमि आवंटित कर देगा? आपकी स्कूल हेतु भूमि देने के साथ स्थानीय अधिकारियों-कर्मचारियों व स्थानीय निवासियों को प्रवेश देने की शर्त कितनी फलदायी होगी, ये दून और नैनीताल के प्रइवेट स्कूलों से पता चल रहा है।

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार पुरुषोत्तम असनोड़ा की रिपोर्ट.



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