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सियासत

100% एथनॉल और 100% आरएसएस …इससे कम पर कुछ भी मंज़ूर नहीं!

प्रदीप चौधरी-

कल रात टीएमसी के सांसदों का शेल पार्टी में विलय देखा।

सच कहूं, मन एकदम उदास सा हो गया। इसलिए नहीं कि मुझे टीएमसी से कोई हमदर्दी है, इसलिए कि क्या सच में इस कदर लोगों की आंख का पानी मर गया है?

ये राजनैतिक लोग हैं, कोई अधिकारी नहीं कि एक बार एग्जाम पास हो गए, अब नहीं करना है। इन्हें, अगर लोकतंत्र है, तो चुनाव में जाना ही पड़ेगा, लोगों से मिलना पड़ेगा। नज़रें कैसे मिलाएंगे?

खैर! फिर लगा कि कई बार केवल महत्वाकांक्षा ही नहीं होती है, मजबूरी भी होती है।

अब सच में चाहता हूँ, कांग्रेस और सपा को भी तोड़ लिया जाए। राहुल गांधी के अलावा हो सकता है प्रियंका जी न टूटें। वो भी अगर वाडरा का गला कसके दबा दिया जाए तो कुछ नहीं, वोटिंग से एब्सटेन तो करवा ही सकते हैं। बाकी तो कोई भी कहीं जा सकता है।

यही हाल अखिलेश जी का है। वो और डिंपल जी को छोड़कर पूरी पार्टी जा ही सकती है। उसमें भी अखिलेश जी के पास भी परिवार है। बिटिया का चरित्र हरण अभी किया ही गया, थोड़ा और कर देंगे तो वो भी जा सकते हैं।

कुल मिलाकर राहुल जी को विपक्ष में छोड़कर 542 एक तरफ़ कर लेना चाहिए। जिससे जो हिंदू राष्ट्र का यूटोपिया है, उसको भी देख ही लें, जो बाकी जीवन है उसमें। हो सकता है वही लोगों के भले में हो। नए तरीके से देश का संविधान लागू किया जाए। जो-जो ग़लतियाँ नेहरू ने की थीं, उन्हें सही किया जाए। कई हिंदू धर्म के बड़े धर्मगुरुओं को सुना है, वो कहते हैं कि हिंदू धर्म में लोकतंत्र की व्यवस्था नहीं है, तो माननीय मोदी जी के बाद किसी क्षत्रिय को सत्ता दे दी जाए। योगी जी सबसे फिट आदमी हैं। कुछ दिन यह भी देख लिया जाए।

वैसे भी भविष्य लोकतंत्र का है भी नहीं, क्योंकि मास की जरूरत अब दिख नहीं रही। घरेलू काम के लिए भी AI, रोबोट ट्रेन किए जा ही रहे हैं। जल्द ही वो काम, जिनमें ज़्यादा आदमियों की ज़रूरत होती थी, वह रोबोट कर देंगे। तो आम आदमी की ज़रूरत रह नहीं जाएगी, तो उसके वोट की भी कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि उन्हें ख़ुश रखना अब राजा या सरकार की कोई जरूरत नहीं है।

तो सरकार को इस दिशा में सच में काम करना चाहिए। जैसे सरकार ने 10-20% नहीं बल्कि सीधे 100% एथनॉल ला रही है उसी से गाड़ी चलाना है, उसी प्रकार 100% आरएसएस वाली सरकार बनानी चाहिए, जितने भी आरएसएस विचार धारा के लोग हों, उनमे अगर एक प्रतिशत भी आरएसएस है तो सबको साथ लाना चाहिए।

एटलीस्ट एक बार आरएसएस या हिंदू राष्ट्र का पूरा आइडिया खुल के कुछ साल चला कर देख ही लिया जाए। नहीं ठीक होगा तो अगर हमारी नेक्स्ट जनरेशन, अगर धरती बचाने के लिए, ख़त्म नहीं कर दी गई, क्योंकि मास ही तो पॉल्यूशन कर रहा है, तो धरती और पर्यावरण बचाने के लिए उनकी बलि ज़रूरी तो लगती है। तो लड़कर कोई न कोई देश चलाने का नया मॉडल डेवलप तो कर ही लेगा, जैसे हमने अंग्रेजों को हटाकर लिया था।

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