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महिला पत्रकार ने ऑटो में जब मनचले को जड़ा झन्नाटेदार थप्पड़

नई दिल्ली। दोपहर का वक्त था। डांस क्लास के लिए मुझे देरी हो रही थी। जल्दी-जल्दी अपना सामान समेटकर मैं दफ्तर से निकल गई। मुझे नोएडा सिटी सेंटर जाना था। मैं सेक्टर 62 के पास एक शेयर्ड ऑटो में बैठ गई। ऑटो में मेरे ठीक सामने अधेड़ उम्र का एक आदमी बैठा था। पहले उसने मुझे घूरना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे छूने की कोशिश की। चूंकि ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए मैं पहले ही मन बना चुकी हूं, इसलिए बिना सोचे-समझे उसे एक झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर दिया। थप्पड़ की आवाज़ सुनकर ऑटो में हर कोई सन्न रह गया।

दोपहर का वक्त था। डांस क्लास के लिए मुझे देरी हो रही थी। जल्दी-जल्दी अपना सामान समेटकर मैं दफ्तर से निकल गई। मुझे नोएडा सिटी सेंटर जाना था। मैं सेक्टर 62 के पास एक शेयर्ड ऑटो में बैठ गई। ऑटो में मेरे ठीक सामने अधेड़ उम्र का एक आदमी बैठा था। पहले उसने मुझे घूरना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे छूने की कोशिश की। चूंकि ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए मैं पहले ही मन बना चुकी हूं, इसलिए बिना सोचे-समझे उसे एक झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर दिया। थप्पड़ की आवाज़ सुनकर ऑटो में हर कोई सन्न रह गया।

तिलमिलाया मनचला बार-बार सफाई देने लगा। मैं उसे जवाब नहीं दे रही थी। तभी बगल में बैठी एक लड़की ने कहा कि शर्म करो…वरना फिर पीटेंगे।  मामला यहीं ख़त्म नहीं हुआ। ऑटो में बैठा एक दूसरा शख़्स बोल पड़ा कि लड़कियां भी कम नहीं हैं। वो ख़ुद चाहती हैं कि कोई उन्हें छेड़े। इतना सुनने के बाद मेरे सिर पर खून सवार हो गया। मैंने तय किया कि अब पुलिस को बुलाऊंगी। घास चरने गई अक्ल शायद हवालात में पिटाई के बाद वापस आ जाए। मेरे तमतमाए चेहरे को देखकर दोनों समझ गए कि अब बात बिगड़ जाएगी। दोनों दुबक गए। नोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन आ चुका था। मैं भी अपने डांस क्लास के लिए आगे बढ़ गई।

नोएडा के एक मीडिया हाउस में काम करने वाली महिला पत्रकार के फेसबुक वॉल से.

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2 Comments

2 Comments

  1. RAKESH KUMAR

    April 4, 2016 at 10:16 am

    महिला पत्रकार ने जो भी कुछ किया, वो बिलकुल सही था
    मगर हम सब एक बात से आज भी हैरान है की, शेयरिंग ऑटो में आज भी कॉलेज की लड़की या कोई औरत
    बीच में बैठने से डरती है, या असुरक्षित महसूस करती है, फिर वो चाहे केवल पांच मिनट का ही सफ़र क्यों ना हो, महिला कभी भी उसमे सफ़र नहीं करती…
    ये सब डर का ही कारण है, फिर वो चाहे मेरी बहन या माँ या फिर मेरी कोई भी महिला मित्र ही क्यों ना हो,
    लडकियों को हमेशा ये डर सताता रहता है, की उनके इस कदम से उनको कोई बड़ा नुकसान हो सकता है…

    हालाकि जब हम पुरुष भी शेयरिंग ऑटो में सफ़र करते है, और महिला हमारे दाए या बाए होती है,तो हम खुद भी अपने आपको असुरक्षित महसूस करते है,
    की कही बिना किसी गलती के हम पर इस तरह का आरोप ना लग जाए…
    ऐसे किस्से आये दिन हमको देखने को मिल जाते है, फिर चाहे वो शहर दिल्ली हो या फिर मुंबई…
    मगर जब कोई ऐसी घटिया हरकत करता है, तो “इंसान” होने के कारण आप उसको बड़ी आसानी से जज कर लेते हो…

    बात तो गंभीर है…इस पर सबकी राय होनी जरूरी है

  2. Ravi Pratap Singh

    July 23, 2019 at 9:44 pm

    Bhai swabhiman bhi koi chij hai ,har bahan ko kuch aisa hi Karna hoga

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