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‘द हिंदू’ अख़बार ने आज के संपादकीय में मोदी-योगी सरकारों को खरी-खरी सुना दी!

वीरेंद्र यादव-

आज ‘दि हिन्दू’ अखबार ने भी अपने धारदार संपादकीय में यह स्पष्ट लिखा है कि ‘मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ताओं की सम्पत्ति का बुलडोजीकरण कानून के शासन के लिए एक चुनौती है.’ इसके पूर्व इन्डियन एक्सप्रेस, दि टेलिग्राफ और टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी इस बुलडोजीकरण के विरुद्ध अपने संपादकीय लिखे ही थे.

ध्यान देने की बात है कि ये सब अंग्रेजी के अखबार हैं. क्या हिंदी के अखबारों ने भी कोई संपादकीय लिखा है? नहीं लिखा है तो यह क्यों न. माना जाए कि वे ‘हिंदी, हिन्दू, हिंदुस्थान’ का नारा बुलंद करने वालों में हैं? क्या यह वही हिंदी है जिसमें प्रेमचंद , गणेश शंकर विद्यार्थी और यशपाल सरीखे लेखकों बौद्धिकों ने लेखन और पत्रकारिता की थी!

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