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एसी नेल्सन का दिलचस्प सर्वे देखें : अख़बार और न्यूज चैनल की बजाय सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ा भरोसा!

Amitaabh Srivastava-

ऐसे सर्वेक्षणों के माध्यम से तमाम भारतीय मीडिया ब्रांड अक्सर अपनी-अपनी श्रेष्ठता का दावा करते रहते हैं। एसी नेल्सन के इस सर्वे के निष्कर्ष इस अर्थ में दिलचस्प हैं कि डिजिटल के दौर में अब लोगों का भरोसा पारंपरिक सूचना स्रोतों (अख़बार और न्यूज चैनल) के बजाय सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ रहा है।

यानी हमारे देश के मुख्यधारा के मीडिया की विश्वसनीयता कम हुई है। सर्वे के मुताबिक टाइम्स ऑफ़ इंडिया के बाद सबसे भरोसेमंद सूचना स्रोत ट्विटर, बीबीसी वर्ल्ड न्यूज और फ़ेसबुक हैं। द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस जैसे प्रतिष्ठित गंभीर मीडिया ब्रांड सर्वोच्च दस नामों की सूची से बाहर हैं।

एक मज़ेदार बात यह भी है कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया तो सबसे ऊपर है लेकिन उसी संस्थान का न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ नीचे से दूसरे पायदान पर है। यानी उसके न्यूज चैनल पर भरोसा सबसे कम है। खैर, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की मौजूदा पत्रकारिता की ‘धार’ तो अभी हाल में अतीक अहमद से जुड़े प्रकरण की कवरेज में दिख ही चुकी है।

सोशल मीडिया पर बढ़ते भरोसे और निर्भरता के मद्देनज़र इस माध्यम का गंभीरता से और सकारात्मक इस्तेमाल करना चाहिए ताकि लोगों तक सही सूचनाएँ और बहुआयामी विश्लेषण पहुँच सकें।


गौरव शर्मा-

देखिए भारत के आम लोगों का भरोसा… पहले थोड़ा इस खबर को समझ लीजिए, ये एसी नेल्सन का सर्वे हैं, जो टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार में छपा है। इस सर्वे को बहुत विश्वनीयता माना जाता है। सर्वे का कहना है कि भारत में लोग खबरों के मामले में किस पर अधिक भरोसा करते हैं। लोगों के भरोसे करने के अनुसार, इसमें खबरों के सही होने के विश्वास के मामले में पहले पर टाइम्स ऑफ इंडिया, दूसरे पर ‘ट्विटर’, तीसरे पर बीबीसी, चौथे पर ‘फेसबुक’, पांचवे-छठे पर फिर दो भारतीय मीडिया संस्थान, उसके बाद 7 वें पर ‘इंस्टाग्राम’ का नंबर है। कई बड़े अंग्रेजी के अखबार और चैनल इस लिस्ट में नहीं है। हिंदी अखबारों का अता पता तक नहीं है। ये हो रहा एक दुखद पतन है। ऐसा नहीं होना चाहिए…

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1 Comment

1 Comment

  1. Uday

    April 3, 2023 at 4:20 pm

    हिंदी अखबारों का अता पता तक नहीं है।
    Hona bhi nahin chahiye. Sabase jyada hindi ke pathak hone par bhi hindi news channel aur akhabaro ne khud ka patan karane men koi kasar nahin Chodi. Hindi ke ikke dukke patrakar hai jo akele jooz rahe hai…Rashtrabhasha hone se kya hota hai…imandari aur vajood bhi hona chahiye

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