Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

‘आदिपुरुष’ में मर्यादा का राम नाम सत्य !

प्रकाश हिंदुस्तानी-

भगवान राम ने सीता माता के लिए शिव का धनुष और अन्याय पर विजय के लिए रावण का घमंड तोड़ा था, लेकिन आदिपुरुष बनानेवालों ने राम की मर्यादा तोड़ दी। पूरी फिल्म में यही लगता रहा कि कहीं बाहुबली का अगला पार्ट तो नहीं देख रहे।

फिल्मों में रचनात्मकता की आजादी है लेकिन ओटीटी फिल्म के टेम्पलेट में अगर राम कथा को फिल्माने की कोशिश करेंगे तो माया मिलेगी ना राम। नए ज़माने की रामायण बनाने की कोशिश राम की मर्यादा का राम नाम सत्य कर दिया।

रामकथा से तो सभी परिचित हैं। लोग फिल्म देखने इसीलिए गए कि रामायण की कहानी को वीएफएक्स तकनीक से कितनी सुंदरता से दिखाया जाता है। रावण सेना ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ वाले नाइटवॉकर्स जैसी बना दी। करोड़ों लोगों के आराध्य हनुमानजी के चरित्र में कॉमेडी घुसाने की कोशिश जमी नहीं।

लंका दहन के पहले हनुमान बने पात्र के मुंह से यह डायलॉग शायद ही किसी को जमा, जब रावण-पुत्र इंद्रजीत बजरंग बली की पूंछ में आग लगाने के पहले पूछता है -”जली?”

हनुमानजी कहते हैं -“तेल तेरे बाप का। कपड़ा तेरे बाप का। और जलेगी भी तेरे बाप की।”

फिल्म के अंत में राम कहते हैं -”ऐ रावण, आ रहा हूँ मैं, अपने दो पैरों से तेरे दस सिर कुचलने!”

राम कोई जय या वीरू हैं और रावण गब्बर? राम अगर अयोध्या के नरेश और मर्यादा पुरुषोत्तम हैं तो रावण भी परम ज्ञानी और लंकापति हैं। क्या मर्यादा पुरुषोत्तम किसी राष्ट्राध्यक्ष का नाम लेकर ऐसी बात कहेंगे? रामायण के हरेक पात्र की विशेष छवि हमारे हृदय में अंकित है, इसलिए उससे प्रयोग नहीं करना चाहिए।

भगवान राम के अनेक नाम हैं। इस फिल्म में राम राघव हैं, लक्ष्मण शेष हैं, सीता माता जानकी हैं और हनुमान का नाम बजरंग है। भगवान राम के रघुकुल में जन्म लेने के कारण ही राघव, रघुवीर, रघुनंदन, रघुराज आदि कहा जाता है।

रामायण के सात भाग हैं जिन्हें काण्ड कहा गया है, इस फिल्म में अरण्य कांड का थोड़ा हिस्सा है और फिर सुन्दर कांड। लंका कांड का अधूरा चित्रण है।

फार्मूला फिल्मों के स्टाइल में राम और सीता के वनवास के कुछ दृश्यों को रोमांटिक बनाने की कोशिश हास्यास्पद है। लम्हे फिल्म में जैसे श्रीदेवी की साड़ी लहराती है वैसे ही सीता मैया का आँचल लहराना, पार्श्व में रोमांटिक सा गाना बजना अटपटा लगता है।

उजले पक्ष भी हैं इस फिल्म के।

रावण के दस मुंह में पांच आगे और पांच पीछे दिखाए गए हैं जो आपस में बात भी करते हैं और बहस भी। सोने की लंका में रोम के पत्थरों जैसे महल और दुबई जैसी अट्टालिकाएं तकनीक का कमल हैं। रावण एक बार भी सीता को छूने का प्रयास नहीं करता। जटायु का संघर्ष और सीता हरण के दृश्य तकनीक ने बेहद रोमांचक बना दिए। यह फिल्म 5 भारतीय भाषाओं में आई है और 29 देशों सहित 6000 से ज़्यादा सिनेमाघरों में एक साथ लगी।

रामायण को केवल तीन घंटों में दिखाना संभव नहीं है। 3डी तकनीक के साथ ही यह फिल्म डॉल्बी ध्वनि के आगे की एटमोस तकनीक पर उपलब्ध है। फिल्म में जय श्री राम के घोष के साथ के गीत आकर्षक हैं।


नेपाल ने तो इस फ़िल्म पर स्टैंड ले लिया कि सीता जी का जन्मस्थान जब तक सही नहीं होगा फ़िल्म नहीं चलेगी थियेटर में। भारत कब जागेगा जो रोटी बेटी का सम्बन्ध बताता है??
महा वाहयात डायलॉग अपने आराध्य के लिए कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं ? कहाँ है करणी सेना, बजरंग दल वाले? सेंसर बोर्ड में कौन से लोग बैठे थे जिन्होंने ऐसे संवाद को पास कर दिया?? बलिहारी है उनकी बुद्धि को। -ममता त्रिपाठी

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन