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सियासत

छपने के बाद रिज़र्व बैंक जाते नोट में से 88 हज़ार करोड़ ग़ायब!

रवीश कुमार-

कैसी कैसी ख़बरें छपती हैं। 88 हज़ार करोड़ के पाँच सौ रुपये के नोट छापा ख़ाने से रिज़र्व बैंक के बीच ग़ायब हो गए। जितना पैसा प्रिंटिंग प्रेस से चला, उतना पहुँचा नहीं ।

RTI कार्यकर्ता ने भी खूब दिमाग़ लगाया होगा। सवाल कैसे पूछा होगा कि जवाब ऐसे आ जाए।

इस पर हंगामा मचना चाहिए। हमारी तो समझ से बाहर है। अगर यही में इतना पैसा ग़ायब हुआ तो किसे मिला? उसने इतने पैसे का क्या किया होगा? रिज़र्व बैंक को थोड़ा और बताना चाहिए । इसे केवल RTI के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए।


श्रवण शर्मा-

दुनिया की सबसे बड़ी हाई-वे रॉबरी होने की खबर सामने आ रही है. रॉबरी भी कोई छोटी-मोटी नहीं, 88 हजार करोड़ रुपये की..! आरटीआई से पता चला है कि सरकार ने 500 रुपये के करीब 8810.65 मिलियन नोट छापे थे, लेकिन रिजर्व बैंक तक सिर्फ 7260 मिलियन नोट ही पहुंचे..

लगभग 1550 मलियिन 500 रुपये के नोट रिजर्व बैंक तक नहीं पहुंचे. वहीं अप्रैल 2015- मार्च 2016 के बीच करंसी नोट प्रेस, नासिक की तरफ से 210 मिलियन 500 रुपये के नोट छापे गए, जो रिजर्व बैंक के पास नहीं पहुंचे. तो क्या ये सारे लगभग 1760 मिलियन यानी करीब 176 करोड़ 500 रुपये के नोट रास्ते से ही गायब हो गए? अगर इन नोटों की वैल्यू निकाली जाए तो वह लगभग 88 हजार करोड़ रुपये निकलती है।

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