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अमरीका के अख़बारों में पहले पन्ने पर तापमान के प्रकोप की खबरें!

रवीश कुमार-

यूरोप और अमरीका बढ़ते तापमान का प्रकोप नहीं झेल पा रहे हैं। यहां के अख़बारों के पहले पन्ने पर तापमान के प्रकोप की ख़बर छपी होती है। मुझे लंदन में एक बंदा मिला जो इटली के नेपल्स का रहने वाला था। उसने तेज़ गर्मी के कारण अपना शहर छोड़ दिया और लंदन के रेस्त्रां में काम कर रहा था। गर्मी के कारण पलायन शुरू होने लगा है। 2010 में मास्को में तेज़ गर्मी से हज़ारों लोग मर गए थे। उससे पहले 2003 में जब यूरोप में लू की लहर चली थी तो 70,000 लोग मर गए। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल यूरोप में गर्मी से 60,000 से अधिक लोग मरे हैं।

न्यूयार्क टाइम्स में आज कई बड़े न्यूज़ आर्टिकल हैं। जिनमें कई शहरों में गर्मी के हालात और उससे निपटने के बारे में बताया जा रहा है। कोपनहेगन में पार्किंग लॉट ख़त्म किए जा रहे हैं। नई ट्राम लाइनें बिछाई जा रही हैं ताकि लोग कारों का कम से कम इस्तेमाल करें। इटली में पेड़ लगाने की बात हो रही है तो अन्य शहरों में यह देखा जा रहा है कि तेज़ गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए लोग कहां-कहां शरण ले सकते हैं। पेरिस के मेयर ने दावा किया है कि 2024 में जब ओलिंपिक होगा तब तक शीन नदी को तैरने लायक बना दिया जाएगा। अभी उसका पानी तैरने के हिसाब से सुरक्षित नहीं माना जाता है। प्रदूषण के स्तर के कारण।

दूसरी तरफ वरमांट नाम के एक शहर की व्यथा पर रिपोर्ट है। इसकी राजधानी मॉपिलियर को जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से सबसे सुरक्षित माना जाता था,मगर यह शहर बाढ़ में डूब गया है। यहां की विनूस्की नदी में पहले भी बाढ़ आती रही है लेकिन इस बार की तबाही बता रही है कि बाढ़ ने नई सीमा पार कर ली है। यहां लोगों को घरों से निकालना पड़ा है। प्राकृतिक आपदाओं के लिए जो ख़तरे के निशान तय किए गए थे, वो अब बढ़ते तापमान के कारण बेमानी होते जा रहे थे। पहले सौ साल में एक बार तूफानी बारिश की तबाही होती थी, अब कहा जा रहा है कि अब हर बीस साल में ऐसी तबाही आ सकती है।

नोट- सभी ख़बरें आज के न्यू यॉर्क टाइम्स की हैं ।

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