देवेंद्र सिकरवार-
प्रोफेसी… वैश्विक अर्थव्यवस्था अब उस स्तर पर पहुँच चुकी है कि अब अगर नये आविष्कार व इनोवेशन न हुये तो वह कॉलेप्स हो जाएगी और दुनियाँ पूरी तरह केओस में डूब जाएगी।
1984 में इंटरनेट के आविष्कार ने पचास साल इसे गति दे दी, अब आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस (AI) इसे अगले बीस-पच्चीस वर्षों तक गतिमान रखेगी।
इसके बाद ‘जेनेटिक इंजीनियरिंग’ की बारी आएगी जो ‘ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट’ के रूप में अभी कारपोरेट के ‘बायो इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर्स’ में बंद पड़ी है।
पहले एसटीडी बूथ, फिर सायबर कैफे और अब…. अब जल्दी ही AI आधारित डिजिटल क्रियेटर सेंटर्स खुलेंगे जिनमें ‘सिंगल’ और ‘अतृप्त’ लोग अपने लिए वर्चुअल गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड डिजाइन करवाएंगे।
इसके बाद उन चेहरों पर आधारित सिलिकॉन लड़कियों व लड़कों के पुतले तैयार होंगे। विशेष मांग पर पसंदीदा एक्ट्रेस या एक्टर के पुतले भी तैयार किये जायेंगे जो बिस्तर में बिल्कुल वास्तविकता का अहसास दिलाएंगे। पॉर्न इंडस्ट्री का खात्मा क्योंकि ऐसे टुच्ची फिल्में तो AI पलक झपकते ही आपकी इच्छानुसार तैयार कर देगी। वेश्यावृत्ति व जिगोलो भी अतीत की बात हो जाएगी।
इसके बाद जेनेटिक इंजीनियरिंग सेंटर मैदान में उतरेंगे जो इन पुतलों को वास्तविक धरातल पर उतरेंगे।
अपने डाटा बैंक में मौजूद डीएनए की आनुवंशिक सूचनाओं से या फिर मांग पर कपल्स अपना बेबी डिजाइन करवा सकेंगे और अरबपति लोग अपने ‘हरम’ के लिए मनचाही सुंदरता वाली ‘लड़कियां’।
हाँ, मुस्लिमों और गे लोगों के लिए विशेष व्यवस्था के तहत ‘गिलमे’ भी डिजाइन किए जा सकेंगे।
इसी समय स्पेस टूरिज्म 2050 तक आकार ले चुका होगा और अंतरिक्ष यात्रा ‘स्टेटस सिंबल’ बन चुकी होगी।
कारपोरेट पूरी मानवता का डीएनए अपनी गिरफ्त में ले चुके होंगे और अगर कोई स्वतंत्र चेतना अपने आलीशान शहर से बाहर निकलकर देखने की हिम्मत जुटा भी लेगा तो वृक्ष-वनस्पति व जंतु विहीन उजाड़ भूमि पर कचरों के विशाल ढेर को देखकर आत्महत्या कर लेगा।
सरकारों का कोई अस्तित्व नहीं होगा और अगर होंगी तो वह सिर्फ दिखावे के लिए क्योंकि सिर्फ कुछ चुनिंदा कारपोरेट पूरी वैश्विक व्यवस्था को नियंत्रित कर रहे होंगे जिसमें आम आदमी या तो उत्पादन का टूल होगा या डी एन ए का स्रोत।
भविष्य में कृत्रिम डी एन ए के निर्माण द्वारा उसकी जरूरत भी समाप्त हो जाएगी। भयावह भविष्य में आपका स्वागत है जिसे अब कोई चाहकर भी रोक नहीं सकता।
हाँ, थेनोस ही हमारी आखिरी उम्मीद है अगर कारपोरेट के गुलाम ऐवेंजर्स उसे रोक न दें।


