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मीडियाकर्मियों ने मांगी छुट्टी तो ‘हिन्दुस्तान’ के संपादक ने दी गालियां!

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर प्रबंधन से मांगने पर स्वामी भक्त संपादकों को भी बुरा लग रहा है। सबसे ज्यादा हालत खराब हिन्दुस्तान अखबार की है। खबर है कि हिन्दुस्तान अखबार के रांची संस्करण के दो कर्मियों अमित अखौरी और शिवकुमार सिंह ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन प्रबंधन से मांगा तो यहां के स्वामी भक्त स्थानीय संपादक  दिनेश मिश्रा को इतना बुरा लगा कि उन्होंने पहले मजीठिया कर्मियों को ना सिर्फ बुरा भला कहा बल्कि एक कर्मचारी को तो गालियां भी दीं। बाद में इन दोनों कर्मचारियों ने विरोध किया तो उन्हें मौखिक रूप से स्थानीय संपादक ने कह दिया कि आप दोनों कल से मत आईयेगा।

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर प्रबंधन से मांगने पर स्वामी भक्त संपादकों को भी बुरा लग रहा है। सबसे ज्यादा हालत खराब हिन्दुस्तान अखबार की है। खबर है कि हिन्दुस्तान अखबार के रांची संस्करण के दो कर्मियों अमित अखौरी और शिवकुमार सिंह ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन प्रबंधन से मांगा तो यहां के स्वामी भक्त स्थानीय संपादक  दिनेश मिश्रा को इतना बुरा लगा कि उन्होंने पहले मजीठिया कर्मियों को ना सिर्फ बुरा भला कहा बल्कि एक कर्मचारी को तो गालियां भी दीं। बाद में इन दोनों कर्मचारियों ने विरोध किया तो उन्हें मौखिक रूप से स्थानीय संपादक ने कह दिया कि आप दोनों कल से मत आईयेगा।

सुरक्षागार्ड से भी कह दिया कि इनको गेट के अंदर मत आने देना। इन दो कर्मचारियों में एक डबल एमए है और एक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ सरकारी नौकरी छोड़कर पत्रकारिता में आया था। फिलहाल इस संपादक के खिलाफ दोनों कर्मचारियों ने ना सिर्फ श्रम आयुक्त से शिकायत की है बल्की दूसरे सरकारी महकमों और सुप्रीमकोर्ट को भी इत्तला कर दिया है।

बताते हैं कि २७ अक्तूबर २०१६ को वरीय स्थानीय संपादक दिनेश मिश्र ने छुट्टी नहीं देने के बहाने संपादकीय विभाग में वर्ष २००० से कार्यरत मुख्य उप संपादक अमित अखौरी को काफी जलील किया। उनका इतने से भी मन नहीं भरा तो गाली गलौज भी की। गाली का विरोध करने पर मीडियाकर्मी को बर्बाद करने की धमकी तक दे डाली। यह धमकी अमित अखौरी को १७ नवंबर को भारी भी पड़ गयी। चर्चा है कि पहले तो संपादक ने एचआर के माध्यम से काम करने से मना करा दिया, फिर संपादकीय विभाग में उनकी इंट्री रुकवा दी और तीसरे दिन गेट के अंदर आने से भी मना करवा दिया।

नौकरी से बाहर और वेतन नहीं मिलने से परेशान अमित अखौरी अब सचिव, श्रमायुक्त और उप श्रमायुक्त के यहां न्याय की गुहार लगाते फिर रहे हैं। अब तक न्याय नहीं मिलने से परेशान अमित अब दिल्ली में बैठे अपने वरीय अधिकारियों शोभना भरतिया, शशि शेखर, एचआर हेड राकेश गौतम से गुहार लगा रहे हैं। आशा है कि शायद उनकी पीड़ा का समाधान हो। संस्थान में काम नहीं करने देने से उनके सामने आर्थिक संकट आ गया है। चिंता है कि उनकी दो बेटियों की पढ़ाई कैसे होगी।

अब आइए जानते है कि दूसरे कर्मी शिव कुमार सिंह का क्या हुआ। शिव कुमार सिंह वर्ष 2000 से काम कर रहे हैं पर 1 अगस्त 2010 में कन्फर्म हुए। वह वर्तमान में वरीय उप संपादक के पद पर कार्यरत हैं। अपनी आदतों से लाचार वरीय संपादक दिनेश मिश्र ने अमित अखौरी को निपटाने के बाद टारगेट शिव कुमार सिंह को बनाया। छोटी-छोटी बातों को लेकर प्रताड़ित करना, सभी कर्मचारियों के सामने जलील करना वरीय संपादक ने रोजमर्रा में शामिल कर लिया। कर्मी शिव कुमार सिंह की गलती सिर्फ इतनी थी कि इन्होंने भी हिन्दुस्तान प्रबंधन से मजीठिया वेतन बोर्ड के तहत वेतन भत्ता समेत अन्य सुविधाएं देने की मांग की थी।

एक कर्मी मजीठिया की मांग करे यह सांमती मानसिकता वाले दिनेश मिश्रा को काफी नागवार गुजरा। उन्होंने अब शिव कुमार को भी निपटाने की ठान ली। हुआ भी ऐसे ही। ६ दिसंबर २०१६ को रोज की तरह जब शिव कुमार अपने काम पर गए तो संपादक के निर्देश पर एचआर हेड हासिर जैदी ने मौखिक आदेश के तहत उन्हें कार्यालय में घुसने से मना कर दिया। शिव कुमार ने कार्यालय में काम करने देने के लिए काफी मिन्नतें कीं पर इसका असर जैदी पर तनिक नहीं पड़ा। शिव कुमार ने जब कहा कि मैं संपादक से इस मामले में बात करना चाहूंगा तो जैदी ने साफ कर दिया कि यह सारी कार्रवाई दिनेश मिश्र के निर्देश पर ही हो रही है।

रांची में किराए के मकान में रह कर हिन्दुस्तान में काम कर रहे शिव कुमार के सामने भी आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गयी है। आपको बता दें कि हिन्दुस्तान गोरखपुर में भी इसी तरह संपादक द्वारा सुरेन्द्र बहादुर सिंह को परेशान किया गया था। वजह साफ थी कि सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगा था। संपादक ने परेशान किया तो सुरेन्द्र ने मानवाधिकार आयोग और स्थानीय पुलिस तक की शरण ले ली। 

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
मुंबई
९३२२४११३३५

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