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महज़ 48 घंटे पहले परिवार हुआ खत्म, फिर से मोर्चे पर लौटे ये पत्रकार

मदन मोहन सोनी – आगरा

इजरायल हमास युद्ध में फौजी भी शहीद हो रहे हैं। आम आदमी भी मारे जा रहे हैं। सरकारी, गैर सरकारी कर्मचारी भी मारे जा रहे हैं और इन सबके बीच आप सबके सामने इस युद्ध की पल पल की खबरें, तस्वीरें और वीडियो दिखाने वाले पत्रकार भी मारे जा रहे हैं।

आइए आज बात उस जांबाज पत्रकार/रिपोर्टर की करते हैं जो अपनी जान हथेली पर रखकर युद्ध की इस विभीषिका में रिपोर्टिंग कर रहा हैं। जिसने इन हमलों में अपनों को हमेशा के लिए खो दिया है लेकिन अपनी पीड़ा और दर्द को पीछे छोड़कर फिर से रिपोर्टिंग की दुनिया में लौट आए हैं।

वो दुनिया को गाजा में तबाही और युद्ध की तस्वीरें दिखाते रहे और खुद उनकी अपनी ज़िंदगी तबाह होती रही। वो वॉर जोन जैसी खतरनाक जगह से रिपोर्टिंग करते रहे। वो सब युद्ध के खतरे बताते रहे और फिर उनका खुद का परिवार युद्ध की इस भयानक त्रासदी के बीच सबसे बड़ी खबर बन गया। अल जजीरा के पत्रकार वाएल अल-दाह दौह का पूरा परिवार गाजा पर इजरायली हमले में मारा गया। पत्नी, बेटा, बेटी, पोता कोई नहीं बचा।

मालूम हो कि पिछले दिनों इजरायली सेना की ओर से गाजा के उत्तरी हिस्से को खाली करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद से ही अल जजीरा के ब्यूरो चीफ वाएल अल दाह दौह अपने परिवार के साथ वहां से निकलकर मध्य गाजा में नुसीरत कैंप में चले गए थे। उनका परिवार कैंप में ही रह रहा था।

पूरा परिवार हो गया खत्म

अचानक मंगलवार की देर रात हवाई हमले में अल दाह दौह की पत्नी, बेटा, बेटी और पोते की मौत हो गई। अल दाह दौह के परिवार के अन्य सदस्य मलबे के नीचे दब गए. अल जजीरा के एक क्लिप में अल दाह दौह रोते हुए भी दिख रहे हैं।

वह तब रोने लगे जब उन्होंने दीर अल-बलाह में अल-अक्सा शहीद अस्पताल के मुर्दाघर में अपने परिवार के सदस्यों की लाशों को देखा।

अस्पताल से बाहर निकलने के दौरान अल जजीरा से बात करते हुए अल दाह दौह ने कहा: जो हुआ वह साफ बताता है कि यह बच्चों, महिलाओं और नागरिकों पर हमलों की एक श्रृंखला है। मैं ऐसे ही एक हमले के बारे में यरमौक से रिपोर्ट कर रहा था तभी इज़रायली सेना ने नुसीरात सहित कई इलाकों को निशाना बनाया। मुझे लग रहा था कि इजरायली सेना इन लोगों को दंड दिए बिना जाने नहीं देगी और दुख की बात है कि वही हो गया।

अल जजीरा ने एक बयान जारी कर कहा: पत्रकार अल दाह दौह के घर को गाजा के केंद्र में नुसीरत शिविर में निशाना बनाया गया था, जहां उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के आह्वान के बाद अपने पड़ोस में शुरुआती बमबारी से विस्थापित होने के बाद शरण देने की अपील की थी। हम गाजा में बेगुनाह लोगों को अंधाधुंध निशाना बनाने और उनकी हत्या की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं। जिसकी वजह से अल दाह दौह के परिवार और अनगिनत दूसरे लोगों की जान चली गई।

अपने पूरे परिवार को इस भयानक त्रासदी में गंवाने वाले पत्रकार अल दाह दौह ने उस वक्त सबको चौंका दिया, जब इस हृदय विदारक घटना के बाद वो वापस रिपोर्टिंग करने फील्ड में पहुंच गए। ऐसे पत्रकार और पत्रकारिता को किन शब्दों से संबोधित किया जाए ! अल दाह दौह की इस जीवटता ने सबको निःशब्द कर दिया है।

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