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अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय में तलाक़ वाली खबर कितनी सही है?

मणिका मोहिनी-

अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय का रिश्ता टूटने की संभावना जताई जा रही है। खबर यह भी है कि अमिताभ बच्चन ने अपना बंगलो बेटी श्वेता नंदा के नाम इसीलिए किया है कि कहीं उनकी बहू ऐश्वर्या तलाक के बाद alimony के रूप में न मांग ले।

मैं ऐसा समझती हूं कि कोई बहु alimony के रूप में ससुर की self earned property पर अपना दावा नहीं कर सकती। Alimony पति से मिलती है, न कि ससुर से। वकील मित्र स्पष्ट करें।


जितेंद्र सिंह– ससुर के घर मे रहने का कानूनन अधिकार तो है, बाकी जानकारी नहीं।

मणिका मोहिनी- मुझे सही जानकारी है कि alimony ससुर से नहीं मांग सकती। लोग ऐसे ही अफ़वाह फैलाते हैं।

प्रीतपाल कौर- जिस घर में रह रही हो उसमें. कई बातों पर यह निर्भर करता है.

देव कुमार– वो ससुर की सेवा कर के अपना हिस्सा ले सकती है या फ़िर अपने बच्चों के लिए ससुर की संपत्ति से हिस्सा माँग सकती है। आजकल क़ानून का ग़लत इस्तेमाल बढ़ गया है।

मणिका मोहिनी– किसी की सेवा से खुश होकर कोई कुछ दे दे तो बात अलग है।

जीवन दीप विश्वकर्मा- अमिताभ की संपत्ति पर उनके रहने तक ऐश्वर्या दावा नहीं कर सकती हैं।

मणिका मोहिनी- बाद में भी वसीयत न हो तो दावा कर सकती हैं।

प्रीत पाल कौर- तलाक हो जाये तो नहीं. हाँ उनके बच्चे यानि पोता पोती दावा कर सकते हैं

नरेंद्र जायसवाल- निर्वाह भत्ता का मांग पति भी पत्नी से कर सकता है ये मामला पति और पत्नी के बीच का होता है , ससुर से मांग नही किया जा सकता है।

सलमान अरशद- कभी कभी फ़िल्म को प्रमोट करने के लिए भी ऐसी अफवाहें उड़ाई जाती हैं, इनकी कोई फ़िल्म तो नहीं आने वाली है ?

मणिका मोहिनी– नहीं। अमिताभ ने अपनी बेटी को प्रॉपर्टी दी है, तब से यह खबर उड़ी।

एन अविनाश– ऐश्वर्या की स्वयं का बैंक बैलेंस एलुमनी न मिलने के लिए पर्याप्त है।

मणिका मोहिनी- सही बात। लड़की खुद कमाती हो तो उसे alimony नहीं मिलती।


सर्जना शर्मा-

बड़े अमीरों की नकल में पिसते मध्यम और निम्न मध्यम वर्गीय परिवार… आजकल सोशल मीडिया पर अमिताभ बच्चन का अपना प्रतीक्षा बंगला अपनी बेटी श्वेता के नाम किए जाने की बहुत चर्चा है । बहुत महिमा मंडन है बढ़ चढ़ कर लिखा जा रहा है । सब महिलाएं अपने अपने दिल की भड़ास और अरमान निकाल रही हैं । लेकिन मेरी सोच अनुभव और राय दूसरी है । मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूं । आगे बढ़ने से पहले एक बात साफ कर दूं कि मेरा पिता का संपत्ति में हिस्सा लेने के बारे में कुछ व्यक्तिगत लेना देना नहीं है ।

अमिताभ बच्चन एक अति अमीर व्यक्ति हैं वे अपनी बेशुमार दौलत में से बेटी को कुछ भी दे सकते हैं उनके दो ही बच्चे हैं । लेकिन इस बड़े आदमी के उदाहरण अब मध्यम और निम्न मध्यम वर्गीय . परिवारों में भी दिए जायेंगें । जरा सोचिए दिल पर हाथ रख कर उन परिवारों के बारे में जिनमें एक पिता अपनी कमाई से बेटी और बेटे को समान शिक्षा देता है बेटी के विवाह पर बेटे से ज्यादा खर्च करता है । कर्ज भी लेता है । क्योंकि उसकी बेटी को भी वैसे ही विवाह करवाना है जैसे फलां फिल्मी एक्ट्रैस का हुआ जैसे फलां उद्योगपति की बेटी का हुआ । प्री वेडिंग शूट करवाना है सगाई ,हल्दी, मेंहदी ,संगीत सब फंक्शन रखवाने हैं । हज़ारों लाखों का लंहगा खरीदना है मेकअप बुकिंग करवानी है । बेचारे माता पिता अपनी बेटी का दिल रखने के लिए सब कुछ करते हैं ।

एक छोटी नौकरी दुकान या छोटे से बिजनेस से पैसा जोड़ कर एक मध्यम वर्गीय आदमी अपना घर भी बनाता है । बहन की शादी हो गयी अपने ससुराल चली गयी । अब मान लिजिए तीन या चार भाई बहिन है और सब अपना अपना हिस्सा मांगने लगें तो क्या होगा मकान बेचना पड़ेगा सबको बराबर का हिस्सा मिल जाएगा लेकिन क्या उस पैसे से किसी का भला हो पाएगा । चलो हिस्सा भी ले लिया फिर भाईयों से छुछक , भात ,भाईदूज , राखी , हरियाली तीज , संक्रात होली दीवाली पर फर्ज निभाने की भी उम्मीद रखती हैं । यदि बराबरी का दर्जा है बराबर पढ़ाई पर खर्च बराबर शादी पर खर्च फिर त्यौहारों की उम्मीद क्यों ।

मेरे सामने ,ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं जहां बहनें अपने भाइयों से मुकदमें लड़ रही हैं । विकट परिस्थियों में भाई को पुश्तैनी मकान बेच कर किराए के मकान में रहना पड़. रहा है क्योकि बहन को बराबर का हिस्सा देना था । बहन तो एक बार न भी मांगे लेकिन ससुराल वाले इतना दबाव बनाते हैं कि मुकदमा करवा देते हैं । सच कहूं हमारे मी लार्डस ने हमारे समाज के सुंदर पारिवारिक नातों को छिन्न भिन् कर दिया है । हमारी समृद्ध और मजबूत पारिवारिक व्यवस्था टूट रही है बिखर रही है । कानून कभी दिलों को जोड़ नहीं सकता ।

केवल बेटियां ही क्यों आजकल बहुओं ने भी घरों में सपंत्ति को लेकर विवाद खड़े कर रखे हैं । तलाक इतने मंहगे हो गए हैं कि अब लोग अपने बेटों की शादियां करने से डरने लगे हैं । संपत्ति पाने के लिए ससुर जेठ देवर सब पर यौन शोषण के आरोप लगाना आम बात हो गयी है । समाज में बदनामी के डर से अनेक लड़कों के पिता और लड़के आत्म हत्या कर लेते हैं । महिलाओं को सशक्त करने का मतलब घरों को तोड़ना नहीं है रिश्तों के ताने बाने को तोड़ना नहीं है ।

आज हमें ये समझना होगा हिंदु परिवार भारत विरोधी हिंदु विरोधी ताकतों के निशाने पर है । जानबूझ कर ऐसे ऐसे कानून लाए जा रहे हैं कि घर टूट जाएं परिवार छिन्न भिन्न हो जाएं । जब तक हिंदू समाज समझेगा तब तक बहुत देर हो जाएगी । मैं बेटियों को संपत्ति में हिस्सा देने के विरुद्ध नहीं हूं पिता के पास अमिताभ बच्चन ,मुकेश अंबानी की तरह अकूत दौलत है तो क्या आपत्ति है जरूर मिलना चाहिए हिस्सा लेकिन एक मध्यम वर्गीय परिवार जिसने पाई पाई जोड़ कर अपने लिए जीवन भर की कमाई से घर बनवाया क्या वो अपने बेटों के साथ उस घर में आराम से अपना बुढ़ापा नहीं बिताना चाहेगा । बेटियां हिस्सा मांगेगी तो क्या घर बेचना नहीं पड़ेगा । अमीरों की नकल में मध्यम वर्गीय परिवार पिस रहे हैं ।

वैसे यदि देखा जाए तो आम घरों में मां का झुकाव बहु से ज्यादा बेटी की तरफ होता है । वे सामने और चोरी छुपे खूब देती हैं अपनी बेटियों को शादी ब्याहों में बहु से ज्यादा सोना बेटी को चढ़ाया जाता है । त्यौहार बार पर भी गहना कपड़ा मिठाई आदि खूब भेजा जाता है । लड़कियों को भी कसम लेनी चाहिए कि पिता ने उनकी पढ़ाई में जितना पैसा लगाया नौकरी मिलने पर लौटायेगी । विवाह सादगी से करेंगी । विवाह के बाद किसी त्यौहार पर बच्चे होने पर छुछक , बच्चों की शादी में भात नहीं लेंगी । फिर ले लें अपना हिस्सा । लेकिन मध्यम वर्गीय पिता और भाइयों का जीवन बरबाद न करें ।

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