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अफगानिस्तान में शुरू हो रहा है पहला वूमन्स टीवी चैनल

प्रेजेंटर से लेकर प्रोड्यूसर तक पूरा स्टाफ भी महिलाएं होंगी… चैनल पर देश में होने वाली हिंसक घटनाओं के अलावा हेल्थ, म्यूजिक और महिलाओं के कार्यक्रम दिखाए जाएंगे.. 

काबुल : मीडिया में महिलाओं के काम करने के लिहाज से अफगानिस्तान का नाम दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में शुमार है, पर रविवार से देश में पहला महिला टीवी चैनल शुरू होने जा रहा है। चैनल में प्रेजेंटर से लेकर प्रोड्यूसर तक पूरा स्टाफ महिलाओं का ही है। चैनल का नाम वूमन्स टीवी है। अफगानिस्तान में वैसे तो कई ऐसे टीवी चैनल हैं, जहां रोजाना महिलाएं खबर पढ़ती हुई दिखाई देती हैं, लेकिन वूमन्स टीवी पर हर समय सिर्फ महिलाएं ही दिखाई देंगी।

प्रेजेंटर से लेकर प्रोड्यूसर तक पूरा स्टाफ भी महिलाएं होंगी… चैनल पर देश में होने वाली हिंसक घटनाओं के अलावा हेल्थ, म्यूजिक और महिलाओं के कार्यक्रम दिखाए जाएंगे.. 

काबुल : मीडिया में महिलाओं के काम करने के लिहाज से अफगानिस्तान का नाम दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में शुमार है, पर रविवार से देश में पहला महिला टीवी चैनल शुरू होने जा रहा है। चैनल में प्रेजेंटर से लेकर प्रोड्यूसर तक पूरा स्टाफ महिलाओं का ही है। चैनल का नाम वूमन्स टीवी है। अफगानिस्तान में वैसे तो कई ऐसे टीवी चैनल हैं, जहां रोजाना महिलाएं खबर पढ़ती हुई दिखाई देती हैं, लेकिन वूमन्स टीवी पर हर समय सिर्फ महिलाएं ही दिखाई देंगी।

इस चैनल पर देश में रोजाना होनी वाली हिंसक घटनाओं के पीछे के फैक्ट्स और हाईलाइट्स को दिखाया जाएगा। इसके अलावा हेल्थ और म्यूजिक प्रोग्राम भी दिखाए जाएंगे। चैनल में काम करने वाली कई महिलाओं को घरवालों ने मीडिया में काम करने की अनुमति भी नहीं दी थी, इसके बावजूद उन्होंने मीडिया को अपनाया है। उनमें से एक खातिरा अहमदी हैं, जिन्होंने घरवालों का विराेध कर मीडिया को करियर चुना है।

20 साल की अहमदी चैनल में प्रोड्यूसर हैं। कहती हैं ‘मैं इससे जुड़कर काफी खुश महसूस कर रही हूं। इस चैनल को महिलाओं के लिए शुरू किया गया है, क्योंकि हमारे समाज में महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर जागरूक नहीं हैं। इसलिए यह चैनल महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने के साथ उनकी आवाज भी उठाएगा। ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकें। मैं यहां अपना अनुभव भी साथियों के साथ शेयर करने आई हूं। यहां अन्य लड़कियों को काम करते देखकर बहुत अच्छा लगता है।

वूमन्स चैनल के फाउंडर हामिद समर कहते हैं ‘देश के बड़े शहरों में काफी संख्या में महिला दर्शक हैं, काबुल के लोग तो खबरों और चर्चाओं के भूखे हैं। वे अपने अनुभवों को व्यक्त करना चाहते हैं। यहां महिलाओं और मीडिया के अधिकारों को लेकर काफी चर्चा होती रही है, पर कभी उनके लिए कुछ खास नहीं किया गया। इसलिए हमने सोचा क्यूं महिलाओं के लिए कुछ किया जाए।’

हालांकि चैनल में अभी 16 पुरुष टेक्नीशियन, ग्राफिक्स, कैमरा और एडिटिंग के लिए रखे गए हैं, जो शुरूआती दिनों में महिला साथियों को ट्रेंड करेंगे। काबुल में अभी करीब 40 टीवी चैनल हैं। इस चैनल की सोशल मीडिया और देश भर में काफी चर्चा है। 2001 में तालिबान के खात्मे के बाद देश में महिलाओं, शिक्षा और मीडिया के लिए स्वतंत्रता का माहौल कायम करना सरकार और विदेशी संस्थाओं की बड़ी कामयाबी है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Harshad BRHMBHATT

    June 2, 2017 at 1:54 pm

    It good ieda..b ragular up grad nu

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