नई दिल्ली, 13 जुलाई। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के टेंडरों में कथित मिलीभगत और प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों पर Competition Commission of India (CCI) ने अब तक की बड़ी कार्रवाई करते हुए HP India पर 126.87 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही HP इंडिया के पांच अधिकृत रीसेलरों पर भी कुल मिलाकर लगभग 1.22 करोड़ रुपये का दंड लगाया गया है।
सीसीआई ने अपने 13 जुलाई 2026 के आदेश में कहा है कि HP India और उसके पांच अधिकृत रीसेलरों ने मिलकर ऐसे तरीके अपनाए, जिनसे बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। आयोग ने सभी पक्षों को भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियां तत्काल बंद करने का भी निर्देश दिया है।
GeM टेंडरों में कीमतें तय कर रही थी HP!
सीसीआई के अनुसार जांच में पाया गया कि HP India अपने अधिकृत रीसेलरों को स्वतंत्र रूप से प्रतिस्पर्धा करने देने के बजाय बोली (Bid) की कीमतें खुद तय कर रही थी। इतना ही नहीं, GeM टेंडरों में कौन-सा डीलर भाग लेगा और कौन नहीं, इस पर भी कंपनी प्रभाव डाल रही थी। आरोप है कि HP इंडिया जरूरत पड़ने पर अधिकृत डीलरों को ऑथराइजेशन रोककर टेंडर प्रक्रिया को अपने हित में मोड़ती थी।
यानी सरकारी खरीद में जहां सबसे कम कीमत और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए थी, वहां कंपनी पर पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने का आरोप सिद्ध हुआ।
पांच रीसेलर भी मिले दोषी
सीसीआई ने जिन पांच कंपनियों को HP इंडिया के साथ मिलीभगत का दोषी पाया, वे हैं-
- Delphi Infosolutions
- Digitech Computers
- Orbit Techsol
- Hind Technocare
- Krishna Computers
आयोग के अनुसार ये सभी कंपनियां HP इंडिया के साथ मिलकर प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों में शामिल थीं और स्वतंत्र कारोबारी इकाइयों की तरह व्यवहार नहीं कर रही थीं।
खुद HP ने खोला राज!
इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जांच की शुरुआत HP India द्वारा दायर Lesser Penalty Application से हुई। कंपनी ने प्रतिस्पर्धा कानून की धारा 46 के तहत आवेदन देकर कार्टेल की जानकारी आयोग को उपलब्ध कराई थी। इसके बाद जांच में उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने विस्तृत निष्कर्ष निकाले।
अधिकारियों पर भी गिरी गाज
सीसीआई ने केवल कंपनियों को ही नहीं, बल्कि HP India और उसके रीसेलरों के संबंधित अधिकारियों को भी प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 48 के तहत जिम्मेदार ठहराया है और उन पर भी आर्थिक दंड लगाया है।
सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल
यह कार्रवाई ऐसे समय आई है जब GeM पोर्टल को सरकारी खरीद में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। यदि किसी निर्माता द्वारा अधिकृत डीलरों को नियंत्रित कर बोली की कीमतें तय की जाती हैं, तो पूरी निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
CCI का यह आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि सरकारी खरीद में कार्टेल, मिलीभगत और कृत्रिम प्रतिस्पर्धा पैदा करने की कोशिशों पर आयोग अब कड़ी कार्रवाई के मूड में है।



