नई दिल्ली। सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने पिछले 10 वर्षों में अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े 20 संगठनों को 668 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी है। यह दावा The News Minute की एक खोजी रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ONGC ने इस अवधि में CSR मद के तहत कुल 4,531 करोड़ रुपये विभिन्न संस्थाओं को आवंटित किए। इनमें से लगभग 14.7 प्रतिशत राशि उन 20 संगठनों को मिली, जिन्हें रिपोर्ट में RSS से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा बताया गया है।
The News Minute के मुताबिक, इन 20 संगठनों में से नौ सीधे तौर पर संघ परिवार से संबद्ध हैं, जबकि नौ अन्य ऐसे हैं जिनकी स्थापना या संचालन RSS से जुड़े व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। दो अन्य संस्थाओं ने विभिन्न परियोजनाओं में संघ के साथ काम किया है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि संघ सरकार से धन नहीं लेता और इसी कारण उसका पंजीकरण नहीं कराया गया है। वहीं दूसरी ओर, कई लोगों का कहना है कि CSR फंड कंपनियां पंजीकृत ट्रस्ट, सोसायटी और गैर-लाभकारी संस्थाओं को उनके सामाजिक कार्यों के आधार पर देती हैं, न कि किसी संगठन विशेष को सीधे।
फिलहाल ONGC की ओर से The News Minute की इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि रिपोर्ट में जिन संस्थाओं का उल्लेख किया गया है, उन्हें CSR फंड किन-किन परियोजनाओं और उद्देश्यों के लिए स्वीकृत किया गया था।
काश कोई विनोद राय होता जो इन ढेर सारे शून्य को गिनकर देश को बता पाता,खैर अब तो ये सब करप्शन की श्रेणी में आता भी नहीं है। आप मेहनत कीजिए महँगा पेट्रोल भराइये और उससे जो मुनाफा होगा वो संघ के पास जाएगा फिर जो बचा हुआ है वो गडकरी का लौंडा गन्ने का जूस का ले लेगा और जब आप इस महंगाई के तनाव में परिवार के साथ मंदिर जायेंगे तो वहाँ का पैसा चंपत ले उड़ेगा, कुल मिलाकर संतरे अब हर चौक चौराहे पर आपसे वसूली करने के लिये तैयार हैं।
-अभिषेक सिंह

देश की सरकारी कंपनी ONGC ने 668 करोड़ रुपए RSS के जुड़े 20 संगठनों को दिया है – पिछले 10 साल में.
ये पैसा ONGC ने CSR फंड (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के तहत दिया.
ONGC ने अलग-अलग संगठनों को 10 साल में CSR फंड से 4,531 करोड़ रुपए दिए. इसमें से 14.7% पैसा RSS से जुड़े 20 संगठनों को गया.
-रणविजय सिंह, पत्रकार
सौमित्र रॉय-
मोहन भागवत ने कहा था कि चूंकि आरएसएस सत्ता से पैसा नहीं लेता, इसलिए संघ का रजिस्ट्रेशन नहीं कराएंगे।
मोहन भागवत एक नंबर के झूठे हैं।
पिछले 10 साल में सरकारी कंपनी ONGC ने 668 करोड़ रुपए आरएसएस से जुड़े 20 संगठनों को दिया है।
ये पैसा ONGC ने CSR फंड (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के तहत दिया है।
ONGC ने अलग-अलग संगठनों को 10 साल में CSR फंड से 4,531 करोड़ रुपए दिए।
इसमें से 14.7% पैसा आरएसएस से जुड़े 20 संगठनों को गया। अब आरएसएस के झुठल्ले इसे भी जस्टिफाई करेंगे।
विश्व दीपक-
मोहन भागवत से पूछा गया – संघ कैसे चलता है? उन्होंने कहा – स्वयंसेवकों द्वारा दिये गये दान से. उन्होंने ONGC का नाम ही नहीं लिया.
जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ONGC ने संघ के 20 आनुषांगिक संगठनों को पिछले 12 साल में ₹671 करोड़ का दान दिया. 2015 से लेकर 2025 के बीच ONGC के सीएसआर फंड का करीब 15 फीसदी हिस्सा अकेले संघ के खाते में गया.
12 साल में ₹671 करोड़ देने का मतलब औसतन सालाना करीब ₹56 करोड़.
यद्यपि माल बटोरने में आज संघ का कोई भी संगठन पीछे नहीं है लेकिन ONGC ने सबसे ज्यादा ₹434 करोड़ का दान दिया असम के स्वर्गदेव-सिउ-का-फा अस्पताल को.
इस अस्पताल को ONGC और बाबा साहब अंबेडकर वैदकीय प्रतिष्ठान [BAVP] मिलकर संचालित करते हैं. यह संघ से जुड़ा संगठन है जिसकी स्थापना 1989 में औरंगाबाद, महाराष्ट्र में हुई थी.
दूसरे नंबर पर है डॉ आबाजी थट्टे सेवा अनुसंधान संस्थान. इसे ONGC ने ₹140 करोड़ दिये. आबाजी थट्टे, गोलवलकर के सहयोगी थे.
इसी तरह ONGC ने संघ से जुड़े स्वामी विवेकानंद अनुसंधान संस्थान को योग कराने के लिये करीब ₹16 करोड़ का दान दिया. सेवा भारती को बाढ़ राहत कार्य के नाम पर करीब ₹14 करोड़ दिया. संघ द्वारा संचालित एकल विद्यालय को 9 करोड़ का दान ONGC ने दिया.
ONGC कोई अंबानी-अडानी की मिल्कियत नहीं. यह जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाला उपक्रम है. यह अपने सीएसआर फंड का कहां,कैसे इस्तेमाल करता है इसका हिसाब-किताब होना चाहिये.
हिसाब-किताब इसलिये और भी ज़रूरी है क्योंकि संघ ने अपनी स्थापना के बाद से ही एक मिथ की रचना की है जिसमें कहा जाता है कि यह स्वयंसेवक के दान से चलता है. इसका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं, कोई अकाउंट बुक नहीं, सदस्यता का हिसाब-किताब नहीं. फिर स्वयंसेवकों के दान से कैसे चलता है?
हाल में ही मोहन भागवत ने इस मिथक को एक बार फिर उस वक्त दोहराया जब प्रियांक खड़गे ने संघ की फंडिंग और रजिस्ट्रेशन पर सवाल उठाये.
स्वयंसेवकों के पैसे से ₹150 करोड़ की तीन बहुमंजिला इमारतें [झंडेवालन] नहीं खड़ी होती हैं. यह बात अब जनता समझने लगी है. संघ ने बड़े जतन से अपने चेहरे पर सादगी का जो मेकअप कर रखा था उसकी परतें अब उखड़ने लगी हैं.



