नवेद शिकोह-
लोकसभा चुनाव 2024 पर चर्चा, अनुमान और विश्लेषण पर आधारित न्यूज 24 चैनल के कार्यक्रम “प्रेस क्लब” में मशहूर टीवी पत्रकार सुकेश रंजन देश में घूम-घूम कर चुनावी माहौल को भांपने की कोशिश कर रहे हैं।

लखनऊ में उनके इस कार्यक्रम में यहां के दिग्गज पत्रकार प्रमोद गोस्वामी (ढाई दशक तक पीटीआई के ब्यूरो चीफ रहे), सुनीता ऐरन (एचटी की सलाहकार संपादक), सिद्दार्थ कलहंस (बिजनेस स्टेंडर्ड के यूपी चीफ), विजय उपाध्याय (भास्कर के ब्यूरो चीफ) और राजकुमार सिंह (नवभारत टाइम्स के पूर्व राजनीतिक संपादक) ने एकमत होकर कहा कि ये लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में मंडल की राजनीति के इतिहास की याद दिला रहा है।
राम मंदिर का असर कम दिख रहा है, किसी की लहर नही दिख रही। अखिलेश यादव के पीडीए ने उन्हें एमवाई की छवि से बाहर निकाला है और इंडिया गठबंधन की तरफ गैर यादव पिछड़ों और कुछ दलितों का रुझान भी दिख रहा है। बावजूद इसके मोदी का चेहरा और योगी का बुल्डोजर (बेहतर कानून व्यवस्था) भाजपा का मददगार बना है।
तमाम पत्रकारों के विश्लेषण में राजकुमार सिंह ने कहा कि गैर यादव पिछड़ों और दलितों का कुछ हिस्सा भाजपा से इंडिया गठबंधन की तरफ खिसका भी तब भी भाजपा की ज्यादा सीटें कम नहीं होगी क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में ज्यादातर भाजपा उम्मीदवार लाखों के अंतर से जीते थे इसलिए कुछ वोट खिसकने से मार्जिन कम हो सकती है लेकिन ज्यादा सीटे कम होने की संभावना कम है।
प्रमोद गोस्वामी ने कहा कि भाजपा समर्थक नौजवानों और कार्यकर्ताओं में उत्साह कम होने का कारण बेरोजगारी की नाराज़गी भी हो सकती है। उन्होंने अनुमान लगाया कि यूपी में एनडीए को पचास और इंडिया को तीस सीटें मिल सकती हैं।
सुनीता ऐरन और सिद्धार्थ कलहंस का अंदाजा है कि यूपी में इंडिया बीस से पच्चीस सीटें जीत सकता है, जबकि विजय उपाध्याय का मानना है कि पिछली बार कि तरह विपक्ष पंद्रह-सोलह सीटों में सिमट जाएगा। इन पत्रकारों के अनुमान का एवरेज करीब बीस से पच्चीस सीटों के आसपास आता है।


