
संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में नरेन्द्र मोदी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किये जाने की खबर अलग-अलग शीर्षक से प्रकाशित हुई है। दिलचस्प है कि पहली ही बार झोला उठाकर चल दूंगा, पचास दिन में सपनों का भारत, 100 दिन में विदेश में रखा काला धन वापस लाने और भ्रष्टाचार दूर करने जैसे वादे करने वाले प्रधानमंत्री को 10 साल के शासन और मजबूत सरकार चलाने के बाद मजबूर सरकार चलाना पड़ रहा है। 10 साल में किस भी पुराने भ्रष्टाचारी को सजा नहीं हुई। लालू यादव का अपवाद हैं और उनका मामला पुराना है। बाकी ज्यादातर भ्रष्टाचारियों को वाशिंग मशीन और सत्ता का सुख देने वाली पार्टी और उसकी सरकार अब गठबंधन की सरकार बनायेगी।
पीएम केयर्स और इलेक्टोरल बांड देने वाले प्रधानसेवक अब नीतिश कुमार और तेलुगू देशम के चंद्र बाबू नायडू के सहयोग से सरकार बनाएंगे। तो अमर उजाला ने नई सरकार में भी कायम रहेगी भाजपा की पुरानी हनक जैसा शीर्षक लगाया है। मुख्य खबर के साथ एक शीर्षक है, शपथ के बाद मोदी रच देंगे इतिहास। हालांकि, इससे मुझे 13 दिन का इतिहास याद आया और कल नीतिश कुमार को सुनकर लगा कि वे सरकार को कितनी गंभीरता से लेते या देखते हैं। हालांकि उन्होंने मोदी जी के पैर छुए जिसके बारे में एक मित्र ने कहा कि वे असल में पैर में डालने वाली बेड़ी की नाप ले रहे थे। अखबारों की दुनिया इससे बिल्कुल अलग है।
नवोदय टाइम्स में एक शीर्षक है, यह राजग (एनडीए) का महाविजय है : मोदी। इस पर याद आया कि किसी ने कहा है कि एनडीए का मतलब अब ‘नायडू नीतिश पर निर्भर गठजोड़’ (डेमोक्रैटिक अलायंस अब डिपेंटडेंट यानी निर्भर अलायंस) है। अमर उजाला सरकार को चाहे जितनी हनक वाली बताये नवोदय टाइम्स ने लिखा है कि अब पूरी मशक्कत नए मंत्रिपरिषद पर। अखबार ने इस सरकार की पांच चुनौतियों का जिक्र किया है। ये हैं – अग्निपथ योजना, मंत्रिमंडल, हिन्दुत्व और अल्पसंख्यक, विधानसभा चुनाव और महंगाई व बेरोजगारी। आइये आज के शीर्षक से इस सरकार को जानें।
1. अमर उजाला
मोदी कल तीसरी बार लेंगे शपथ
2. नवोदय टाइम्स
कल से तीसरा दौर – न्यौता भी मिला सरकार बनाने का
3. द टेलीग्राफ
बहुमत न मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री चुने गए, मोदी ने गठजोड़ का धर्म अपनाया। मुख्य शीर्षक है, रविवार : नायडू-नीतिश की डबल इंजन सरकार।
4. द हिन्दू
राष्ट्रपति ने मोदी को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया; शपथ ग्रहण कल
यहां उपशीर्षक में कहा गया है, मोदी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री के रूप में लगातार अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान सभी निर्णयों में सहमति सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे।
5. टाइम्स ऑफ इंडिया
मोदी मुर्मू से मिले और मंत्रिमंडल में शामिल करने पर चर्चा जारी, सरकार बनाने के लिए आमंत्रित। इंट्रो है, उन्होंने कहा, “मैं दबाव पड़ने पर झुकने के लिए नहीं जाना जाता हूं”। लीड के नीचे चार कॉलम में दो लाइन का एक शीर्षक है, मोदी ने कहा, सर्व पंथ संभाव के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध। इसके साथ दो खबरें है, नीतिश ने पूर्ण समर्थन की पेशकश की लेकिन बिहार का काम की भी चर्चा की। क्षेत्रीय अपेक्षाओं और राष्ट्रीय हितों को संतुलित किया जाये : नायडू। इसके साथ मोदी के उच्च विचार हैं, सरकार चलाने के लिए बहुमत की जरूरत होती है ….. पर ए देश को चलाने के लिए सर्वमत की आवश्यकता होती है।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे और अच्छे से छापा है। उसका स्क्रीन शॉट देखये। टाइम्स ऑफ इंडिया ने नरेन्द्र मोदी की तस्वीर छापी है। इसमें वे राष्ट्रपति की चिट्ठी के साथ दिखाये गये हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो है जिससे लगता है कि वे चिट्ठी की लाइन पढ़ने में लटपटा गये। अखबारों में इसकी खबर तो नहीं मिली।
7. हिन्दुस्तान टाइम्स
राष्ट्रपति ने मोदी को आमंत्रित किया तो गठजोड़ सबसे महत्पूर्ण शब्द इसके साथ एक शीर्षक के अनुसार, मोदी ने कहा है कि एनडीए का (नया) मतलब नया,विकसित, चाहतों वाला भारत है। जो भी हो, जो राजनीति समझते हैं वो खेल भी समझ रहे हैं जो नहीं समझना चाहते हैं उन्हें समझाया भी नहीं जा सकता है।
नरेन्द्र मोदी जब दूसरी बार प्रधानमंत्री बने थे तब के अखबारों पर मैंने लिखा था, “चौकीदार का चमत्कार” शीर्षक टीओआई में! और हिन्दी में ‘अजेय मोदी’ से ‘प्रचंड मोदी’ तक। आज के अखबारों में दिलचस्प है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो। एक ही मौके की लगभग एक जैसी फोटो अलग-अलग साइज और स्टाइल में कई अखबारों में छपी है। दैनिक भास्कर और अमर उजाला में तो बिल्कुल एक जैसी। इतनी बड़ी जीत को हिन्दी अखबारों में कायदे से प्रस्तुत नहीं किया गया है। अंग्रेजी अखबारों में कोलकाता का द टेलीग्राफ आज भी अनूठा है। पहले पन्ने पर सिर्फ, “ही इज बैक” और उसमें भी ‘ही’ काफी बड़े पर गेरुआ अक्षरों में सारी बात कह देता है। इसके अलावा, अखबार ने आज पहले पन्ने पर सीटों की संख्या के अलावा सिर्फ यह लिखा है उत्तर, पूर्व और पश्चिम में पार्टी को चौंकाने वाले लाभ मिले हैं।


