Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

मोदी जी का करिश्मा समाप्त हो गया है, उनके नेतृत्व में BJP अब नीचे उतर रही है!

अमरेन्द्र राय-

स चुनाव में विपक्ष जीता भले न हो लेकिन उसने प्रधानमंत्री मोदी का घमंड जरूर तोड़ दिया है। उनकी पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई है। वे जिस नेहरू को पानी पी पी कर दस साल गाली देते रहे उन्हीं के रिकॉर्ड की बराबरी करने के लिए लगातार तीसरी बार शपथ जरूर लेने जा रहे हैं लेकिन सरकार चलाने के लिए उन्हें नायडू और नीतीश कुमार का पंखा झलना होगा।

कर्ण की तरह लड़ा विपक्ष

2024 का चुनावी महाभारत समाप्त हो गया है। इस चुनावी युद्ध को देखने के बाद महाभारत का एक प्रसंग याद आ रहा है। अर्जुन और कर्ण के बीच युद्ध हो रहा था। अर्जुन जब वाण चलाते थे तो वाणों के वेग से कर्ण का रथ मीलों पीछे चला जाता था। लेकिन जब कर्ण वाण चलाता था तो अर्जुन का रथ महज तीन कदम पीछे जाता था। बावजूद इसके अर्जुन के सारथी बने भगवान कृष्ण के मुंह से निकल पड़ता था-वाह कर्ण वाह…. अर्जुन को कृष्ण के मुंह से कर्ण की तारीफ सुनकर अच्छा नहीं लगता था। वे दुखी हो रहे थे। आखिर में उन्होंने अपनी नाराजगी जताते हुए कृष्ण से पूछा- भगवन, मैं जब तीर चलाता हूं तो कर्ण का रथ मीलों पीछे चला जाता है और वह जब वाण चलाता है तो मेरा रथ सिर्फ तीन कदम पीछे हटता है। फिर भी आप मेरी बजाय कर्ण की तारीफ करते हैं। तब कृष्ण ने अर्जुन को सच्चाई बताई। उन्होंने बताया कि वे खुद उनके रथ पर तीनों लोकों का भार लेकर बैठे हैं। इसके अलावा रथ पर फहरा रही पताका पर हनुमान जी रोम-रोम में पहाड़ बांधकर सवार थे। इतना वजन होने के बावजूद कर्ण अपने बाणों से अर्जुन के रथ को तीन कदम पीछे ढकेल देता था।

इस चुनाव में भी वही सब देखने को मिला। एक तरफ खुद भीष्म पितामह की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके चाणक्य अमित शाह और योगी आदित्यनाथ तथा राजनाथ सिंह समेत उनके दर्जनों सहयोगी थे तो दूसरी तरफ जिसे वे पप्पू बना चुके थे वो अकेला राहुल गांधी। बाकी उसके सहयोगियों में अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, स्टालिन आदि कम नामधारी क्षेत्रीय नेता थे जिनका तब तक ये भी नहीं पता था कि वे साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे भी या नहीं।

आखिर में थोड़ा मशहूर योद्धा ममता बनर्जी इस लड़ाई में साथ नहीं ही आईं। वे विपक्ष के खेमे में जरूर थीं लेकिन उन्होंने अपना डेरा अलग से जमा रखा था। इसके अलावा मोदी जी के पास तमाम संसाधन थे। गैर कानूनी चुनावी बांड से उगाहे गए हजारों करोड़ रुपये, चुनाव आयोग और दूसरी सरकारी एजेंसियों, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग, मीडिया और सर्वे करनी वाली मायावी राक्षसी प्रवृत्ति वाली एजेंसियों की ताकत थी जो आखिरी वक्त तक विपक्षी नेताओं को परेशान करती रही। इसके बावजूद विपक्षी नेताओं ने मोदी जी के दांत खट्टे कर दिये। 400 पार जाने की घोषणा करने वाले रथ को उन्होंने तीन सौ के भीतर ही रोक दिया। उसमें भी बीजेपी को उन्होंने पूर्ण बहुमत नहीं पाने दिया। अब अगर मोदी जी प्रधानमंत्री बनते भी हैं तो उनकी लगाम उनके सहयोगियों खासकर चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के हाथ में होगी जिनसे मोदी जी के 36 के आंकड़े न भी हों तो मधुर संबंध तो नहीं ही हैं।

इस चुनाव की सबसे खास और बीजेपी के लिए सबसे खतरनाक बात यह है कि उत्तर और पश्चिम भारत के उसके अभेद्य किले को विपक्ष ने भेद दिया है। कहीं ध्वस्त किया है तो कहीं बड़ा नुकसान पहुंचाया है तो कहीं गोले दागकर छेद कर दिया है। देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में उन्होंने बीजेपी को धूल चटा दी है। पिछले लोक सभा चुनाव में 62 सीट जीतने वाली बीजेपी को उन्होंने 33 सीटों पर समेट दिया है। राजस्थान मे बराबरी से मुकाबला किया है। जहां पिछले चुनाव में बीजेपी ने सभी 25 सीटें जीती थीं वहीं इस बार 11 सीटें कांग्रेस ने उससे छीन ली हैं। महाराष्ट्र में तो यूपी जैसा ही धमाका किया है। वहां की 48 में से करीब 30 सीटों पर कब्जा जमा लिया है। बिहार में भी कोई बड़ी सफलता तो नहीं हासिल कर पाया विपक्ष लेकिन पहले जहां एनडीए ने 40 में से 39 सीटें हासिल की थीं वहीं इस बार उसे 31 पर ही रोक दिया है।

इससे भी खास बात यह है कि सबसे पुराना किला गुजरात में भी गोला दागकर एक सूराख बना दिया है जो राज्य में बीजेपी की कमजोरी का चिन्ह बन गया है। दक्षिण भारत में बीजेपी का बहुत कुछ पहले भी नहीं था। नॉर्थ ईस्ट में भी उसे इस बार झटका लगा है। पिछली बार वहां की 25 में से 23 सीटें एनडीए ने जीती थीं जो कि इस बार 16 पर ही सिमट गईं। बीजेपी के लिए एक राज्य ओडिशा वरदान साबित हुआ है। सही मायने में यही बीजेपी का फायदा है। वहां इसकी पहली बार सरकार तो बन ही रही है, वहां की लोक सभा की भी लगभग सारी सीटें ही उसने जीत ली हैं। अगर ओडिशा ने बीजेपी का इस कदर साथ न दिया होता तो मोदी जी इस बार सत्ता से ही बाहर हो जाते।

बहरहाल मोदी जी के भक्त इस बात से भी खुश हो सकते हैं कि चाहे जैसे भी हो तीसरी बार मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन बीजेपी के शुभचिंतक इस बात को जरूर समझ गये होंगे कि मोदी जी का करिश्मा समाप्त हो गया है। उनके नेतृत्व में बीजेपी अब नीचे उतर रही है। आगे बढ़ाने या कम से कम जनाधार को बचाये रखने के लिए अब उसे एक नये नेता की जरूरत है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन