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बीईए के अध्यक्ष पद से शाजी ज़मां का इस्तीफा, सुधीर चौधरी को मनाने-पटाने की तैयारी

पिछले दिनों ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन यानि बीईए की हुई बैठक को लेकर मीडिया मार्केट में कई तरह की सूचनाएं तैर रही हैं. सबसे पहली खबर तो ये है कि नेशनल हिंदी न्यूज चैनल्स के संपादकों की इस संस्था के अध्यक्ष पद से शाजी ज़मां ने इस्तीफा दे दिया है. बीईए के पदाधिकारियों ने शाजी से अनुरोध किया है कि वे महीने भर तक पद पर बने रहें ताकि इस बीच नए अध्यक्ष का चुनाव या मनोनयन हो सके.

पिछले दिनों ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन यानि बीईए की हुई बैठक को लेकर मीडिया मार्केट में कई तरह की सूचनाएं तैर रही हैं. सबसे पहली खबर तो ये है कि नेशनल हिंदी न्यूज चैनल्स के संपादकों की इस संस्था के अध्यक्ष पद से शाजी ज़मां ने इस्तीफा दे दिया है. बीईए के पदाधिकारियों ने शाजी से अनुरोध किया है कि वे महीने भर तक पद पर बने रहें ताकि इस बीच नए अध्यक्ष का चुनाव या मनोनयन हो सके.

बताया जा रहा है कि शाज़ी ज़मां अब न्यूज चैनल की पत्रकारिता से अलग हट गए हैं और वो मुंबई में रहकर स्टार प्लस के लिए कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं. इस नाते वह नहीं चाहते कि वह बीईए में अध्यक्ष बने रहें. हां, बतौर सदस्य वह बीईए की गतिविधियों में शामिल रहेंगे. शाजी जमां एबीपी न्यूज में संपादक हुआ करते थे लेकिन मोदी राज आने के बाद उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता को केंद्र सरकार पचा नहीं पाई और चैनल के मालिक अवीक सरकार पर दबाव बनवाकर शाजी को साइड लाइन कराया गया और कमान मिलिंद खांडेकर को सौंप दी गई. उसके कुछ समय बाद शाजी ने एबीपी न्यूज से इस्तीफा दे दिया और अकबर पर एक किताब लिखने का काम शुरू किया. किताब का काम खत्म करने के बाद वह मुंबई में स्टार प्लस के लिए कुछ नए प्रोजेक्ट्स / शोज पर काम कर रहे हैं.

इस बीच एक अन्य सूचना के मुताबिक बीईए की बैठक में सुधीर चौधरी को फिर से बीईए में लाने पर बातचीत हुई. सूत्रों का कहना है कि सुधीर चौधरी को मनाने पटाने और उनसे बात करने की जिम्मेदारी विनोद कापड़ी को दी गई. यह खासा मजेदार है कि जिस सुधीर चौधरी को ब्लैकमेलिंग और तिहाड़ जेल के कारण बीईए से निकाला गया, उसी को फिर से वपास लाने की तैयारी की जा रही है और उनको मनाने का काम एक ऐसे शख्स को दिया गया है जो खुद काफी समय से बेरोजगार है टीवी पत्रकारिता से बिलकुल बाहर है.

कहा जा रहा है कि सुधीर चौधरी ने मानहानि का जो मुकदमा बीईए के लोगों के पर कर रखा है, उससे संपादक लोग ज्यादा परेशान हैं. सुधीर चौधरी की तरफ से आधा दर्जन वकील कोर्ट में पेश होते हैं और संपादक जी लोगों की तरफ से खुद संपादक लोगों को हर बार पेश होना पड़ता है. बीईए में मुकदमा लड़ने के लिए कोई कोष या पैसा अलग से है नहीं इस कारण एक मुकदमा संपादक जी लोगों का दम तोड़ने लगा है और ये लोग हांफते हुए अब शरणागत मुद्रा में आने लगे हैं.

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