
डॉ एमडी सिंह–
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण आसान है। इसका सीधा संबंध शरीर में उपस्थित सात चक्रों के साथ-साथ आठवें आध्यात्मिक चक्र के साथ भी है जो शरीर से बाहर माना जाता है। सामान्य तौर पर अधिकांश योग गुरु चक्के की आकृति बना लेना चक्रासन मान लेते हैं। यह धारणा सर्वथा गलत है।
जैसा की योग शास्त्र मानता है हमारे शरीर में तंत्रिका तंत्र के सात संवेदक केंद्र, बिंदु अथवा चक्र हैं जो शरीर की क्रियात्मकता को नियंत्रित करते हैं। इन सात चक्रों के अतिरिक्त एक आठवां चक्र भी है जिसे मानसिक अथवा आध्यात्मिक चक्र के रूप में जाना जाता है। योग शास्त्र के अनुसार यह चक्र सातवें चक्र के कुछ इंच ऊपर शरीर के बाहर सहस्त्र दल कमल रूपी वह चक्र है जिसमें राम अर्थात शरीर में सर्वत्र रमन करने वाली शक्ति अर्थात आपका स्व अर्थात विष्णु अपनी चेतना अर्थात लक्ष्मी के साथ विश्राम करता है। एक सिद्ध योगी इसी चक्र पर जाकर समाधिस्थ होता है। यहां मैं यह भी याद दिलाता चलूं की यही मन और शरीर का नियंत्रक स्वामी वाइटल फोर्स है जिसे होम्योपैथी केंद्रीभूत शक्ति के रूप में मान्यता प्रदान करती है।
हम फिर मूल विषय से विचलित हो रहे हैं। हम बात चक्रासन की कर रहे थे। चक्रासन उन्हीं सात चक्रों को एक साथ साध लेने का आसान है जो शरीर के भीतर हैं। यह योग तभी पूर्ण होता है जब आठवां चक्र केंद्रीय बल के रूप में इन सातों चक्रों के मध्य आ जाता है और मन उसमें जाकर स्वयं ही जुड़ जाता है। इस आसन में योगी चित्र लेट कर अपने दोनों पांव घुटने के पास से मोड कर तालुओं एवं कंधों के पास दोनों हाथ की गढ़ेलियों को रखकर, धनुशासन की तरह अपने मेरुदंड को आकाश की तरफ उठाते हुए अपने शरीर को इस तरह साधता है कि गर्दन के पास से सर घूम कर पांवों को देखने लगे। इस तरह सातवां चक्र एवं प्रथम चक्र आमने-सामने आ जाते हैं और बाकी चक्र उनके मध्य। आठवां आध्यात्मिक चक्र इन सातवें चक्र के मध्य केंद्रीय बल के रूप में स्वयं स्थापित हो जाता है। योगी चक्रासन को करते हुए इसी आठवे चक्र से अपने सातों चक्रों को जोड़ देता है। तब पूर्ण होता है चक्रासन। चक्रासन को आखिरी आसन के रूप में किया जाना चाहिए। क्योंकि इसके बाद योग निद्रा में जाना अथवा श्वासन में स्थापित होना बहुत ही सरल हो जाता है।
शरीर के संवेदी केंद्रों, मेरुदंड एवं शरीर और मन के मध्य उपस्थित केंद्रीय बल को एक साथ नियंत्रित करने वाले इस आसन को संपादित करने वाला योगी उम्र, व्याधियों,अवसाद, चिंता और बुढ़ापे पर विजय प्राप्त कर सकता है।
इस योगासन के साथ बेराइटा कार्ब,कोनियम मैक, कास्टिकम, आक्सीट्रापिस, जेलसीमियम, सल्फोनाल, क्यूप्रम मेटालिकम, साईक्यूटा वी, एवं नक्स वोमिका इत्यादि जैसी होम्योपैथिक औषधियां जुड़कर विशेष लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं
(अपनी पुस्तक ‘सूक्ष्म योग चिंतन एवं होम्योपैथिक दर्शन’ से) योग दिवस पर विशेष,
मुनी देवेंद्र (डॉ एमडी सिंह)
CMD, एमडी होमियो लैब प्रा लि महाराज गंज गाजीपुर यूपी


