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उत्तर प्रदेश

पत्रकारों के साथ कैसे-कैसे खेल रही पुलिस, पढ़ें.. जनता टीवी के रिपोर्टर का किस्सा

सेटेलाइट चैनल जनता टीवी के रिपोर्टर आमिर ने अपने चैनल पर एक खबर चलाई। हुआ यूं कि 14 अक्टूबर 2023 को भू माफियाओ से करेली में छुड़ाई गई संपत्ति पर सांठ-गांठ करके अतीक के गुर्गों ने फिर कब्जा कर अवैध प्लाटिंग शुरू कर दी है। बाउंड्री पर किसका कब्जा है यह भी लिखा गया। जब खबर चली तो हंगामा हो गया। कुछ दलाल (पत्रकारिता की आड़ में पुलिस से साथ गांठ करने वाले लोग) परेशान हो गए 20 जून को कीडगंज थाने से आमिर के पास एक फोन पहुंचता है कि आईटी एक्ट के मामले में अपना बयान दर्ज करा दें।

आमिर को थाने में रोक लिया गया। आमिर के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब से जुड़े कुछ पत्रकार भी गए थे। जब उन्हें पुलिस की मंशा ठीक नहीं लगी तो दबाव देकर जानना चाहा कि क्या मामला है। कहा गया ऊपर से आदेश है। दोपहर से शाम 4:00 बज गया। बाद में पुलिस ने कहा कि शांति भंग की आशंका में 151 में इनका चलान कर दिया गया है। चालान बड़ी बात नहीं है, न्यायालय से जमानत मिल जाएगी।

पुलिस की मंशा ठीक नहीं थी। यह समझकर आमिर के साथ गए के कई पत्रकारों ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार ANI के ब्यूरो चीफ वीरेन्द्र पाठक को यह सूचना दी।

बिना किसी बवाल के, किसी अन्य कारण के 151 का चालान समझ में नहीं आ रहा था!

बहरहाल, जिले के आला अधिकारी फोन उठा नहीं रहे थे। न्यायालय में इंतजार हो रहा था कि रिपोर्टर को पेश कर कानूनी कार्रवाई पूरी की जाए और आमिर की जमानत ले ली जाए। जिससे उसे जेल न जाना पड़े। क्लब के कुछ सदस्य अधिवक्ता आदि न्यायालय में खड़े थे, इसे जानकर पुलिस पहले बेल ले गई। फिर उसको हर चौराहे पर घूमाती रही, टाइम जाया करती रही। पत्रकार साथी पुलिस के साथ लगे थे। बराबर मोमेंट कैमरे में कैद हो रहा था।

आपको याद हो, इसी तरह सोशल मीडिया पर काम करने वाले एक व्यक्ति को उठाकर जेल भेज दिया गया था। पुलिस की मंशा भांपकर संयोजक दबाव बढ़ाने लगे। न्यायालय में कई पत्रकार साथी, अधिवक्ताओं की टीम लगी रही। बात इलाहाबाद के हाईकोर्ट से संबंधित कुछ लोगों और लखनऊ में उच्च अधिकारियों तक पहुंचने लगी।

पुलिस कमिश्नरेट न्यायालय में पत्रकार साथी और अधिवक्ता खड़े हैं। यह जानकर आमिर को धोबी घाट चौराहे पर ले जाकर रोका गया। कार्यालय के बाबू कागज लेकर धोबी घाट चौराहे पहुंचे और वहां से उनका एक दिन का चालान कर दिया गया। पुलिस ने अपनी ताकत का इस्तेमाल किया। जबकि पैरवी करने वालों को पुलिस के सर्वोच्च अधिकारी यह कहते रहे कि बेल हो जाएगी जेल नहीं भेजा जाएगा।

पुलिस द्वारा आमिर को जेल ले जाया जाने लगा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संयोजक वीरेन्द्र पाठक ने उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी को भी यह जानकारी दी। जिससे उपमुख्यमंत्री नाराज हुए। हालात ऐसे बन गए कि चालान काटने के बाद 20 जून की रात 8:00 बजे कीडगंज पुलिस को नैनी जेल के पहले वापस आना पड़ा और आमिर की बेल दे दी गई।

उधर यह खबर आती रही कि ऊपर से दबाव है हर हालत में जेल भेजना है! इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब ने अपने सदस्य आमिर को जेल जाने से बचा लिया। 20 जून को पुलिस और पत्रकारों के बीच एक रस्साकसी चल रही थी जिसमें अंततः सच की जीत हुई। यह हार सही मायनो में उन दलाल पत्रकारों की है जो बस अड्डे, जुआ के अड्डे, खनन माफिया, भू माफिया से पैसा वसूलते हैं, झूठी एफआईआर दर्ज कर लोगों से पैसा वसूलते हैं।

पिछले मार्च माह से अलग-अलग थानों में बिना नाम और पते वाली शिकायतें कुछ पत्रकारों के विरुद्ध की गई हैं। जिसका कोई आधार नहीं था। यह काम मीडिया की आड़ लेकर दलाल कर रहे हैं। इस पर क्लब द्वारा कार्यवाही की जा रही है।

क्लब के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार श्री दिनेश त्रिपाठी ने इस मामले में लखनऊ तक पूरी बात ले जाने संबंधित पुलिस कर्मियों की करतूत को बताने की बात कही है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि माफिया के दलाल पुलिस से और मीडिया की आड़ में किस तरह का खेल खेल रहे हैं। अगर आप पत्रकार हैं और आपके खिलाफ भी इसी तरह की कोई साजिश रची जा रही हो तो कृपया अवगत कराएं। डाटा संकलन कर कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।

पुलिस ने कुछ अच्छे काम भी किए हैं। मीडिया की आड़ में वसूली कर रहे लोगों के खिलाफ कार्यवाही भी की है जिनका स्वागत है।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब, प्रयागराज द्वारा भेजे ई-मेल पर आधारित। संपर्क के लिए इस मेल आईडी को यूज करें… [email protected]

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