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टीवी न्यूज की दुनिया में अफ्रीकी ऑलराउंडर लांस क्लूज़नर जैसे थे ‘अरुण नौटियाल’

पता चला कि आज तड़के हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई. बिटिया को पढ़ाई के लिए विदेश भेजना उनका सपना था. आज तड़के ही बिटिया विदेश के लिए रवाना हुई. अरुण जी बिटिया को छोड़ने एयरपोर्ट जा नहीं पाए. पत्नी गई थीं. जब वो लौटीं तो अरुण जी घर में अचेत पड़े मिले. अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन अरुण जी को बचाया नहीं जा सका….

पंकज प्रसून-

कुछ खबरें ऐसी होती हैं जिनको सुनने के लिए ना तो आपके कान तैयार होते हैं और ना ही आपका दिल उस पर यकीन कर पाता है। खैर, आज के सुबह की शुरुआत एक मनहूस खबर से मिली। हमारे अरुण नौटियाल सर अब हम सभी के बीच नहीं रहे।

स्टार न्यूज और एबीपी न्यूज में एक इंटर्न और फिर ट्रेनी के तौर पर बहाली हुई और अरुण सर आउटपुट हेड हुआ करते थे। न्यूजरूम में चिल्ला चिल्ली और अत्यधिक दबाव वाले माहौल में भी अरुण सर शांतचित्त बने रहते थे। गलतियों की गुंजाइश ना के बराबर हो इस बात पर उनका ध्यान केंद्रित रहता था। मुझे आज भी याद है कि उनके डेस्क पर एक डिक्शनरी भी हमेशा उपस्थित रहता था। मात्रा की गलतियां नहीं हो इसका भी पूरा ध्यान रखते थे।

विजुअल, बाइट और पैकेजिंग अच्छी हो इसके लिए सदैव निर्देशित किया करते थे। मैंने ज्यादातर समय में उन्हें मुस्कुराते हुए ही बातचीत करते देखा है। कुछ अवसरों पर हमने नादानी भी कर दी लेकिन उन्होंने प्यार से समझा कर हमें बताया की इस तरह का व्यवहार पेशेवर जिंदगी के लिए अच्छा नहीं होता है। उन्होंने कई मौकों पर मेरी व्यक्तिगत गलतियों को भी सुधारने का सुझाव दिया।

प्रोग्रामिंग टीम से जब उन्होंने मुझे NEWS टीम में लिया तो मुस्कुराते हुए कहा कि कर लोगे ना…अच्छा लग रहा है ना…। जब कभी वो मुझे कहते कि प्रसून…इस काम को देख लो तो वो मेरे लिए सबसे बड़ा आदेश होता था। अरुण सर…आपसे बहुत कुछ सीखा है…अभी और बहुत कुछ सीख सकता था लेकिन ईश्वर को शायद ये मंजूर नहीं….शत शत नमन आपको…विनम्र श्रद्धांजलि


मनु पंवार-

रुण नौटियाल जी नहीं रहे. आज की सुबह इसी मनहूस ख़बर से हुई. दिल बैठ गया. दिमाग सुन्न हो गया. तब से मन बहुत विचलित है.

अरुण जी शुरुआती दिनों में TVI और सहारा होते हुए आज तक पहुँचे थे. बाद में बरसों तक स्टार न्यूज़/abp न्यूज़ में हमारे बॉस रहे. आउटपुट एडिटर हुआ करते थे. करीब सालभर तक ज़ी न्यूज़ में भी रहे, लेकिन पिछले दिनों वहां से त्यागपत्र दे चुके थे. वह उनकी आखिरी नौकरी थी.

पता चला कि आज तड़के हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई. बिटिया को पढ़ाई के लिए विदेश भेजना उनका सपना था. आज तड़के ही बिटिया विदेश के लिए रवाना हुई. अरुण जी बिटिया को छोड़ने एयरपोर्ट जा नहीं पाए. पत्नी गई थीं. जब वो लौटीं तो अरुण जी घर में अचेत पड़े मिले. अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन अरुण जी को बचाया नहीं जा सका.

अरुण जी टीवी न्यूज़ के मास्टर आदमी थे. बड़े मौकों/ बड़े इवेंट के सबसे विश्वसनीय और सबसे स्किल्ड बंदे. यह हुनर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से ख़ुद हासिल किया था. टीवी के बड़े-बड़े महारथी उनके भरोसे बड़े से बड़ा काम सौंपकर आश्वस्त हो जाते थे कि ये काम न सिर्फ़ होकर रहेगा, बल्कि बहुत कायदे से होगा. जब वो ख़बर टीवी स्क्रीन पर चमकती तो अरुणजी की छाप उसमें साफ-साफ दिखती.

मूल रूप से उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले के अरुण नौटियाल जी मुझे कई बार टीवी न्यूज़ की दुनिया में एक दौर के दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउंडर लांस क्लूज़नर जैसे लगे, जिन्हें कि वर्ल्ड कप में हैंसी क्रोनिए सबसे मुश्किल घड़ी में उतारा करते थे और वो न सिर्फ़ मैदान मारकर लौटते बल्कि अपनी टीम की ऐसी धाकड़ फतह सुनिश्चित करते कि हर कोई दंग रह जाता.

लेकिन अरुणजी की सबसे बड़ी खूबी ये थी कि वो हमेशा डाउन टू अर्थ और लो-प्रोफाइल रहे. दूसरों को चमकाते रहे. वह स्टार न्यूज़ की नींव के पत्थर थे. लेकिन अरुण जी को याद करने की कई वजहें हैं. वह बहुत सरल, सहज थे. अल्पभाषी थे और मृदुभाषी भी थे. मैंने न्यूज़ रुम में कभी उनको किसी पर ग़ुस्सा करते नहीं देखा. सारा लोड खुद पर ले लेते. अगर कभी किसी को डांटते भी तो ऐसा डांटते कि सामने वाले को बुरा भी लगे.

अरुण जी ख़ूब पढ़ाकू भी थे. देश-दुनिया के किसी भी मसले पर उनकी पकड़ बेमिसाल थी. न्यूज़ रूम में उनके केबिन में जाने का मतलब ताज़ा-तरीन किताबों से बावस्ता होना भी था. टीवी न्यूज़ की दुनिया में ऐसा होना अब दुर्लभ होता जा रहा है. लेकिन अरुण जी से एक शिकायत रही कि वो अपनी चीजों को कभी शेयर नहीं करते थे. पूछने या टटोलने पर अक्सर एक चौड़ी मुस्कान के साथ टाल जाते थे. पता नहीं उनके ज़ेहन में क्या चल रहा था. इसे कोई नहीं भांप पाया. अब तो हम क्या ही जान पाएंगे. आप बहुत जल्दी चले गए अरुण सर..

मूल खबर…

नहीं रहे वरिष्ठ टीवी पत्रकार अरुण नौटियाल!

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