
संजय कुमार सिंह-
आज हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, “जम्मू और कश्मीर के दोहरे अभियान 24 घंटे बाद पूरे हुए तो छह आतंकवादी मारे गये”। खबर का इंट्रो है, कुलगांव से 20 किलोमीर दूर दोनों गांव में आतंकवादी विरोधी अहम अभियान चलाया गया जिसमें दो जवान भी मारे गये। इंडियन एक्सप्रेस में इसी खबर का शीर्षक हिन्दी में इस तरह होता, “जम्मू और कश्मीर में मुठभेड़ के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ी: दो सैनिक और छह जवान। उपशीर्षक है – डीजीपी ने कहा, बड़ी उपलब्धि मानवीय खुफिया जानकारी के प्रवाह का संकेत मिलता है। मामला कुलगाम मुठभेड़ का है। इसकी खबर कल भी छपी थी और यहां मैंने बताया भी था। कल की रिपोर्ट शुरू हुई थी, आज की खबरों में कुलगाम में दो मुठभेड़ में दो जवानों के शहीद होने और चार आतंकवादियों को मार गिराने की खबर के साथ नरेन्द्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट 23 को पेश किया जायेगा भी है।
आज की खबरों से पता चलता है कि आतंकवादी हमले और मुठभेड़ के बाद की पुलिसिया कार्रवाई में दो और मारे गये। उन्हें आतंकवादी प्रचारित किया जा रहा है और पुलिस की बड़ी कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सबको पता है कि ऐसे मामलों को पुलिस कैसे क्या कार्रवाई करती है। संभवतः इसी को छिपाने के लिए हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस के शीर्षक में अंतर है। पर दिलचस्प यह है कि आज की खबर में एक नये हमले की भी जानकारी है। इसका पता अमर उजाला के शीर्षक से लगता है। अमर उजाला की आज की लीड का शीर्षक है, कुलगाम हमले में दो और आतंकी ढेर, राजौरी में सैन्य चौकी पर हमला। कुल मिलाकर, सैन्य चौकी पर हमला तो दूर हमले की हिम्मत भी नहीं होनी चाहिये पर यह आम है। घुस का मारूंगा के बावजूद। यह अलग बात है कि कमजोरी को छिपाते हुए उपशीर्षक में कहा गया है, 24 घंटे में छह आतंकी मारे गये, हरियाणा के लांस नायक प्रदीप नैन समेत दो जवान बलिदान।
अखबार ने प्रदीप नैन मुदरघम के साथ राजकुमार चिन्नीगम का नाम कल भी लिखा था। कहने की जरूरत नहीं है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने से या पिछले 10 साल में नई सरकार की नई व्यवस्था लागू होने से स्थिति शायद ही बदली है। ना ही, “घुस कर मारूंगा” का कोई गैर चुनावी लाभ हुआ है। फिर भी अखबारों की आम कोशिश घटनाओं की सूचना भर देने के अलावा चुप्पी साध जाने की लग रही है। कश्मीर का मामला भारतीय राजनीति में जितना महत्वपूर्ण रहा है और उसे ठीक करने के लिए या वैसे भी अनुच्छेद 370 हटाने के बाद की स्थितियों की रिपोर्ट के लिए मीडिया को विशेष व्यवस्था करनी चाहिये थी। देश में पहली बार एक राज्य को दो छोटे केंद्र शासित प्रदेश में बदला गया था – मुझे याद नहीं है कि किसी मीडिया संस्थान ने यह सूचना दी हो या घोषणा की हो कि बेहतर रिपोर्टिंग के लिए उनने क्या खास किया है। बिना फॉलोअप के छिट-पुट खबरें अब भी पहले की ही तरह छप रही हैं। जहां तक रिपोर्टिंग की गंभीरता की बात है और सरकार बदलने के बाद की स्थितियों की विशेष या बारीक रिपोर्टिंग का मामला है आप जानते हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद उड़ीसा में भाजपा की सरकार बनी है। आज नवोदय टाइम्स की लीड का शीषर्क है, पुरी में रथयात्रा के दौरान मची भगदड़। इसमें एक व्यक्ति की मौत और 400 लोगों के घायल होने की खबर है। इनमें से 50 को अस्पताल से छुट्टी मिलने की खबर के आलोक में मानना पड़ेगा कि 350 लोग अस्पताल में हैं। संभव है सभी 400 अस्पताल में दाखिल नहीं हुए हों और अस्पताल में घायलों का यह अनुमान ज्यादा हो फिर भी बहुत सारे लोगों के घायल होने और अस्पताल में होने का अनुमान तो है ही।
इंडियन एकसप्रेस की पहले पन्ने की एक खबर और तस्वीर के अनुसार कल राष्ट्रपति भी पुरी की रथयात्रा में शामिल थीं। यहां भगदड़ की खबर नहीं है। एक व्यक्ति के मरने की सूचना है। इसका कारण दम घुटना बताया गया है। फोटो कैप्शन में घायलों की संख्या नहीं है इससे नहीं लगता है कि वहां 300 के करीब लोग इतने घायल हुए हैं कि अस्पताल में रहना पड़ा है। इंडियन एक्सप्रेस ने अंदर के पन्ने पर रथयात्रा उसमें शामिल श्रद्धालुओं की भारी संख्या वाली तस्वीर के साथ चार कॉलम की खबर छापी है। इसका शीर्षक है, पुरी रथ यात्रा के दौरान दम घुटने से एक मरा। खबर के अंदर लिखा है कि भगदड़ मचने से कई अन्य श्रद्धालु जख्मी हो गये। खबर के अनुसार मरने वाले की पहचान नही हुई है। मुख्यमंत्री ने उसे चार लाख रुपये का मुआवज देने का एलान किया है और कहा है कि शिनाख्त की कोशिशें जारी हैं। आज फिर रथयात्रा निकलेगी। इस बार 53 साल के बाद रथयात्रा दो दिन का आयोजन है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में पुरी की रथयात्रा की खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने के पीछे है। इसके अनुसार इसमें 10 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। यहां एक व्यक्ति की मौत दम घुटने से होने की खबर है जबकि 350 लोगों के बेहोश होने की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही खबर है कि कोलकाता की रथयात्रा में तीन घंटे की देर हुई क्योंकि मुख्य रथ में कोई खराबी थी। रथयात्रा की खबर जब पहले पन्ने पर नहीं है तब पहले पन्ने की लीड का शीर्षक है, ‘गर्मी की छुट्टी में सुप्रीम कोर्ट ने रिकार्ड 1170 केस निपटाये। इंट्रो है, पहली बार 20 वैकेशन पीठ बनाई गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड आज मुंबई में शिवसेना नेता की गिरफ्तारी की है। खबर के अनुसर शिवसेना नेता के बेटे ने बीएमडब्ल्यू चलाते हुए एक स्कूटर को ठोक दिया। इससे स्कूटर पर सवार दंपत्ति में से महिला की मृत्यु हो गई है। कार चला रहा नेतापुत्र फरार है इसलिए पुलिस ने उसके पिता और ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है। कहने की जरूरत नहीं है कि पुणे की पोर्श कार दुर्घटना के बाद यह लगभग वैसी ही दुर्घटना है। उसमें अभियुक्त पैसे वाले एक बिल्डर का बेटा है तो इसमें नेतापुत्र। मुझे लगता है कि शिवसेना नेता और मुंबई की यह खबर दिल्ली में पहले पन्ने की सेकेंड लीड के लिहाज से अनुपयुक्त है। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर सिंगल कॉलम में है।
इस लिहाज से आज हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड का शीर्षक है, मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ आज नीट से संबंधित प्रमुख अपीलें सुनेगी। नीट का मामला और उससे संबंधित घोटाला आप जानते हैं। इसमें खास बात यह है कि केंद्र सरकार शुरू से कह रही है कि परीक्षा रद्द करने की आवश्यकता नहीं है। इस संबंध में पिछले दिनों एक खबर थी कि सुप्रीम कोर्ट में छात्रों की ओर से अपील की गई है कि इसे रद्द नहीं किया जाये। मुझे यह अपील असामान्य लगी थी और मैंने इसपर लिखा भी था। बाद में पता चला कि परीक्षा रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पहले ही दायर की गई थी। मुझे लगता है कि उसकी खबर कम छपी, चर्चा कम हुई और परीक्षा रदद नहीं करने की मांग वाली खबर ज्यादा प्रमुखता से छपी। जो भी हो, यह मामला देशव्यापी है, ज्यादा लोगों को प्रभावित करने वाली है और इसमें ज्यादा लोगों की दिलचस्पी होने की संभावना है, इसलिए इसे ज्यादा महत्व मिलना चाहिये पर आज इसे हिन्दुस्तान टाइम्स ने ही पर्याप्त महत्व दिया है।
हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर आज असम की एक खबर तीन कॉलम में दो लाइन के शीर्षक के साथ छपी है। शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, बाढ़ प्रभावित असम में आठ और मरे, पहाड़ों के लिए सघन बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया। मुबई की खबर की तरह आपको लग सकता है कि असम की खबर दिल्ली में पहले पन्ने पर क्यों होनी चाहिये। मुंबई का मामला शिवसेना के सत्तारूढ़ गुट के विधायक से संबंधित है। आमतौर पर हमलोगों ने देखा है कि भाजपा की सरकार हो तो ऐसे मामले में कार्रवाई नहीं होती है। अभियुक्त को बचाने की कोशिशें साफ दिखती हैं। राजीतिक कारणों से महाराष्ट्र में इस समय ऐसा संभव नहीं है और सत्तारूढ़ दल अपने नेता को बचाने की स्थिति में नहीं हैं या बचा नहीं रहे हैं। ऐसे में यह खबर कम प्रचार ज्यादा है। दूसरी ओर, असम का मामला प्रशासनिक योग्यता और मुश्तैदी का है। मुख्यमंत्री वाशिंग मशीन वाले हैं और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति करते हैं। ऐसे में उनकी योग्यता और कार्यकुशलता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार होना चाहिये। इसका लाभ यह होगा कि मीडिया के दबाव में ही सही, राज्य सरकार जनता की परेशानी कम करने के लिए सक्रिय होगी और कोशिश करेगी। मीडिया का काम जनहित देखना है और इसके लिए मुख्यमंत्री पर दबाव बनाना या उनकी अयोग्यता-निष्क्रियता का प्रचार जरूरी है। इसका लाभ उनकी पार्टी के साथ-साथ आम लोगों को भी होगा। इस लिहाज से यह पहले पन्ने की खबर है।
इस लिहाज से द हिन्दू की लीड आज अनूठी है। वैसे तो यह महत्वपूर्ण और आम आदमी से संबंधित खबर है इसीलिए पांच कालम में लीड बनी है लेकिन यह बिजनेस अखबार के लिए उपयुक्त है। शीर्षक है, पहली तिमाही में नए निजी निवेश की योजना 20 साल में सबसे कम। कॉरपोरेट्स ने सिर्फ 44,300 करोड़ के फ्रेश आउटले की घोषणा की; पिछले वित्त वर्ष में इसी अवधि में करीब 79 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा दर्ज हुई थी; अर्थशास्त्रियों का कहना है कि निवेशक इंतजार करने और देखते रहने का रुख अपना रहे हैं। कुलगाम की खबर यहां छह कॉलम में है। शीर्षक है, कुलगाम में चले लंबे अभियान में दो और के मारे जाने के बाद मरने वालों की आतंकियों की संख्या छह हुई।
द हिन्दू में एक और खबर को असामान्य प्रमुखता मिली है। इसके अनुसार, सोशल मीडिया में राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख पर अपमानजनक पोस्ट के लिए दिल्ली पुलिस ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपने पोस्ट में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में यह एफआई दर्ज हुई है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की साइबर यूनिट ने एफआईआर दर्ज की है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 के तहत मामला दर्ज हुआ है। मोइत्रा की टिप्पणी रेखा शर्मा के हाथरस दौरे के वीडियो पर थी। इसमें एक व्यक्ति उनके पीछे चल रहा था जो उनके ऊपर छाता रखे हुए था।
द टेलीग्राफ की लीड इन सबसे अलग है। इसके अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज मणिपुर में कुकी और मेइती समुदाय के लोगों के शिविर में जाने वाले हैं। अखबार ने इस खबर का शीर्षक मणिपुर मार्कशीट लगाया है और राहुल के आगे तीन तथा मोदी के आगे शून्य लिखा है। यह खबर आज किसी और अखबार में प्रमुखता से नहीं है। इस खबर के साथ मणिपुर हिंसा से संबंधित आंकड़े दिये गये हैं। इसका शीर्षक है, बुद्धिहीन नरसंहार (पर प्रधानमंत्री के ध्यानार्थ पर्याप्त नहीं)। द टेलीग्राफ का आज का कोट तृणमूल कांग्रेस के सांसद, जवाहर सरकार का है। यह एक्स पर उनकी पोस्ट है। इसमें उन्होंने कहा है, “केंद्र सरकार किस नियम के तहत राज्य सरकार के मातहत अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है? खतरनाक कदम – क्योंकि यह भारत की संघीय व्यवस्था और अखिल भारतीय सेवाओं को नष्ट कर देगी।
यह खबर आज द टेलीग्राफ समेत कई अखबारों में पहले पन्ने पर है। खबर के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्रालय ने बंगाल के राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई कथित रूप से उनके कार्यालय को बदनाम करने और अफवाह फैलाने के लिए दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है।

यह खबर आज अमर उजाला में दोनों अधिकारियों की फोटो के साथ है। पर टाइम्स ऑफ इंडिया में खबर है कि, केंद्र सरकार एकतरफा कार्रवाई नहीं कर सकती है। इस मामले में कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी मुख्यमंत्री हैं। लेकिन अमर उजाला ने केंद्र सरकार के एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि केंद्र सरकार ने कार्रवाई शुरू की है और राज्य सरकार को 4 जुलाई को पत्र भेजे गये हैं। टेलीग्राफ ने पीटीआई की खबर छापी है और संबंधित अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि उन्हें कोई सूचना नहीं है और संभव है पत्र मुख्यमंत्री को भेजा गया हो। यही बात अमर उजाला ने भी लिखी है। लेकिन प्रस्तुति का अंदाज अलग-अलग है। तीनों अखबारों में अलग है। द टेलीग्राफ के अनुसार कार्रवाई का दावा किया गया है, टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि कार्रवाई हो नहीं सकती है (केंद्र) और अमर उजाला ने लिखा है कि कार्रवाई शुरू हो गई है।


आज की खबरों में एक और दिलचस्प अंतर हाथरस में भगदड़ और उसमें 121 लोगों की मौत से संबंधित मामला और उसकी खबर में है। आप जानते हैं कि जिस बाबा का सत्संग चल रहा था उसे अभी तक भगदड़ के आरोपों से मुक्त रखा गया है और नौ लोग गिरफ्तार किये जा चुके हैं। आज अमर उजाला में खबर है, बाबा ने कहा, चरण रज लेकर जाना…. तभी मची भगदड़। यह बात एक गवाह के हवाले से है पर खबर के साथ बाबा के वकील का भी दावा छपा है। वह यह कि कुछ लोगों ने जहरीले स्प्रे से भगदड़ मचाई। मुझे नहीं पता इस दावे का बाबा को अभी तक अभियुक्त न मानने से संबंध है कि नहीं है और है या नहीं है तो कितना। पर नवोदय टाइम्स में आज इस खबर का शीर्षक है, बाबा के वकील ने सुनाई नई कहानी, सत्संग के दौरान छिड़का था जहर। मुझे लगता है कि ऐसा हुआ हो तो भी बाबा जिम्मेदारी से मुक्त कैसे हो सकते हैं।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।


