खुशदीप सहगल-
बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपया. पैसे की पीर इस दुनिया में जैमी जैसे लोग भी हैं. जैमी बोले तो राहुल द्रविड़. मैटीरियलिस्टिक दुनिया में पैसा किसे अच्छा नहीं लगता. लेकिन राहुल द्रविड़ ट्रू जेंटलमैन हैं. टीम इंडिया की वर्ल्ड कप जीत के साथ ही हेड कोच के तौर पर राहुल द्रविड़ का सफ़र ख़त्म हो गया. राहुल ने इसका एलान पहले से ही कर रखा था.
वर्ल्ड कप की जीत पर BCCI ने टीम के 15 खिलाड़ियों की तरह ही हेड कोच राहुल द्रविड़ को भी 5 करोड़ रुपए देने का एलान किया.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक राहुल द्रविड़ ने एक्स्ट्रा बोनस लेने से इनकार कर दिया है. द्रविड़ अपने बाकी कोचिंग स्टाफ के बराबर ही इनामी राशि चाहते हैं. इसका मतलब यह है कि द्रविड़ 5 करोड़ में से आधा हिस्सा (2.5 करोड़) छोड़ने को तैयार हो गए हैं. राहुल कोचिंग स्टाफ के बाकी सदस्यों की ही तरह 2.5 करोड़ लेंगे.
टी20 वर्ल्ड कप में राहुल द्रविड़ के साथ सपोर्ट स्टाफ में विक्रम राठौर बैटिंग कोच, पारस महाम्ब्रे बोलिंग कोच और टी दिलीप फील्डिंग कोच के तौर पर शामिल थे.
राहुल ने जब से क्रिकेट खेलना शुरू किया तब से लगातार पहले बतौर प्लेयर, फिर अंडर 19 कोच, नेशनल क्रिकेट एकेडमी हेड और अंत में टीम इंडिया के हेड कोच के तौर पर अपनी सेवाएं देते रहे. अब प्रोफेशनल ज़िम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त राहुल घर में पत्नी डॉ विजेता और बेटे समित को अधिक वक़्त दे सकेंगे. राहुल का बेटा समित भी क्रिकेट खेलता है.
प्रोफेशनल ज़िम्मेदारियां ख़त्म होने पर रिटायर्ड लाइफ़ के लिए पैसे की ज़्यादा ज़रूरत होती है. लेकिन राहुल के ज़मीर ने सपोर्ट स्टाफ के बाकी साथियों जितना ही बोनस लेना स्वीकार किया. राहुल के लिए मेरे दिल में इज़्ज़त तो पहले से ही बहुत थी लेकिन उनके इस कदम ने तो मुरीद बना दिया है.
‘द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ राहुल को शाबाशी देने में आप भी कंजूसी नहीं बरतिएगा. देखते हैं कौन कौन रीयल टीम मैन राहुल के इस कदम के लिए उनकी पीठ ठोंकता है.
राहुल का नाम जैमी क्यों पड़ा, इसका भी एक दिलचस्प किस्सा है- राहुल के पिता शरद द्रविड़ जैम फैक्ट्री में काम करते थे, इसी वजह से बचपन में दोस्त उन्हें जैमी बुलाने लगे थे.


