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एआई के बाद नैनो रोबोट (पार्ट-1) – 1000 साल तक जी सकेगा मनुष्य

सत्येंद्र पीएस

रेमंड क़ुर्ज़विल की एक किताब आई है “The Singularity is nearer: when we merge with AI”। कुर्ज़विल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गॉडफादर और तकनीकी फ़क़ीर कहा जाता है। उन्होंने परिकल्पना की है कि 2029 तक हर कौशल में एआई, मनुष्य से बेहतर और इंटेलिजेंट हो जाएगा। 2030 के दशक में एआई से संचालित सौर ऊर्जा प्रभावी होगी और ज्यादातर कंज्यूमर गुड्स फ्री हो जाएंगी।

इसके बाद ब्लड रोबोट का दौर आएगा और मनुष्यों के शरीर मे धमनियों में नैनो रोबोट चलने लगेंगे। 2040 तक नैनो रोबोट सभी बीमारियों का इलाज करने लगेंगे। बुढापा लाने वाले तत्व गायब हो जाएंगे और मनुष्य 1000 साल जी सकेंगे। नैनो टेक्नोलॉजी हमें हमारे शरीर को इच्छा के मुताबिक मोडिफाई करने में सक्षम बना देगी।

कुर्ज़विल को गूगल के संस्थापक लैरी पेज ने एक प्रोजेक्ट पर 2012 में कम्पनी से जोड़ा। उन्हें गूगल को प्राकृतिक भाषा को समझने में सक्षम बनाने का काम सौंपा गया था।

अभी यह कल्पना से परे लगता है कि कोई नैनो कम्प्यूटर हमारी नस में दौड़ेगा और वह हमें हमारी इच्छा के मुताबिक बना देगा। लेकिन 1970 के बाद वाली पीढ़ी ने जिस तरह के तकनीकी बदलाव देखे हैं, हो सकता है कि हम उस दौर में पहुंच जाएं कि हम मनुष्यों को कुछ करना ही न पड़े। टीवी फ्रिज, कार, विमान, रेल सहित सब कुछ फ्री हो जाए, क्योंकि इसमें मनुष्यों की कोई जरूरत ही नहीं रहेगी। यह सब चीजें एआई बना देगा और जितनी जरूरत होगी, उतना बनाकर दे देगा!

हां… यह सम्भव है। लगता है कि हम लोग सिंगुलरिटी जीते जी देख पाएंगे! हालांकि अब तक जो देख सुन रहे हैं उसमें तो सदियों से कोई बदलाव नहीं हुआ है चाहे अफ्रीकन हो या यूरोपियन या इंडियन। एक ही तरीके से सेक्स करता है, एक ही तरीके से प्यार का इजहार करता है, सबमें मेल और फीमेल होते हैं एक ही तरीके के सीमेन निकलते हैं, एक ही तरीके की माहवारी होती है!

आगे देखते हैं कि क्या क्या बदलने वाला है…

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