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ख़बर को लेकर ट्रोल हुई इस महिला खोजी पत्रकार ने ट्रोलर्स का पूरा नेक्सस उधेड़ दिया

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की पत्रकार सृष्टि जसवाल साइबरस्टॉकिंग (सोशल मीडिया के माध्यमों से अपशब्द कहना) का शिकार हुई थीं. सृष्टि ही नहीं बल्कि उनके मां-बाप तक को ऊट-पटांग कमेंट आने शुरू हो गए थे. सृष्टि ने, साइबर-उत्पीड़न करने वाले समूहों में न सिर्फ घुसपैठ की बल्कि आरएसएफ से इन ट्रोल्स की रणनीति और उनका लक्ष्य होने के भयानक अनुभव के बारे में बात की.

जसवाल बताती हैं कि साल 2020 में जब वे साइबरस्टॉकिंग का शिकार हुईं तब उनके पास प्रति सेकंड 20 अपमानजनक कमेंट किए जा रहे थे. इन धमकियों में अश्लीलता, मौत और बलात्कार तक की धमकियां शामिल थीं. यहां तक की उन्हें अपना पैतृक शहर छोड़ना पड़ा था.

महिला खोजी पत्रकार सृष्टि जसवाल बताती हैं कि पत्रकारों पर ऑनलाइन हमले, बड़े पैमाने पर, दूर दराज राष्ट्रवादियों के समन्वित नेटवर्क का काम है. ऐसा ही एक नेटवर्क हिंदू आईटी सेल का है. जिसके सह-संस्थापक विकास पांडे हैं. जो 2014 से सत्ता में मौजूद राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी के अभियान प्रबंधक थे.

इस नेटवर्क में घुसपैठ करने वाली सृष्टि कहती हैं, इस सेल ने पिछले एक दशक में कई दर्जन पत्रकारों को निशाना बनाया है. उनकी जांच के अनुसार समूह के पास एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फॉलोवर्स की एक डिजिटल सेना और कम से कम 400 की संख्या में स्वयंसेवक हैं. यह सब होने के बाद न तो राज्य और न ही पुलिस आपकी मदद करने वाली है क्योंकि ये ट्रोलर्स भाजपा से जुड़े हैं.

अखबार ने भी साथ छोड़ा
सृष्टि बताती हैं कि 2 जुलाई 2020 को हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ट्रोल्स द्वारा चुनौती दिए जाने पर, सार्वजनिक रूप से जसवाल को सस्पेंड करने के अपने फैसले की घोषणा कर दी. इसके अलावा कुछ अन्य शिकायतों के बाद जसवाल के खिलाफ ईशनिंदा की शिकायत दर्ज की गई थी, पुलिस ने जसवाल को तलब किया और शिकायतकर्ताओं से माफी मांगने का आदेश दिया.

सृष्टि कहती हैं, जब भारतीय पत्रकारों की सुरक्षा की बात आती है तो इस ऑनलाइन उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई एक तत्काल प्राथमिकता है. यह जून की शुरुआत में कार्यभार संभालने वाली नई सरकार के लिए आरएसएफ (रिपोर्टर्स विदाउड बॉर्डर्स) द्वारा की गई सबसे महत्वपूर्ण सिफारिशों में से एक है.

हाल ही में पत्रकारों के दमन के खिलाफ काम करने वाली संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने सृष्टि जसवाल के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि, “नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में अपना तीसरा कार्यकाल शुरू कर चुके हैं, आरएसएफ चरम दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी नेटवर्क द्वारा पत्रकारों के खिलाफ बढ़ते अभियानों को लेकर चिंतित है.”

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के दक्षिण एशिया डेस्क प्रमुख, सेलिया मर्सिएर ने सृष्टि व उन जैसे तमाम पत्रकार जो ट्रोलर्स का शिकार हो रहे हैं, के लिए कहती हैं कि, “जो आवाजें सत्ताधारी पार्टी और सुदूर दक्षिणपंथियों द्वारा प्रसारित विचारधारा के खिलाफ बोलने की हिम्मत करती हैं, उन पर तुरंत ट्रोलर्स द्वारा हमला किया जाता है. धमकाया जाता है. उन्हें देशद्रोही या देश विरोधी करार दिया जाता है. अधिकांश भारतीय प्रेस को स्व-सेंसशिप में धकेलना. आरएसएफ पत्रकारों की विश्वसनीयता को नष्ट करने और उन्हें चुप कराने के लिए सत्ता में बैठे लोगों द्वारा रचित इस रणनीति की निंदा करता है. भारतीय अधिकारियों को इसे खत्म करना चाहिए जो पिछले दस साल से सूचना के अधिकार को दबा रहा है. पत्रकारों के खिलाफ उत्पीड़न और मानहानि अभियान चलाने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए.”

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