यह भारत के लिए गर्व के पल हैं कि उत्तर प्रदेश से निकला एक बच्चा जो कभी भूखे पेट, फेंका हुआ खाना भी खाने को मजबूर हुआ था..आज वह विश्व पटल पर जाकर हंगर इंडेक्स में नीचे गिरने वाले देशों में भूख मुक्ति अभियान की सेवा करने का प्रयास कर रहा है. जैसे सुपरमैन, बैटमैन, स्पाइडरमैन आदि पर रियलिस्टिक स्टोरी है वैसे में फूडमैन पर रियल स्टोरी बननी चाहिए….

‘आइये कोई मजहब ऐसा बनाया जाए जहां कोई न रहे भूखा और बस पुण्य कमाया जाए’.. ये लखनऊ के रहने वाले फूडमैन के नाम से मशहूर विशाल सिंह के शब्द हैं. प्रतिदिन 1000 से अधिक भूखे लोगों को खाना खिलाने वाले विशाल का मानना है कि वह ‘पुण्यों का फिक्स डिपॉजिट’ कर रहे हैं.
पिछले 16 वर्षों से अनवरत कैंसर पीड़ित मरीजों और जरूरतमंदों की सेवा कर रहे फूडमैन भड़ास से हुई बातचीत में कहते हैं, “ये हमारे देश का दुर्भाग्य है जो जीडीपी तो बढ़ रही लेकिन हंगर इंडेक्स में हमारा देश लगातार नीचे गिर रहा है. हम लोग ‘हंगर फ्री वर्ल्ड के बैनर तले’ अब देश ही नहीं पूरे विश्व के लिए काम करना चाहते हैं. इसके लिए 25 से 26 जुलाई हमारे नेतृत्व में बैंकाक में बैठक होनी है, जिसमें कई देशों के लोग सहभागिता करेंगे.”

कोविड महामारी के दौरान जब कोई व्यक्ति अपने घर से निकलने तक को तैयार नहीं था तब फूडमैन विशाल सिंह द्वारा पांच कम्युनिटी किचन बनाकर, खासतौर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बिहाफ पर डीआरडीओ कोविड केंद्र एवं हज हाउस कोविड सेंटर का संचालन उन्हें दिया गया था. यहां उन्होंने सैकड़ों की तादाद में मरीजों व उनके परिजनों को निशुल्क भोजन कराने के साथ ही ऑक्सीजन रेगुलेटर बनाकर लाखों लोगों की जिंदगी बचाई.
विशाल कहते हैं कि, “करीब 14 वर्ष पहले एक समय वह भी आया था था जब बीमार पिता का इलाज कराने वे गुरूग्राम गए थे. वहां उन्हें कई दिन भूखा रहना पड़ा. वह फेंका हुआ भोजन करते थे. वहीं से जिंदगी में गांठ बांध ली थी कि जब तक यह शरीर रहेगा किसी जरूरतमंद-भूखे व्यक्ति को भूखा नहीं सोना पड़ेगा.” वर्तमान समय में विशाल सिंह काशी विश्वनाथ मंदिर के माध्यम से प्रधानमंत्री जी की मुहिम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने की मुहिम में भी फूडमैन विशाल सिंह अहम भूमिका निभा रहे हैं.
इतना ही नहीं 42 वर्षीय विशाल सिंह, लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, डॉ राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और बलरामपुर जिला अस्पताल में प्रसादम सेवा के तहत 1000 से अधिक जरूरतमंद मरीजों को प्रतिदिन निशुल्क भोजन मुहैया करा रहे हैं. यह काम वे पिछले 16 वर्षों से ज्यादा समय से कर रहे हैं.

इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में तीमारदारों के लिए 8 आदर्श स्थाई रैन बसेरे बनाए हैं, जिनमें 650 से अधिक लोग आराम से रहकर अपने परिजनों का इलाज करा रहे हैं. और तो और गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए महानगर में वृद्ध नागरिकों के साथ मिलकर एक छोटा सा स्कूल भी उन्होंने खोला है, जहां बच्चे पढ़ कर अपने परिवार और समाज के बीच गर्व फील कर रहे हैं.
फूडमैन विशाल बताते हैं कि समाज और सेवा को समर्पित उनका एक मीडिया संस्थान भी है. जो सेवा पथ मीडिया के नाम से पिछले तीन वर्षों से असहाय और पीड़ितों, शोषितों का मंच बना हुआ है. विशाल अब भारत ही नहीं बल्कि विश्व को भूख से मुक्त करने की मुहिम की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
फूडमैन विशाल सिंह ने हर किसी को आपात स्थिति के लिए अपना पर्सनल नंबर जनसेवा के लिए सुलभ करवा रखा है, जो 24 घंटे निर्बाध रूप से एक ही रिंग में उठता है. प्रत्येक जरूरतमंद की सेवा में हरदम तत्पर विशाल सिंह का नंबर नीचे लिखा है.



