आदित्य कुमार दुबे-

वरिष्ठ पत्रकार व अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी-अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों में कार्यरत रहे तीर्थराज कुशवाहा के निधन हो जाने का समाचार सामने आया है. उन्हें चंपारण की पत्रकारिता का भीष्म पितामह कहा जाता था.
तीन दिन पहले उनका इंटरव्यू लेने की कोशिश कर रहा था, उन्होंने कहा था कि आने से एक दिन पहले बता दीजिएगा. लेकिन साक्षात्कार से पहले उनके निधन की सूचना ने मुझे स्तब्ध कर दिया है.
1980-90 के दौर में जब मिनी चंबल कहा जाने वाला पश्चिम चंपारण जिला आपराधिक आतंक की आंच में झुलस रहा था, तब अपराधियों के खिलाफ उनकी पैनी लेखनी से परेशान दस्यु गिरोहों ने उन्हें अगवा कर लिया था. लंबे समय तक अपराधियों के चंगुल में रहने के बाद प्रशासन व पुलिस ने अभियान चलाकर सकुशल उनकी बरामदगी की थी.
डकैतों के चंगुल में रहने के दौरान पहली बार वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन झा से इनका परिचय हुआ था. राजीव रंजन उनके बहुत बड़े फैन हैं. झा साहब इनको अपना सीनियर मानते हैं. झा साहब उनकी रिहाई के लिए उस वक्त आंदोलन पर भी बैठ गए थे.
जब लाल कार्ड घोटाला हुआ था, उस खौफनाक दौर में भी जब अच्छे-अच्छे लोगों ने अपराधियों और दबंगों के समक्ष घुटने टेक दिए थे, तब उस दौर में भी तीर्थराज कुशवाहा बिना खौफ पत्रकारिता के अपने कर्तव्य पथ पर चलते रहे. उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में अपनी धारदार लेखनी का लोहा मनवाया था.
तीर्थराज जी वर्तमान में स्वतंत्र पत्रकारिता करते थे. कई जगह उनके समाचार आज भी छपा करते थे. समसामयिक विषयों पर उनका ज्यादा ध्यान रहता था. इनका चंपारण की धरती को छोड़कर चले जाना दुखःद समाचार है. उनके निधन से चंपारण की पत्रकारिता में शोक की लहर व्याप्त हो गई है.
जानकारी के अनुसार इनका शुगर लेवल काफी बढ़ गया था. बगहा के सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बेतिया रेफर कर दिया था. उनके परिवार के लोग बेतिया नहीं जाकर, गोरखपुर लेकर जा रहे थे. इसी दरमियान रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. ईश्वर तीर्थराज कुशवाहा जी के आत्मा को शांति प्रदान करें..


