अवैध रूप से धन जुटाने के आरोपी साई प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज से संबंधित निवेशकों के दावों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक समिति का गठन किया है. एससी ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उच्चाधिकार प्राप्त बिक्री समिति (HSPC) गठित की है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व जज जस्टिस एस रवींद्र भट्ट करेंगे.
गौरतलब है कि यह विवाद साल 2015 से चल रहा है. सेबी ने साई प्रसाद समूह को निवेशकों से उगाही गई अवैध रकम को लौटाने को कहा था. क्योंकि साई प्रसाद दो कंपनियां साई प्रसाद फूड्स लिमिटेड और साई प्रसाद प्रापर्टीज लिमिटेड बनाकर विभिन्न स्कीमों के तहत जनता से पैसे उगाह रही थी. इन दोनों कंपनियों के जरिए जनता से अरबों रुपये लिए गए.
एक समय साई प्रसाद समूह का मीडिया में भी दखल बढ़ा था, जब यह देश का पहला हाई डेफिनेशन चैनल न्यूज एक्सप्रेस लेकर आया था. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ ग्रुप ने प्रिंट में भी हमवतन नामक अख़बार के जरिए जगह बनाई थी. इस साप्ताहिक अखबार का प्रकाशन यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, हिमाचल और महाराष्ट्र के हिंदी भाषी क्षेत्रों को कवर करता था.

निवेशकों से की गई अवैध धन उगाही के चलते कंपनियों के दो फाउंडर-डायरेक्टर पिछले 8 सालों से अधिक समय से जेल में थे, जो कैद को ध्यान में रखते हुए अदालत द्वारा अंतरिम जमानत पर बाहर आ सके थे.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने समिति के गठन को लेकर अपना फैसला सुनाया. पीठ ने आरोपियों-याचिकर्ताओं की याचिका पर विचार किया. याचिका में प्रार्थना की गई कि सेबी को समयबद्ध तरीके से उनकी कुर्क की गई संपत्तियों को समाप्त करने और बिक्री की आय को यथासंभव वास्तविक निवेशकों को वितरित करने का निर्देश दिया जाए.
अदालत ने यह देखते हुए कि यचिकाकर्ता निवेशकों की राशि वापस करना चाहते थे, लेकिन संबंधित एजेंसियों के पास कुर्क-अचल संपत्तियों की सार्वजनिक नीलामी करने के लिए अपेक्षित संरचनात्मक क्षमता का अभाव था, न्यायालय ने अपना आदेश पारित किया.
न्यायालय ने कहा कि, “हम भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करना उचित समझते हैं, जिससे पक्षों के बीच पूर्ण न्याय हो सके. इसलिए एचएसपीसी का गठन किया जा सके.”
न्यायालय द्वारा नियुक्त HSPC में कौन कौन है?
जस्टिस एस रवींद्र भट्ट, पूर्व जज सुप्रीम कोर्ट (अध्यक्ष), डॉ जस्टिस सतीश चंद्र, पूर्व जज इलाहाबाद हाईकोर्ट (सदस्य), सेबी द्वारा नामित व्यक्ति जो निदेशक रैंक का अधिकारी होगा, प्रदीप कुमार शर्मा, रजिस्ट्रार (रिटायर), सुप्रीम कोर्ट (सदस्य सचिव- सह नोडल अधिकारी) व अन्य.
फैसले में न्यायालय ने बताया है कि HSPC किस तरह से परिसंपत्तियों की नीलामी करेगा, बिक्री से प्राप्त राशि को समर्पित अकाउंट में समायोजित करेगा तथा धन वापसी की प्रक्रिया को अंजाम देगा. इसने संबंधित पक्षों के दायित्वों, आवश्यक सचिवीय-सह-प्रशासनिक आवश्यकताओं तथा देय पारिश्रमिक को भी निर्धारित किया.
विवाद की जड़ और कब क्या हुआ?
याचिकाकर्ता तीन सदस्यों (पिता, माता और पुत्र) का परिवार ने कुछ कंपनियां बनाईं, जैसे मेसर्स साई प्रसाद प्रॉपर्टीज़ लिमिटेड (2) मेसर्स साई प्रसाद फ़ूड्स लिमिटेड (3) मेसर्स साई प्रसाद कॉर्पोरेशन लिमिटेड तथा (4) मेसर्स श्री साई स्पेस क्रिएशन्स लिमिटेड (संचयी रूप से साई ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ के रूप में जाना जाता है). इसके बाद SEBI को उनकी कंपनियों के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुईं, जिसमें धन के अवैध रूप से एकत्रीकरण का आरोप लगाया गया. तदनुसार, SEBI ने याचिकाकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि वे निवेशकों से कोई धन एकत्र नहीं करेंगे या कोई सामूहिक निवेश योजना नहीं चलाएंगे.
समय के साथ याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना लगाया गया और 30,561,041,451 रुपये की वसूली की कार्यवाही शुरू की गई. याचिकाकर्ताओं की कंपनियों के स्वामित्व वाली सभी अचल संपत्तियां और आभूषण भी कुर्क किए गए.
वर्ष 2015 में छत्तीसगढ़ में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अवार्ड चिट और धन संचलन योजना (प्रतिबंध) अधिनियम, 1978 की धारा 3, 4 और 5 के तहत एफआईआर दर्ज की गई. उन्हें वर्ष 2016 में इस मामले के तहत गिरफ्तार किया गया. इसके बाद छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों में कई अन्य एफआईआर दर्ज की गईं.
याचिकाकर्ता नंबर 1 और 2 को हिरासत में रखा गया, जबकि याचिकाकर्ता नंबर 3 (पुत्र) को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2023 में जमानत पर रिहा कर दिया। अप्रैल, 2024 में यह निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ उसी या संबंधित मुद्दों पर किसी भी नए मामले में उन्हें अगले आदेश तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.



Yogesh
February 13, 2025 at 2:07 am
मेरे दो लाख रुपए जमा किए हे