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सियासत

राहुल मुस्कुराए, मोदी ग़ुस्साए! देखें फोटो

सुप्रिया श्रीनेत-

ह तस्वीर अपने आप में नरेंद्र मोदी की कितनी बड़ी हार है. जिंदगी के कितने ही साल जिस आदमी को खत्म करने में, उसके ख़िलाफ़ अनर्गल झूठ बोलने में, उसके परिवार के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार करने में, उसके ख़िलाफ़ षड्यंत्र रचने में, उसको मटियामेट करने में लगा दिए. वो आज उनके सामने बैठा है – उन्मुक्त, बेफिक्र, बेख़ौफ़ और मुस्कुरा रहा है.

मोदी को ज़रूर लगता होगा उनकी सारी मेहनत धरी की धरी रह गई.

शायद उनको कहीं ना कहीं सच की ताक़त का एहसास होता होगा, समझ आता होगा कि लाखों करोड़ों खर्च करने के बाद भी आख़िर क्या हुआ!

आज उनका चेहरा बेरंग है, हँसी ग़ायब है, और जिसको नेस्तोनाबूद करने में सारी ताक़त झोंक दी वो सामने बैठ कर हँस रहा है!


प्रशांत टंडन-

ये फोटो घूम घूम कर टाइम लाइन पर आकर बता रही है कि मोदी का व्यक्तिव कितना कमज़ोर है और अपने लिये बने मंच के अलावा और कहीं और कितने असहज हैं. जो दस साल प्रधानमंत्री और 12 साल मुख्यमंत्री रहा हो उसे तो आत्मविश्वास से भरा होना चाहिये.

चेहरा घमंड नहीं बल्कि एहसास-ए-कमतरी दिखा रहा है.
दूसरी तरफ राहुल गांधी बिलकुल सहज दिखाई दे रहे हैं.
सोचिये मिडिल क्लास ने किसे अपना रोल मॉडल चुना है – अपने जैसा.

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1 Comment

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  1. इतिहास तर्कों के हिसाब से नहीं चलता। इतिहास को कुप्रचार के हिसाब से भी नहीं चलता। ठीक उसी तरह से जैसे धर्म और आध्यात्मिक दुनिया अस्तित्व विज्ञान के अनुसार नहीं चलता। ठीक वैसे ही जैसे परामनोविज्ञान, पारलौकिक और पराभौतिकी की दुनिया प्रायोगिक विज्ञान की पकड़ में नहीं आती।

    आपको कांग्रेस अध्यक्ष रहे और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष के बयानों की ही तरह यह टिप्पणी अगर समझ नहीं आती तो इसमें राहुल गांधी का तो कोई दोष नहीं है। उनकी बातों का कोई अर्थ निकालना संभव है।

    इसी प्रकार से एक चित्र में बेशर्मी से अकारण हंसते हुए एक इंसान, नाक पकड़ कर और मुंह चुरा कर छिप कर हंसते हुए दो अन्य आदमियों के आधार पर यह फैसला नहीं किया जा सकता कि कौन हारा है कौन जीता?

    लेकिन पूरा विश्व जानता है कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठा हुआ है? जो बैठा हुआ है वहीं गंभीर है। जिनका वजूद कुछ भी नहीं है और जिनकी वजह से डेढ़ सौ साल पुरानी कांग्रेस अस्तित्व समापन के हाशिए पर पहुंच चुकी है, उनके मुस्कुराने से भारत के इतिहास पर कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि उन पर तो पूरा देश हंस ही रहा है। किसी को पप्पू कहा जा रहा है और कोई पांच मौके पर बिना सोचे यह बयान दोहरा रहा है कि देश के लिए राहुल गांधी ने जान दी और उनके चिथड़े उड़ गए उनके टुकड़े-टुकड़े उड़ गए।

    राजनीति में बेशर्मी का भी एक स्वाद होता है और जिनको इस का नशा लग जाता है, उनके साथ बलात्कार होने पर भी उन्हें महसूस ही नहीं होता की कुछ गलत हुआ है।

    नहीं समझ आ रहा है कोई बात नहीं समझ जाएंगी आप। कुछ ज्यादा वक्त थोड़ी लगना है। तब तक आप मुस्कुराइए क्योंकि बांग्लादेश में सत्ता पलट हो गया है। आपके लिए बहुत खुशी की बात है। बेशक हंसने और खुश होने की बात है। आज वहां हुआ है तो कल यहां होगा। यही सोचिए।

    लेकिन यह भी सोचिए कि यदि यह विद्रोह भारत में न होकर कांग्रेस पार्टी की भीतर हो गया तो क्या करेंगे आप लोग?

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